संदर्भ
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित ‘चलो संसद’ विरोध प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order) एवं सार्वजनिक सुरक्षा (Public Safety) का हवाला देते हुए केंद्रीय दिल्ली के कुछ क्षेत्रों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया।
इंटरनेट शटडाउन क्या है?
- इंटरनेट शटडाउन से आशय किसी निश्चित क्षेत्र और निश्चित अवधि के लिए सरकार द्वारा इंटरनेट अथवा इलेक्ट्रॉनिक संचार सेवाओं को जानबूझकर निलंबित (Suspend) या बाधित (Disrupt) करने से है।
- इंटरनेट शटडाउन के प्रकार
- पूर्ण नेटवर्क शटडाउन
- इंटरनेट की गति कम करना
- विशिष्ट प्लेटफ़ॉर्म/ऐप को अवरुद्ध करना
कानूनी ढाँचा
- दूरसंचार अधिनियम, 2023 की धारा 20(2)(b) इंटरनेट शटडाउन को नियंत्रित करती है।
- इंटरनेट सेवाओं का निलंबन केवल निम्न परिस्थितियों में किया जा सकता है— सार्वजनिक आपातकाल की स्थिति में, अथवा सार्वजनिक सुरक्षा के हित में।
- केवल विरोध प्रदर्शन (Protest) इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करने का वैध आधार नहीं है।
- प्रत्येक इंटरनेट शटडाउन आदेश में निम्नलिखित आवश्यक है—
- आदेश लिखित रूप में तथा कारण सहित होना चाहिए।
- आदेश सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया जाना चाहिए।

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- इसका प्रभाव न्यूनतम आवश्यक क्षेत्र एवं अवधि तक सीमित होना चाहिए।
- पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु आदेश का सार्वजनिक प्रकाशन किया जाना चाहिए।
- दूरसंचार (सेवाओं का अस्थायी निलंबन) नियम, 2024 नियम 3(2) के अनुसार प्रत्येक शटडाउन आदेश को सार्वजनिक किया जाना अनिवार्य है। आदेश में निम्न विवरण स्पष्ट होना चाहिए— तिथि, समय, अवधि तथा प्रभावित क्षेत्र
संवैधानिक ढाँचा
यद्यपि भारतीय संविधान में इंटरनेट तक पहुँच का स्पष्ट मौलिक अधिकार प्रदान नहीं किया गया है, फिर भी यह अनेक मौलिक अधिकारों से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है।
- अनुच्छेद 19(1)(a): वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार।
- अनुच्छेद 19(1)(g): किसी भी व्यवसाय, व्यापार या पेशे को करने की स्वतंत्रता।
- अनुच्छेद 21: जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार, जिसमें निम्न तक पहुँच भी सम्मिलित है—
- शिक्षा
- स्वास्थ्य सेवाएँ
- वित्तीय सेवाएँ
- डिजिटल शासन (Digital Governance)
न्यायिक सुरक्षा
- अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ (2020): सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि— इंटरनेट तक पहुँच अनुच्छेद 19(1)(a) तथा अनुच्छेद 19(1)(g) के प्रभावी प्रयोग का अभिन्न अंग है।
- अनिश्चितकाल (Indefinite) के लिए इंटरनेट शटडाउन असंवैधानिक है।
- प्रत्येक इंटरनेट शटडाउन को निम्नलिखित परीक्षणों पर खरा उतरना होगा—
- वैधता
- वैध उद्देश्य
- आवश्यकता
- आनुपातिकता
- फहीमा शिरीन बनाम केरल राज्य (2019): केरल उच्च न्यायालय ने माना कि— इंटरनेट तक पहुँच अनुच्छेद 21 के अंतर्गत शिक्षा के अधिकार तथा गोपनीयता के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न (UPSC CSE Mains 2021, GS Paper-II)
प्रश्न : सूचना प्रौद्योगिकी के युग में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के मध्य संतुलन बनाए रखना लोकतांत्रिक शासन की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। इस कथन के आलोक में इंटरनेट प्रतिबंध के संवैधानिक एवं विधिक पक्षों का परीक्षण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न (UPSC CSE Prelims 2023)
प्रश्न: भारत के संविधान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार अनुच्छेद 19(1)(a) के अंतर्गत प्रदत्त है।
- राज्य, अनुच्छेद 19(2) के अंतर्गत सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order) के हित में इस अधिकार पर युक्तिसंगत प्रतिबंध लगा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2
उत्तर: (c) 1 और 2 दोनों |