संदर्भ:
हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका, इजराइल और ईरान के मध्य हालिया सैन्य संघर्षों के उपरांत, विश्लेषकों का यह तर्क है कि सैन्य हमलों का सामना करने के बावजूद ईरान रणनीतिक रूप से अधिक मजबूत होकर उभरा है। इसे “ईरान की क्रांति 2.0” के रूप में वर्णित किया गया है।
पृष्ठभूमि: ईरान की क्रांति (1979 ई.)
- 1979 से पूर्व:
- ईरान पर शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी का शासन था।
- राजशाही पूरी तरह पश्चिमी शक्तियों के साथ जुड़ी हुई थी।
- राजनीतिक दमन और आर्थिक असमानता बढ़ गई थी।
- अयातुल्ला रुहोल्लाह खमेनी के नेतृत्व में धार्मिक विपक्ष ने जन-विरोध प्रदर्शनों को लामबंद कर दिया था।
- मुख्य घटनाएँ:
- जनवरी 1979: शाह ईरान छोड़कर भाग गया।
- 1 फरवरी, 1979: खमेनी की वापसी।
- 1 अप्रैल, 1979: ईरान एक इस्लामिक गणराज्य बन गया।
इसे “ईरान की क्रांति 2.0” क्यों कहा जा रहा है?
इस संदर्भ में यह तर्क है कि हालिया संघर्ष ने ईरान की रणनीतिक स्थिति को और भी मजबूत किया है।
- क्षेत्रीय प्रभाव में वृद्धि: ईरान ने पड़ोसी खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को खतरा पहुँचाने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।
- यह खाड़ी देशों को पूरी तरह से अमेरिकी सुरक्षा गारंटी पर निर्भर रहने की बजाय ईरान के साथ सीधे जुड़ाव की नीति अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।
- शासन का बने रहना: ये हमले ईरान की धार्मिक राजनीतिक व्यवस्था को उखाड़ फेंकने में विफल रहे।
- इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने शासन पर अपना मजबूत नियंत्रण बनाए रखा।
- सुदृढ़ राष्ट्रीय पहचान: ईरानी शासन के आलोचक भी बाह्य सैन्य हमलों के खिलाफ एकजुट हो गए। और इन संघर्षों ने ईरान में जिन बातों को अधिक प्रभावी बनाया वे हैं:
- राष्ट्रीय एकता
- देशभक्ति
- पश्चिम-विरोधी भावना इत्यादि |
- आर्थिक पुनरुद्धार की संभावना: यदि प्रतिबंधों में ढील दी जाती है, तो व्यापार पुनः आरंभ हो सकता है और निवेश में भी वृद्धि हो सकती है, जिससे आर्थिक सुधार संभव होगा।
भारत के लिए इसके क्या निहितार्थ हैं ?
ईरान निम्नलिखित कारणों से भारत के लिए रणनीतिक रूप से अपरिहार्य बना हुआ है:
- ऊर्जा सुरक्षा: ऐतिहासिक रूप से भारत के ऊर्जा आयात का एक बड़ा हिस्सा ईरान से आयात किया जाता रहा है।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य: भारत का अधिकांश कच्चे तेल का आयात इसी रणनीतिक चोकपॉइंट से होकर गुजरता है।
- चाबहार बंदरगाह: भारत के लिए यह निम्नलिखित बिंदुओं पर अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाता है :
- अफगानिस्तान तक पहुँच
- मध्य एशिया से कनेक्टिविटी
- पाकिस्तान को बायपास करने का मार्ग
- अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC): ईरान भारत को रूस, मध्य एशिया और यूरोप से जोड़ने वाले प्रवेश द्वार के रूप में भी कार्य करता है।
भारत की नीति
भारत को अपनी विश्व के विविध देशों के साथ जुड़ाव की नीति को जारी रखनी चाहिए:
- इजराइल के साथ संबंध बनाए रखना ।
- ईरान के साथ संबंध बनाए रखना ।
- किसी भी विशिष्ट भू-राजनीतिक गुट में शामिल होने से बचना ।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: युद्ध के बाद ईरान का पुनरुत्थान पश्चिम एशिया के सुरक्षा ढाँचे में एक मौलिक परिवर्तन का प्रतीक है। इसके भू-राजनीतिक और आर्थिक निहितार्थ का मूल्यांकन कीजिए और इस बात की चर्चा कीजिए कि भारत किस प्रकार से अपनी विविध देशों के साथ संबंधों की रणनीति को पुनः पुष्ट कर सकता है?
(15 अंक, 250 शब्द)
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