UPSC PYQs

Prelims, Mains & Optional PYQs

UPSC Notes

Comprehensive & Short Notes

भारत की विदेश नीति को समुद्र की ओर रुख करने की आवश्यकता है

भारत की विदेश नीति को समुद्र की ओर रुख करने की आवश्यकता है 25 Jul 2026

संदर्भ:

पश्चिम एशिया, लाल सागर और काला सागर में बढ़ते संघर्षों ने भारतीय समुद्री नाविकों (सीफेयरर्स) की संवेदनशीलता को उजागर किया है। इससे भारत की विदेश नीति, समुद्री कूटनीति तथा वाणिज्य-दूतावास (कांसुलर) में उनके संरक्षण को समाहित करने की आवश्यकता रेखांकित हुई है।

समुद्री नाविक (सीफेयरर्स) कौन हैं?

  • समुद्री नाविक अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री परिवहन में लगे वाणिज्यिक जहाजों (मर्चेंट शिप्स) पर नियोजित प्रशिक्षित कर्मी होते हैं।
    • इनमें कप्तान, अधिकारी, इंजीनियर, रेटिंग, रसोइये और वाणिज्यिक जहाजों के संचालन के लिए उत्तरदायी अन्य चालक दल के सदस्य शामिल होते हैं।

भारतीय समुद्री नाविकों की वर्तमान स्थिति:

  • वैश्विक समुद्री कार्यबल: भारत में तकरीबन 3.2 लाख नाविक (जून 2025 तक) मौजूद हैं और यह विश्व के नाविक कार्यबल में 12% से अधिक का योगदान देता है, जो फिलीपींस के बाद वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर है।
  • बढ़ता सामरिक महत्त्व: भारतीय समुद्री नाविक (सीफेयरर्स) वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाओं (सप्लाई चेन) तथा समुद्री लॉजिस्टिक्स को सुचारु रूप से संचालित रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं।
  • बढ़ते सुरक्षा जोखिम: पश्चिम एशिया तथा अन्य समुद्री संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों (मैरिटाइम हॉटस्पॉट्स) में चल रहे संघर्षों के कारण कई भारतीय समुद्री नाविक (सीफेयरर्स) मारे गए हैं, घायल हुए हैं इसके अलावा की समुद्री नाविकों को हिरासत में ले लिया गया है या उन्हें असहाय स्थितियों में छोड़ दिया गया है ।

भारतीय नाविकों के समक्ष उपस्थित प्रमुख चुनौतियाँ निम्नलिखित हैं :

  • जटिल अधिकार-क्षेत्र: जहाज़ प्रायः सुविधा ध्वज अथवा अनुकूल पंजीकृत ध्वज (फ़्लैग ऑफ़ कन्वीनियंस) के तहत संचालित होते हैं, जिसके कारण नाविकों के कल्याण का उत्तरदायित्व ध्वज-राज्य, जहाज़ के मालिक, बंदरगाह-राज्य, बीमा कंपनी तथा नाविक की राष्ट्रीयता वाले देश के बीच विभाजित हो जाती है।

नोट: Flags of Convenience (FOC) क्या है ?

  • फ़्लैग ऑफ़ कन्वीनियंस एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें जहाज का वास्तविक मालिक किसी अन्य देश का होने के बावजूद, अपने जहाज को किसी दूसरे देश में पंजीकृत (Register) कराता है, ताकि उसे उस देश के अनुकूल कानूनों, कम कर (Tax), कम नियमों (Regulations) और कम परिचालन लागत का लाभ मिल सके।
  • अर्थात, जहाज जिस देश का झंडा (Flag) फहराता है, वही उसका “Flag State” माना जाता है, भले ही उसका मालिक किसी अन्य देश का हो।
    • उदाहरण: यदि किसी भारतीय कंपनी का जहाज पनामा (Panama) में पंजीकृत है और पनामा का झंडा फहराता है, तो वह फ़्लैग ऑफ़ कन्वीनियंस कहलाएगा।

  • संघर्ष क्षेत्र: लाल सागर, अदन की खाड़ी, काला सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे क्षेत्रों में वाणिज्यिक जहाजों को मिसाइल हमलों, ड्रोन, बारूदी सुरंगों (माइन्स), समुद्री डकैती और बंधक बनाए जाने के खतरों का सामना करना पड़ता है।
  • परित्याग (अबैंडनमेंट): भारत ने 2025 में परित्यक्त समुद्री नाविकों की सबसे अधिक संख्या दर्ज की, जिसने श्रम दायित्वों के अंतरराष्ट्रीय प्रवर्तन में खामियों को उजागर किया है।
  • कमज़ोर वाणिज्य-दूतावास (कांसुलर) समन्वय: वर्तमान वाणिज्य-दूतावास (कांसुलर) तंत्र क्षेत्रीय आधार पर संगठित है, जिसके कारण वह अत्यधिक गतिशील समुद्री कर्मियों (मैरिटाइम वर्कर्स) को समय पर सहायता प्रदान करने में प्रायः सक्षम नहीं हो पाता।
  • सूचना का अभाव (इन्फॉर्मेशन गैप): आपातकालीन स्थितियों के दौरान परिवार के पास प्रायः नाविकों के स्थान, सुरक्षा और रोजगार की स्थिति के बारे में सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं होती है।

भारत के लिए महत्त्व:

  • समुद्री सुरक्षा: भारतीय नाविकों की सुरक्षा करना एक उत्तरदायी समुद्री शक्ति के रूप में भारत की भूमिका को सुदृढ़ करता है।
  • आर्थिक महत्त्व: भारत के व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और शिपिंग उद्योग के लिए सुरक्षित समुद्री संचालन आवश्यक है।
  • प्रवासी सुरक्षा: नाविकों का प्रभावी संरक्षण विदेशों में अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए भारत की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।
  • रणनीतिक विश्वसनीयता: एक सुदृढ़ नाविक सुरक्षा ढाँचा वैश्विक समुद्री शासन में भारत की स्थिति को बढ़ाता है।

मौजूदा सरकारी पहलें:

  • नाविक प्रथम प्रतिक्रिया (सीफेयरर फर्स्ट रिस्पॉन्स): सरकार ने संघर्ष क्षेत्रों में भारतीय नाविकों का लेखा-जोखा रखने और आपातकालीन प्रतिक्रियाओं के समन्वय के लिए ‘सीफेयरर फर्स्ट’ (नाविक प्रथम) तंत्र शुरू किया है।
  • मैरीटाइम डैशबोर्ड: संकट के दौरान जहाजों की निगरानी करने, खतरों का आकलन करने और चालक दल के कल्याण का समन्वय करने के लिए एक समर्पित डैशबोर्ड निर्मित किया गया है।
  • तैनाती परामर्श (डिप्लॉयमेंट एडवाइजरी): नौवहन महानिदेशालय (DGS) ने शिपिंग कंपनियों को होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों को तैनात करने से बचने की सलाह दी है।
  • परित्याग के खिलाफ कार्रवाई: नौवहन महानिदेशालय (DGS) ने भर्ती एजेंसियों को बार-बार परित्याग के मामलों से जुड़े जहाजों पर भारतीय नाविकों को नियुक्त करने से प्रतिबंधित कर दिया है, जब तक कि निर्धारित अनुपालन शर्तें पूरी नहीं हो जाती हैं ।

अंतरराष्ट्रीय विधिक ढाँचा:

  • समुद्री श्रम कन्वेंशन (MLC), 2006: कार्य करने की स्थिति, मजदूरी, स्वदेश वापसी (रेपेट्रिएशन) और चालक दल के कल्याण से संबंधित न्यूनतम मानक स्थापित करता है।
  • अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO): समुद्री सुरक्षा, संरक्षा और शिपिंग विनियमन के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक विकसित करता है।
  • अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO): अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के माध्यम से नाविकों के लिए श्रम अधिकारों और कल्याण मानकों को बढ़ावा देता है।

प्रमुख चुनौतियाँ:

  • कमजोर अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही तंत्र : कुछ ध्वजांकित राष्ट्र (फ्लैग स्टेट्स) द्वारा दायित्वों का प्रवर्तन अपर्याप्त बना हुआ है।
  • सीमित द्विपक्षीय ढाँचा : मौजूदा समुद्री समझौते कांसुलर संरक्षण और कानूनी सहायता के बजाय मुख्य रूप से प्रमाण पत्र मान्यता और रोजगार पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
  • विदेशी क्षेत्राधिकारों पर निर्भरता: नाविकों की रक्षा करने की भारत की क्षमता प्रायः अंतरराष्ट्रीय कानूनी और वाणिज्यिक व्यवस्थाओं द्वारा सीमित होती है।
  • जोखिम प्रकटीकरण की कमी: नाविकों को रोजगार स्वीकार करने से पहले जहाज के स्वामित्व, बीमा स्थिति, प्रतिबंधों की स्थिति या सुरक्षा जोखिमों के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी जाती है।

आगे की राह:

  • समुद्री कांसुलर कूटनीति को सुदृढ़ करना: विशिष्ट समुद्री कांसुलर प्रोटोकॉल स्थापित करना और प्रमुख वैश्विक बंदरगाहों में प्रशिक्षित समुद्री अधिकारियों को नामित करना।
  • वास्तविक समय निगरानी प्रणाली विकसित करना: उच्च जोखिम वाले समुद्री क्षेत्रों के लिए सीफेयरर फर्स्ट  डैशबोर्ड का विस्तार कर इसे एक स्थायी पूर्व चेतावनी (अर्ली वार्निंग) और संकट प्रतिक्रिया तंत्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए ।
  • द्विपक्षीय समझौतों को सुदृढ़ करना: समुद्री सहयोग समझौतों में कांसुलर पहुँच, कानूनी सहायता, चालक दल के कल्याण और समयबद्ध स्वदेश वापसी से संबंधित प्रावधानों को शामिल किया जाना चाहिए ।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाना: आईएमओ (IMO) और आईएलओ (ILO) के तहत वैश्विक मानकों को मजबूत करने के लिए फिलीपींस और इंडोनेशिया जैसे प्रमुख नाविक-आपूर्ति करने वाले देशों के साथ सहयोग को बढ़ावा देना ।
  • भर्ती पारदर्शिता में सुधार: रोजगार अनुबंधों पर हस्ताक्षर होने से पहले जहाज के स्वामित्व, बीमा, प्रतिबंधों की स्थिति, परिचालन मार्गों और चालक दल के परित्याग के पिछले मामलों के संबंध में प्रकटीकरण को अनिवार्य बनाना।
  • नाविकों के अधिकारों की रक्षा करना: नाविकों को रोजगार संबंधी दंड का सामना किए बिना आधिकारिक रूप से नामित उच्च जोखिम वाले संघर्ष क्षेत्रों में तैनाती से इनकार करने की अनुमति देना।

निष्कर्ष:

जैसे-जैसे भारत एक अग्रणी समुद्री राष्ट्र के रूप में उभर रहा है, उसके समुद्री नाविकों की सुरक्षा और उसकी विदेश नीति, समुद्री कूटनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का एक अभिन्न अंग होनी चाहिए। सीमाओं, झंडों और क्षेत्राधिकारों से आगे बढ़कर भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, कांसुलर तैयारियों और सुदृढ़ कानूनी सुरक्षा उपायों को संयोजित करने वाले एक व्यापक ढाँचे की आवश्यकता है।

UPSC मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

प्रश्न (UPSC CSE Mains 2023, GS-II):

भारत के वैश्विक हितों की रक्षा में समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) का क्या महत्त्व है? हिंद महासागर क्षेत्र में उभरती चुनौतियों के संदर्भ में भारत द्वारा अपनाई गई समुद्री रणनीति का परीक्षण कीजिए। (15 अंक)

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न

प्रश्न (UPSC Prelims 2022):

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

  1. अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) संयुक्त राष्ट्र की एक विशिष्ट (Specialized) एजेंसी है।
  2. IMO का प्रमुख उद्देश्य समुद्री सुरक्षा, नौवहन की संरक्षा तथा जहाजों द्वारा समुद्री प्रदूषण की रोकथाम के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों का विकास करना है।

उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2

उत्तर: (c) 1 और 2 दोनों

भारत की विदेश नीति को समुद्र की ओर रुख करने की आवश्यकता है

Explore UPSC Foundation Batches

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Free Counselling for UPSC Aspirants

Connect with our experts and take the right next step.

Expert Guidance
Personalized Strategy
100% Free

Book Your Free Session

NEED ASSISTANCE?

Request a Callback

Our counsellor will connect with you and help you choose the right course and centre.

  • Expert Guidance
  • Course & Fee Information
  • Quick Callback Support

Request a Callback

Books
UPSC PYQs
UPSC Notes
Current Affairs
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.