प्रधानमंत्री मोदी की इज़राइल यात्रा 2026

प्रधानमंत्री मोदी की इज़राइल यात्रा 2026 25 Feb 2026

संदर्भ

25 फरवरी 2026 तक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इज़राइल की अपनी दूसरी आधिकारिक यात्रा पर हैं, पहली यात्रा 2017 में हुई थी।

रणनीतिक एवं भू-राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

  • डी-हाइफ़नेशन (De-hyphenation) नीति: वर्ष 2026 की यह इज़राइल यात्रा एक स्वतंत्र द्विपक्षीय यात्रा के रूप में आयोजित की गई है, जिसमें फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण के नेतृत्व के साथ कोई समानांतर बैठक निर्धारित नहीं है। यह पश्चिम एशिया में भारत की “डी-हाइफ़नेशन” नीति को दर्शाता है।
    • भारत ने इज़राइल और फ़िलिस्तीन के साथ अपने संबंधों को अलग-अलग कर दिया है।
    • दोनों को स्वतंत्र द्विपक्षीय संबंधों के रूप में देखा जाता है।
    • भारत संयुक्त राष्ट्र में फ़िलिस्तीनी राज्य का समर्थन करता है, साथ ही इज़राइल के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूत कर रहा है।
  • अस्थिर क्षेत्रीय स्थिति: यह यात्रा पश्चिम एशिया में गंभीर उथल‑पुथल के बीच हो रही है, जहाँ ईरान के विरुद्ध अमेरिका की सैन्य तैयारी को गति प्रदान किया गया हैं तथा अक्टूबर 2025 में गाज़ा में एक नाज़ुक युद्धविराम स्थापित हुआ है।
  • हेक्सागॉन एलायंस (Hexagon Alliance): इज़राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ‘हेक्सागॉन एलायंस’ का प्रस्ताव रखा है, जिसमें भारत, इज़राइल, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, अफ़्रीकी देश और भूमध्यसागरीय देश (साइप्रस और ग्रीस) शामिल होंगे, ताकि कट्टर शिया और सुन्नी धुरों का मुकाबला किया जा सके।
    • हालाँकि, भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और ईरान तथा अरब देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने की इच्छा के कारण सतर्क रुख अपनाए हुए है।
  • भारत–मध्य पूर्व–यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC): गाजा युद्ध के कारण हुए विलंब के बावजूद, इस यात्रा का उद्देश्य इस गलियारे को स्वेज नहर के एक सुरक्षित विकल्प के तौर पर आगे बढ़ाना है, जिसे अभी हूती विद्रोहियों से खतरा है।

रक्षा और सुरक्षा सहयोग

  • मिशन सुदर्शन चक्र: मई 2025 में “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद भारत ने अभेद्य वायु एवं मिसाइल रक्षा कवच की आवश्यकता महसूस की। इस मिशन का उद्देश्य सभी हवाई खतरों से भारत की रक्षा हेतु बहु-स्तरीय रक्षा प्रणाली विकसित करना है।
  • ‘आयरन बीम(Iron Beam)’ पर ध्यान: भारत ने इज़राइल की 100 किलोवाट उच्च-ऊर्जा लेज़र प्रणाली “आयरन बीम” में रुचि दिखाई है।
    • ड्रोन, रॉकेट और मोर्टार को लागत-प्रभावी तरीके से रोकने में सक्षम।
    • अगली पीढ़ी की निर्देशित-ऊर्जा युद्ध प्रणाली का प्रतिनिधित्व करता है।
  • मौजूदा रक्षा परस्पर निर्भरता:
    • SIPRI (2020–24) के अनुसार, इज़राइल के कुल हथियार निर्यात का 34% भारत को जाता है।
    • संयुक्त परियोजनाओं में बराक-8 मिसाइल प्रणाली (सह-विकसित और सह-उत्पादित) शामिल है।
    • नवंबर 2025 का समझौता संयुक्त रक्षा तकनीक विकास पर बल देता है।
    • इज़राइल की ऑटोनॉमस गार्ड (Autonomous Guard) और एक भारतीय कंपनी के बीच $1.9 मिलियन का सर्विलांस समझौता निजी क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को दर्शाता है।
      • यह खरीदार–विक्रेता संबंध से दीर्घकालिक सह-विकास की ओर संरचनात्मक बदलाव का संकेत देता है, जो असममित और हवाई खतरों के विरुद्ध भारत की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है तथा रक्षा निर्माण में ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा देता है।

आर्थिक एवं अवसंरचनात्मक लक्ष्य

  • मुक्त व्यापार समझौता (FTA): नवंबर 2025 में संदर्भ की शर्तों (Terms of Reference) पर हस्ताक्षर के बाद, FTA को अंतिम रूप देना इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य है।
  • व्यापार मात्रा: 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 3.75 अरब डॉलर रहा, और भारत एशिया में इज़राइल का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
    • भारत–इज़राइल व्यापार में मुख्यतः हीरे, पेट्रोलियम उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स और चिकित्सा उपकरण शामिल हैं।
  • मानव गतिशीलता: रूस-शैली के ‘मानव गतिशीलता’ समझौते पर विचार किया जा रहा है — जो कुशल भारतीय कामगारों को इज़राइल में कार्य करने की अनुमति प्रदान करेगा, जैसा कि मौजूदा श्रम समझौतों में शामिल है।
  • अवसंरचना: इज़राइल भारतीय कंपनियों को अपने सड़क और बंदरगाह निर्माण में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

प्रौद्योगिकी, कृषि और विकास

  • कृषि: इज़राइल ने भारत में 35 से अधिक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए हैं, जहाँ आम, अनार और लीची जैसी फसलों के लिए उच्च-घनत्व खेती का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
  • जल प्रबंधन: इज़राइली एजेंसी MASHAV ने हरियाणा और राजस्थान के साथ जल संरक्षण और संसाधन प्रबंधन संबंधित समझौते किए हैं।
  • नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): प्रधानमंत्री यरुशलम इनोवेशन सेंटर का दौरा करेंगे, जो AI और उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग को दर्शाता है।

प्रतीकात्मक और कूटनीतिक महत्व

  • कनेसेट (Knesset) को संबोधित करना: एक दुर्लभ सम्मान के रूप में, प्रधानमंत्री मोदी को इज़राइल की संसद, कनेसेट, को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया गया है।
  • गाज़ा पुनर्निर्माण: गाजा के पुनर्निर्माण और विकास में भारत की संभावित भूमिका तथा स्थायी शांति स्थापना पर चर्चा होने की उम्मीद है।
    • भारत वर्त्तमान में पीस बोर्ड में पर्यवेक्षक दर्जा रखता है, जो गाजा के लिए $7 बिलियन के कोष का प्रबंधन करता है।

निष्कर्ष

भारत पश्चिम एशियाई भू-राजनीति में एक प्रमुख संतुलनकारी शक्ति के रूप में उभर रहा है — और सभी पक्षों द्वारा इसे महत्व दिया जा रहा है। यह यात्रा उस साझेदारी को मजबूत करती है, जिसमें भारत विशाल बाज़ार और मानवशक्ति प्रदान करता है, जबकि इज़राइल उन्नत प्रौद्योगिकी और पूँजी उपलब्ध कराता है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: इज़राइल के साथ भारत की सहभागिता विचारधारात्मक रुख से रणनीतिक व्यावहारिकता की ओर बदलाव को दर्शाती है। पश्चिम एशिया में भारत की “डी-हाइफनेशन” नीति के संदर्भ में इसका विश्लेषण कीजिए।

 (10 अंक, 150 शब्द)

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