संदर्भ:
भारत ने एक महत्वपूर्ण परिवर्तन किया है, जिसमें ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) के उदय के माध्यम से विश्व के ‘बैक ऑफिस’ से ‘ग्लोबल ब्रेन ट्रस्ट’ (वैश्विक मस्तिष्क केंद्र) के रूप में विकसित होना शामिल है।
ऐतिहासिक बदलाव:
- अतीत (बैक ऑफिस): ऐतिहासिक रूप से, भारत को एक लागत-कटौती गंतव्य के रूप में देखा जाता था जहाँ बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (MNCs) डेटा प्रविष्टि, बुनियादी IT और ग्राहक सहायता (BPOs) जैसे सस्ते काम भेजती थी।
- वर्तमान (ब्रेन ट्रस्ट): आज, MNCs भारत में केवल लागत बचत के लिए नहीं, बल्कि नवाचार और उच्च-स्तरीय निर्णय लेने के लिए GCC स्थापित कर रही हैं। ये केंद्र अब अपनी मूल कंपनियों के भविष्य का निर्धारण करते हैं।
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) का विकास:
- वेव 1.0 (1990 का दशक): बिना किसी रणनीतिक अधिकार के नियमित IT कार्यों और बैक-ऑफिस सहायता पर ध्यान केंद्रित।
- वेव 2.0 (2000 का दशक): प्रक्रिया परिवर्तन, मानकीकरण और नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग (KPO) का उद्भव।
- वेव 3.0 (2010 का दशक): मूल्य प्रवास (Value migration), एनालिटिक्स और उत्पाद विकास की शुरुआत, और उत्कृष्टता केंद्रों (CoE) की स्थापना।
- वेव 4.0 (2020-वर्तमान): AI और क्वांटम R&D में नेतृत्व, ‘एजेंटिक AI’ की तैनाती और भारत स्थित केंद्रों में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका।
तकनीकी नेतृत्व और वैश्विक प्रभाव:
- एजेंटिक AI (Agentic AI): मानक जनरेटिव AI (जैसे- ChatGPT) के विपरीत, 58% भारतीय GCC ‘एजेंटिक AI’ में भारी निवेश कर रहे हैं—ये स्वायत्त प्रणालियाँ बिना मानवीय हस्तक्षेप के जटिल कार्यों को करने में सक्षम हैं।
- उत्कृष्टता केंद्र: भारत में GCC अब क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर डिजाइन, वित्त और कानूनी सेवाओं जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों के केंद्र हैं।
- ‘फॉलो द सन’ मॉडल: यह मॉडल 24/7 नवाचार चक्र सुनिश्चित करता है।
- जब अमेरिकी कार्यालय सोता है, तो भारतीय टीम काम जारी रखती है, जिससे भारत में एक ‘शैडो लीडरशिप’ तैयार होती है।
- वर्तमान पैमाना: भारत में अब 1,800 से अधिक GCC हैं, जो लगभग 21 लाख पेशेवरों को रोजगार प्रदान करते हैं।
भारत पर सामाजिक-आर्थिक प्रभाव:
- उच्च-मूल्य रोजगार: निम्न-स्तरीय आउटसोर्सिंग से अनुसंधान, नवाचार और रणनीतिक भूमिकाओं में परिवर्तन ने उच्च-कुशल, उच्च-वेतन वाली नौकरियाँ पैदा की हैं।
- महानगरों से परे विस्तार: टियर-2 और टियर-3 शहरों (जैसे- जयपुर, इंदौर, कोच्चि) में GCC का विस्तार विकेंद्रीकृत विकास को बढ़ावा देता है, तथा महानगरीय बुनियादी ढाँचे पर दबाव कम करता है।
भारत की बढ़त बनाए रखने में चुनौतियाँ:
- प्रतिभा अंतराल: AI सुरक्षा, क्लाउड आर्किटेक्चर जैसे उभरते क्षेत्रों में विशेष कौशल की कमी है।
- साइबर सुरक्षा लागत: डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम, 2023 के तहत साइबर हमलों और अनुपालन दायित्वों की बढ़ती दर लागत को बढ़ाती है।
- OECD का 15% वैश्विक न्यूनतम कर: यह MNCs की कर-बचत रणनीतियों को प्रभावित करता है।
- ट्रांसफर प्राइसिंग की जटिलताएँ: कठोर नियमों के कारण अक्सर बहुराष्ट्रीय कंपनियों और भारतीय अधिकारियों के मध्य कर विवाद उत्पन्न होते हैं।
- पश्चिमी संरक्षणवाद: अमेरिका और यूरोप में ‘डिजिटल संप्रभुता’ को बढ़ावा देने वाली नीतियाँ उच्च-मूल्य वाले कार्यों की ऑफशोरिंग को प्रतिबंधित कर सकती हैं।
आगे की राह:
- राष्ट्रीय GCC नीति फ्रेमवर्क (बजट 2026): नीतिगत निश्चितता सुनिश्चित करने के लिए, स्पष्ट दिशा-निर्देश और प्रोत्साहन जारी किए जाने चाहिए।
- डिजिटल सिंगल-विंडो सिस्टम: MNCs के निर्बाध प्रवेश के लिए केंद्र और राज्यों को एक एकीकृत मंजूरी मंच संचालित करना चाहिए।
- R&D प्रोत्साहन: ट्रांसफर प्राइसिंग मानदंडों को सरल बनाना और डीप-टेक निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कर छूट का विस्तार करना।
- कौशल अंतर को पाटना: पाठ्यक्रम को फ्रंटियर प्रौद्योगिकियों के साथ जोड़ना और प्रमाणन कार्यक्रमों का विस्तार करना।
निष्कर्ष
भारत को एक अग्रणी वैश्विक ज्ञान और नवाचार केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए, निरंतर कौशल उन्नयन, विनियामक निश्चितता और रणनीतिक नीति समर्थन के माध्यम से इस परिवर्तन को बनाए रखने की आवश्यकता है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न. भारत का सेवा क्षेत्र कम-मूल्य वाली आउटसोर्सिंग से उच्च-मूल्य वाली ज्ञान सेवाओं की ओर बढ़ रहा है। इस परिवर्तन के कारकों और निहितार्थों का परीक्षण कीजिए।
(10 अंक, 150 शब्द)
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