संदर्भ
उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) 25 वर्षों से सक्रिय होने के बावजूद, उत्तर-पूर्व और मुख्यभूमि भारत के बीच अभी भी एक भावनात्मक दूरी विद्यमान है।
पृष्ठभूमि
- अष्टलक्ष्मी(Ashtalakshmi): आठ उत्तर-पूर्वी राज्यों को प्रायः “अष्टलक्ष्मी” (समृद्धि के आठ रूप) कहा जाता है, जो उनके सांस्कृतिक और सामरिक महत्व का प्रतीक है।
- अष्टलक्ष्मी में शामिल राज्य:
- अरुणाचल प्रदेश
- असम
- मणिपुर
- मेघालय
- मिजोरम
- नागालैंड
- त्रिपुरा
- सिक्किम
- दूरी संबंधी अन्याय(Tyranny of Distance): यह क्षेत्र केवल भौगोलिक रूप से ही दूर नहीं है, बल्कि भावनात्मक रूप से भी मुख्यभूमि भारत से अलगाव महसूस करता है — उत्तर-पूर्व और मुख्यभूमि भारत के बीच दिलों की दूरी।
संस्थागत प्रतिक्रिया
- उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) की भूमिका: इसकी स्थापना वर्ष 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा की गई थी, ताकि प्रणालीगत उपेक्षा को दूर किया जा सके और क्षेत्र के लक्षित विकास को गति प्रदान किया जा सके।
- यह आठ उत्तर-पूर्वी राज्यों के लक्षित विकास के लिए समन्वय मंत्रालय के रूप में कार्य करता है।
- हाल ही में इसने अपनी 25वीं वर्षगांठ (रजत जयंती) मनाई।
- यह उत्तर-पूर्वी राज्यों और मुख्यभूमि भारत के बीच भौगोलिक अलगाव और भावनात्मक असंपर्क को कम करने का प्रयास करता है।
- बजटीय विस्तार: पिछले दशक में DoNER मंत्रालय का बजट दोगुना से अधिक बढ़कर 2014-15 में ₹2,332 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में ₹5,892 करोड़ हो गया है।
- हालाँकि, केवल राजकोषीय व्यय से ही गहरी सामाजिक-सांस्कृतिक अलगाव को दूर नहीं किया जा सकता।
प्रमुख समस्याएँ
- पहचान पर प्राथमिकता, न कि केवल अवसंरचना: विकास पहलों में अक्सर अवसंरचना और कनेक्टिविटी पर जोर दिया जाता है, जबकि स्थानीय इतिहास, संस्कृति और पहचान पर अपर्याप्त ध्यान उपेक्षा और अलगाव की भावना को बढ़ावा देता है।
- नस्लीय भेदभाव: मुख्यभूमि शहरों में उत्तर-पूर्व के लोगों के विरुद्ध नस्लीय दुर्व्यवहार की घटनाएँ गहरे पूर्वाग्रह और सामाजिक बहिष्कार को दर्शाती हैं।
- उदाहरण: हाल ही में दिल्ली में अरुणाचल प्रदेश के UPSC अभ्यर्थियों के साथ हुआ नस्लीय दुर्व्यवहार।
- कानून-व्यवस्था दृष्टिकोण की सीमाएँ: सुरक्षा-केन्द्रित दृष्टिकोण तात्कालिक तनाव को नियंत्रित कर सकता है, परंतु भावनात्मक एकीकरण और सामाजिक संवेदनशीलता के बिना स्थायी राष्ट्रीय एकता सुनिश्चित नहीं कर सकता।
भावनात्मक एकीकरण के लिए पाँच-सूत्रीय रणनीति
- पाठ्यक्रम संबंधी सुधार: कक्षाएँ 5–10 के स्कूल पाठ्यपुस्तकों को संशोधित करें ताकि उत्तर-पूर्व के इतिहास, संस्कृति और योगदान को व्यवस्थित रूप से शामिल किया जा सके और संतुलित राष्ट्रीय दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया जा सके।
- उदाहरण: छात्रों को अहोम साम्राज्य के बारे में भी उतना ही पढ़ना चाहिए जितना वे फ्रांसीसी क्रांति के बारे में पढ़ते हैं।
- सीमावर्ती क्षेत्र अध्ययन विभाग: विश्वविद्यालयों को सीमावर्ती क्षेत्र अध्ययन के लिए समर्पित विभाग स्थापित करने चाहिए, जैसे वे अफ्रीकी या लैटिन अमेरिकी अध्ययन के लिए करते हैं।
- सीमावर्ती क्षेत्र अध्ययन को UPSC जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं में एक विशेष विषय के रूप में भी शामिल किया जा सकता है।
- IAS/IPS अधिकारियों के लिए अनिवार्य सेवा: अन्य राज्यों के अधिकारियों को सीमावर्ती क्षेत्रों में कम से कम दो वर्ष सेवा करना अनिवार्य किया जाना चाहिए। यह अनुभवजन्य सीख उन्हें स्थानीय संस्कृति और वास्तविकताओं को समझने में मदद करेगा।
- सिस्टर स्कूल/कॉलेज लिंक: मुख्यभूमि भारत के स्कूलों (जैसे, दिल्ली DPS) को सिस्टर संस्थानों के रूप में सीमावर्ती क्षेत्रों के स्कूलों जैसे नागालैंड के स्कूलों के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
- इसमें साझा परियोजनाएँ और छात्र आदान-प्रदान यात्रा शामिल होंगी, जिससे बच्चे छोटे उम्र से ही एक-दूसरे की संस्कृतियों के बारे में सीख सकें।
- क्षेत्रीय नायकों का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान: उत्तर-पूर्व के स्वतंत्रता सेनानी, विचारक और कलाकारों का जीवन राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाना चाहिए।
उदाहरण:
- भूपेन हजारीका: असम के एक दिग्गज गायक, संगीतकार और संगीत निर्देशक, जिन्हें असमिया संगीत और सांस्कृतिक एकीकरण में उनके योगदान के लिए जाना जाता है।
- गोपीनाथ बोरडोलोई: असम के पहले मुख्यमंत्री, जिन्होंने विभाजन के दौरान असम को पूर्वी पाकिस्तान का हिस्सा बनने से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- रानी गैदिनलियू: एक प्रमुख आध्यात्मिक और राजनीतिक नेता, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध आंदोलन का नेतृत्व किया और बाद में सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय एकीकरण के लिए कार्य किया।
निष्कर्ष
दिलों की दूरी को कम के लिए सतत विकासात्मक, सांस्कृतिक और संस्थागत प्रयासों की आवश्यकता है, ताकि उत्तर-पूर्व केवल भौगोलिक रूप से भारत से जुड़ा न रहे, बल्कि भावनात्मक और राष्ट्रीय ताने-बाने में पूरी तरह एकीकृत हो जाए।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: भारत के उत्तर-पूर्व के मुख्यधारा में समावेशन की प्रक्रिया किस हद तक सुरक्षा विमर्श तक सीमित रही है, न कि सामाजिक-सांस्कृतिक एकीकरण तक? विश्लेषण कीजिए।
(10 अंक, 150 शब्द)
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