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पैदल यात्री-अनुकूल शहर

पैदल यात्री-अनुकूल शहर 21 Jul 2026

संदर्भ

  • भारत के अधिकांश शहरों का विकास लोगों के बजाय मोटर वाहनों को केंद्र में रखकर किया गया है। परिणामस्वरूप पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों तथा दिव्यांगजनों को असुरक्षित और दुर्गम सड़कों का सामना करना पड़ता है।
  • हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय (2026) ने अपने एक निर्णय में पुनः स्पष्ट किया कि निर्धारित फुटपाथों पर सुरक्षित रूप से चलने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है। इस निर्णय ने जन-केंद्रित शहरी नियोजन की आवश्यकता को उजागर किया है ।

पृष्ठभूमि

  • तेजी से बढ़ते शहरीकरण और वाहनों के स्वामित्व में वृद्धि के कारण ट्रैफिक जाम की समस्या में वृद्धि हुई है और पैदल यात्रियों के लिए उपलब्ध स्थान में कमी आई है।
  • विभिन्न स्थानों पर फुटपाथ या तो उपलब्ध नहीं हैं या तो अतिक्रमित हैं अथवा खराब स्थिति में हैं।
  • सार्वजनिक स्थलों को पैदल यात्रियों की अपेक्षा वाहनों के लिए अधिक प्राथमिकता दी जा रही है।
  • इस प्रवृत्ति का नकारात्मक प्रभाव सड़क सुरक्षा, जनस्वास्थ्य तथा जीवन की गुणवत्ता पर पड़ता है।

सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय (2026)

  • मनियार इलियास एवं अन्य बनाम पी. ए. इन (2026)
    • मुख्य टिप्पणियाँ
      • सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय—
        • निर्धारित फुटपाथों पर सुरक्षित रूप से चलने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है।
        • राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सुरक्षित पैदल यात्री अवसंरचना सुनिश्चित करने के लिए नीतियाँ निर्मित की जानी चाहिए।
        • शहरों में सड़क निर्माण की योजना वाहनों के बजाय लोगों को प्राथमिकता देकर बनाई जानी चाहिए।
  • संवैधानिक आधार
    • अनुच्छेद 19(1)(घ)
      • भारत के संपूर्ण क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से आवागमन करने का अधिकार प्रदान करता है।
  • अनुच्छेद 21
    • जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है।
    • न्यायालय ने पुनः स्पष्ट किया कि गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार तभी संभव है जब नागरिकों को सुरक्षित एवं सुलभ सार्वजनिक स्थान उपलब्ध हों।

जनस्वास्थ्य के उपाय के रूप में पैदल चलना

  • पैदल चलना केवल परिवहन का साधन नहीं है, बल्कि जनस्वास्थ्य सुधार का एक महत्त्वपूर्ण उपाय भी है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन की सक्रिय गतिविधि प्रोफ़ाइल (2024)
    • भारत के लगभग 49.4% वयस्क अनुशंसित स्तर की शारीरिक गतिविधि नहीं कर पाते।
    • लगभग 57.2% महिलाएँ निर्धारित शारीरिक गतिविधि स्तर प्राप्त नहीं कर पातीं।
    • लगभग 74% बच्चे एवं किशोर पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं करते।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन की अनुशंसा
    • प्रत्येक वयस्क को प्रति सप्ताह कम-से-कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए।
    • विद्यालय, कार्यस्थल, बस स्टॉप तथा मेट्रो स्टेशन तक पैदल चलना इस लक्ष्य की प्राप्ति में महत्त्वपूर्ण रूप से योगदान दे सकता है।
  • पैदल चलने के स्वास्थ्य लाभ
    • नियमित पैदल चलने से—
      • मधुमेह का जोखिम कम होता है।
      • उच्च रक्तचाप नियंत्रित रहता है।
      • मोटापे की रोकथाम होती है।
      • फैटी लीवर रोग की संभावना कम होती है।
      • हृदय स्वास्थ्य बेहतर होता है।
      • मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
      • जोड़ों की एक्सर्साइज तथा इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ती है।

सड़क सुरक्षा संबंधी चिंताएँ

  • सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (भारत में सड़क दुर्घटनाएँ, 2024): पैदल यात्री तथा दोपहिया वाहन उपयोगकर्ता सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली कुल मृत्यु का लगभग 67% हिस्सा हैं।
  • राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो: लगभग 60% सड़क दुर्घटना मृत्यु पैदल यात्रियों और दोपहिया वाहन चालकों से संबंधित हैं।

पैदल यात्री अधिक संवेदनशील क्यों हैं?

  • पैदल चलने के लिए समर्पित अवसंरचना के अभाव में लोग सड़कों पर चलने को मजबूर हो जाते हैं।
  • तेज गति से चलने वाले वाहनों और पैदल यात्रियों की टक्कर प्रायः गंभीर चोट या मृत्यु का कारण बनती है।
  • अपर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, असुरक्षित सड़क पार मार्ग तथा अत्यधिक गति जोखिम को और बढ़ा देती है।

फेरीवालों और पैदल यात्रियों के अधिकारों को संतुलित करना 

  • सड़क विक्रेता (जीविका संरक्षण एवं सड़क विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014: सड़क विक्रेताओं को कानूनी मान्यता, जीविका संरक्षण तथा निर्धारित विक्रय क्षेत्र उपलब्ध कराते हुए पैदल यात्रियों की आवाजाही भी सुरक्षित रखी जाए।
  • संतुलित शहरी नियोजन: पैदल यात्रियों के लिए बाधारहित फुटपाथ, विक्रेताओं के लिए निर्धारित विक्रय क्षेत्र, वाहनों के लिए सुव्यवस्थित पार्किंग तथा आवश्यक सेवाओं के लिए उपयोगिता गलियारे विकसित किए जाएँ।
  • समावेशी शहरी स्थान: जीविका के अधिकार और पैदल चलने के अधिकार के मध्य संतुलन स्थापित करते हुए जन-केंद्रित शहरों का विकास किया जाए।

नागरिकों के लिए उपाय

  • पैदल चलने की आदत विकसित करें: विशेषकर भोजन के बाद नियमित रूप से चलें तथा प्रतिदिन 30 मिनट पैदल चलने का लक्ष्य रखें।
  • सक्रिय गतिशीलता अपनाएँ: एक किलोमीटर से कम दूरी के लिए पैदल चलें तथा सार्वजनिक परिवहन के साथ पैदल यात्रा को जोड़ें।
  • सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दें: सामुदायिक पैदल यात्रा समूहों से जुड़कर स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करें।
  • स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता दें: यदि पैदल चलने पर लगातार असुविधा या साँस लेने में कठिनाई हो तो चिकित्सकीय सलाह लें।

सरकार के लिए उपाय

  • शहरी अवसंरचना में सुधार: सुरक्षित फुटपाथ, साइकिल ट्रैक तथा सभी शहरी परियोजनाओं में सार्वभौमिक सुगम्यता मानकों को अपनाया जाए।
  • यातायात प्रवर्तन को मजबूत बनाना: अवैध पार्किंग पर कठोर दंड लगाया जाए तथा फुटपाथों से अतिक्रमण प्रभावी रूप से हटाया जाए।
  • पैदल यात्री प्राथमिकता क्षेत्र विकसित करना: विद्यालयों, अस्पतालों, बाजारों, मेट्रो स्टेशनों तथा सार्वजनिक परिवहन केंद्रों को पैदल यात्री-अनुकूल बनाया जाए।
  • सक्रिय गतिशीलता को बढ़ावा देना: शहरी नियोजन, परिवहन, जनस्वास्थ्य और जलवायु कार्रवाई को जोड़ते हुए राष्ट्रीय सक्रिय गतिशीलता मिशन प्रारंभ किया जाए।
  • पैदल चलने की सुगमता आधारित प्रदर्शन संकेतक अपनाना: शहरों का मूल्यांकन केवल फ्लाईओवर और सड़क विस्तार के आधार पर नहीं, बल्कि फुटपाथों की गुणवत्ता, सुगम्यता, सड़क सुरक्षा तथा पैदल सुगमता सूचकांक के आधार पर किया जाए।

भारत के लिए महत्त्व 

  • पैदल यात्री-अनुकूल शहरों के विकास से—
    • जनस्वास्थ्य में सुधार होगा।
    • सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु कम होगी।
    • समावेशी शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा।
    • निजी वाहनों पर निर्भरता कम होने से जलवायु परिवर्तन शमन में सहायता मिलेगी।
    • शहरों में जीवनयापन की सुगमता बढ़ेगी।
    • सतत विकास लक्ष्यों, विशेषकर लक्ष्य संख्या 3 (अच्छा स्वास्थ्य एवं कल्याण), लक्ष्य 11 (सतत शहर एवं समुदाय)और लक्ष्य संख्या 13 (जलवायु कार्रवाई) की प्राप्ति में योगदान मिलेगा।

चुनौतियाँ

  • तेजी से बढ़ता मोटरीकरण: निजी वाहनों की बढ़ती संख्या की वजह से सड़कों पर भीड़भाड़ में वृद्धि हुई है जिसकी वजह से पैदल यात्रियों एवं साइकिल चालकों के लिए स्थान कम हुआ है।
  • अतिक्रमण के विरुद्ध कमजोर प्रवर्तन: अवैध पार्किंग और फुटपाथों पर अतिक्रमण पैदल यात्रियों को सड़क पर चलने के लिए मजबूर करते हैं।
  • कमजोर पैदल यात्री अवसंरचना: निरंतर, सुगम और अच्छी तरह से विकसित फुटपाथों का अभाव, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांगजनों के लिए बड़ी समस्या है।
  • संस्थागत समन्वय में कमी: शहरी नियोजन प्राधिकरणों, नगर निकायों तथा परिवहन एजेंसियों के मध्य समन्वय का अभाव।
  • अपर्याप्त वित्तीय संसाधन: पैदल यात्री अवसंरचना के लिए सीमित धन तथा सड़कों और फ्लाईओवरों को प्राथमिकता।
  • जन-जागरूकता का अभाव: पैदल चलने की सुगमता, सड़क सुरक्षा तथा पैदल यात्रियों के अधिकारों के प्रति सीमित जागरूकता।

आगे की राह

  • जन-केंद्रित शहरी नियोजन: शहरों की योजना इस प्रकार बनाई जाए कि पैदल यात्रियों की सुरक्षा और सुगम्यता शहरी विकास का मूल आधार बने।
  • पैदल चलने और साइकिल चलाने को बढ़ावा: सभी शहरों की मास्टर योजनाओं में सुरक्षित, निरंतर फुटपाथ तथा समर्पित साइकिल ट्रैक शामिल किए जाएँ।
  • सड़क विक्रेता अधिनियम, 2014 का प्रभावी क्रियान्वयन: निर्धारित विक्रय क्षेत्र विकसित किए जाएँ तथा पैदल यात्रियों की आवाजाही बाधारहित सुनिश्चित की जाए।
  • सार्वजनिक परिवहन एवं अंतिम छोर तक संपर्क में सुधार: मेट्रो स्टेशन, बस स्टॉप, बाजार, विद्यालय तथा आवासीय क्षेत्रों को सुरक्षित पैदल मार्गों से जोड़ा जाए।
  • पैदल सुगमता का नियमित मूल्यांकन: सभी प्रमुख शहरी परियोजनाओं में फुटपाथ, सड़क पार मार्ग, प्रकाश व्यवस्था, सुगम्यता तथा पैदल यात्री सुरक्षा का नियमित आकलन किया जाए।
  • पैदल यात्री-प्रथम शहरी स्थान: वाहन-केंद्रित नियोजन से आगे बढ़कर सुरक्षित, समावेशी और सतत सक्रियता को बढ़ावा दिया जाए तथा सार्वजनिक स्थानों के प्रमुख उपयोगकर्ता के रूप में पैदल यात्रियों को मान्यता दी जाए।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न : 

प्रश्न : पैदल यात्री-अनुकूल शहर केवल सड़क सुरक्षा का विषय नहीं, बल्कि सुशासन, समावेशी शहरी विकास, जनस्वास्थ्य तथा सतत विकास का आधार हैं। इस कथन के आलोक में भारत में पैदल यात्री-अनुकूल शहरी अवसंरचना के महत्त्व, चुनौतियों तथा आवश्यक सुधारात्मक उपायों की विवेचना कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

प्रश्न: निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—

  1. सतत विकास लक्ष्य (SDG) 11 का उद्देश्य शहरों एवं मानव बस्तियों को समावेशी, सुरक्षित, लचीला और सतत बनाना है।
  2. अनुच्छेद 21 के अंतर्गत गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार की न्यायिक व्याख्या में सुरक्षित एवं सुलभ सार्वजनिक स्थानों तक पहुँच को भी शामिल किया गया है।
  3. सड़क विक्रेता (जीविका संरक्षण एवं सड़क विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 का उद्देश्य केवल सड़क विक्रेताओं को हटाना और फुटपाथों को अतिक्रमण-मुक्त करना है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a) केवल 1 और 2

पैदल यात्री-अनुकूल शहर

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