संदर्भ:
भारत ने वैश्विक स्तर पर सफल तकनीकी पेशेवरों और उद्यमियों को तैयार किया है, फिर भी इसके घरेलू नवाचार पारिस्थितिक तंत्र को अग्रणी प्रौद्योगिकियों के निर्माण में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
- नवाचार केवल एप्लिकेशन विकसित करने तक सीमित नहीं है; इसका अर्थ है जटिल समस्याओं के लिए नए समाधान खोजना।
- इंडिया इनोवेट-2026 जैसे कार्यक्रमों ने भारतीय स्टार्टअप्स की क्षमता तथा एक मजबूत नवाचार पारिस्थितिक तंत्र के निर्माण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
नवाचार का अर्थ
नवाचार
- नवाचार से तात्पर्य नए विचारों, उत्पादों, प्रक्रियाओं या प्रौद्योगिकियों को विकसित करने से है, जो मौजूदा समस्याओं का समाधान करते हैं।
- इसमें ज्ञान और अनुसंधान को व्यावहारिक समाधानों में बदलना शामिल है।
डीप टेक
- डीप टेक से तात्पर्य उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान तथा इंजीनियरिंग पर आधारित प्रौद्योगिकियों से है।
- इसके लिए आवश्यक है:
- दीर्घकालिक अनुसंधान
- उच्च निवेश
- उन्नत बुनियादी ढाँचा
- उदाहरण:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता)
- अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
- रक्षा प्रौद्योगिकी
- सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी
- पदार्थ विज्ञान (Material science)
भारत के लिए डीप टेक तकनीकी का महत्त्व
- रणनीतिक स्वतंत्रता: उन्नत प्रौद्योगिकियों का स्वदेशी विकास विदेशों पर निर्भरता को कम करता है।
- आर्थिक विकास: डीप टेक स्टार्टअप उच्च मूल्य वाले उद्योग तथा रोजगार के अवसर उत्पन्न कर सकते हैं।
- वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता: एआई, सेमीकंडक्टर और उन्नत प्रौद्योगिकियों में अग्रणी देश वैश्विक आर्थिक प्रणालियों को प्रभावित करते हैं।
- सामाजिक चुनौतियों का समाधान: नवाचार निम्नलिखित से संबंधित मुद्दों का समाधान कर सकता है:
- स्वास्थ्य सेवा
- कृषि
- जलवायु परिवर्तन
- ऊर्जा सुरक्षा
भारत के नवाचार पारिस्थितिक तंत्र में चुनौतियाँ
- अग्रणी एआई क्षमता की कमी: भारत व्यापक रूप से वैश्विक कंपनियों द्वारा विकसित उन्नत एआई मॉडलों का उपयोगकर्ता बना हुआ है।
- स्वदेशी फ्रंटियर एआई विकसित करने के लिए भारी वित्तीय संसाधनों तथा अनुसंधान क्षमता की आवश्यकता होती है।
- डीप टेक की उच्च लागत: एआई मॉडल और सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन जैसी प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्यक है:
- अरबों डॉलर का निवेश
- लंबी विकास अवधि
- प्रौद्योगिकी राष्ट्रवाद : देशों द्वारा उन्नत प्रौद्योगिकियों पर प्रतिबंध लगाने से अन्य देशों के लिए पहुँच सीमित हो सकती है।
- विदेशी प्लेटफॉर्म्स पर निर्भरता रणनीतिक कमजोरियाँ उत्पन्न करती है।
- कमजोर अनुसंधान पारिस्थितिक तंत्र: इनके बीच सीमित सहयोग:
- विश्वविद्यालयों
- उद्योग
- अनुसंधान संस्थानों
फ्रंटियर एआई और भारत
- अर्थ
- फ्रंटियर एआई से तात्पर्य अत्यधिक उन्नत एआई प्रणालियों से है, जो कुछ कार्यों में मानव-स्तरीय क्षमताओं के बराबर या उससे अधिक हो सकती हैं।
- उदाहरण
- वैश्विक एआई कंपनियों द्वारा विकसित उन्नत लार्ज लैंग्वेज मॉडल।
- भारत के लिए स्वदेशी एआई विकसित करने की आवश्यकता
- यह सुनिश्चित करने के लिए:
- डेटा संप्रभुता
- तकनीकी स्वतंत्रता
- वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता
आगे की राह
- डीप टेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना: अनुसंधान-गहन स्टार्टअप्स के लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण और सहायता प्रदान करना।
- स्थिर नीतिगत परिदृश्य: पूर्वानुमानित निर्माण करें:
- कर नीतियाँ
- विनियम
- निवेश नियम
- विश्वविद्यालय-उद्योग संबंधों को मजबूत करना: अनुसंधान के व्यावसायीकरण और नवाचार साझेदारी को प्रोत्साहित करना।
- शहरी पारितंत्र में सुधार: निम्नलिखित में सुधार करके वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करना:
- स्वच्छ पर्यावरण
- सार्वजनिक परिवहन
- जीवन की गुणवत्ता
- स्वदेशी नवाचार पर ध्यान केंद्रित करना: केवल एक प्रौद्योगिकी उपभोक्ता होने की बजाय प्रौद्योगिकी निर्माता बनने की ओर बढ़ना।
निष्कर्ष
भारत की भविष्य की तकनीकी ताकत एक मजबूत डीप टेक पारिस्थितिक तंत्र के निर्माण पर निर्भर करती है। हालाँकि वैश्विक प्रौद्योगिकियों को अपनाना महत्त्वपूर्ण है, लेकिन दीर्घकालिक नेतृत्व के लिए अनुसंधान, नवाचार तथा स्वदेशी क्षमताओं में निवेश की आवश्यकता है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न. “भारत के ‘ब्रेन ड्रेन’ (प्रतिभा पलायन) से ‘ब्रेन सर्कुलेशन’ (प्रतिभा संचरण) में संक्रमण के लिए न केवल जोखिम पूँजी में, बल्कि सार्वजनिक वस्तुओं तथा राजनीतिक पूँजी में भी भारी निवेश की आवश्यकता है।” भारत में डीप टेक नवाचार पारिस्थितिक तंत्र को बढ़ावा देने के संदर्भ में इस कथन का विश्लेषण कीजिए।
(15 अंक, 250 शब्द)
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