UPSC PYQs

Prelims, Mains & Optional PYQs

UPSC Notes

Comprehensive & Short Notes

अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा और धर्मांतरण

अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा और धर्मांतरण 30 Mar 2026

संदर्भ

हाल ही में, सर्वोच्च न्यायालय एक मामले में यह कहा, कि अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के लोगों के लिए उपलब्ध है तथा किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण के परिणामस्वरूप, जन्म के बावजूद, धर्मांतरण के समय से ही अनुसूचित जाति का दर्जा तत्काल और पूरी तरह से समाप्त हो जाता है।

आरक्षण संबंधी प्रावधानों का विकास

  • अनुसूचित जाति आरक्षण का ऐतिहासिक आधार: दलित/अनुसूचित वर्गों के लिए आरक्षण की शुरुआत हिंदू जाति व्यवस्था के भीतर सदियों से चली आ रही अस्पृश्यता तथा सामाजिक बहिष्कार जैसे गंभीर दोषों के तहत समानता स्थापित करने के लिए की गई थी।
    • डॉ. बी. आर. अंबेडकर ने मसौदा समिति के अध्यक्ष के रूप में, शिक्षा, मंदिरों और सार्वजनिक संस्थानों से ऐतिहासिक बहिष्कार को दूर करने के लिए संविधान में सुरक्षा उपायों को शामिल किया।

संवैधानिक प्रावधान

  • अनुच्छेद 341(1): राष्ट्रपति, किसी राज्य के राज्यपाल के परामर्श के बाद, यह निर्दिष्ट करते हैं कि उस राज्य में किन समुदायों को अनुसूचित जाति के रूप में मान्यता दी गई है।
  • अनुच्छेद 341(2): केवल संसद ही अनुसूचित जाति की सूची में समुदायों को शामिल या बाहर कर सकती है।
    • राज्य सरकारों को इसे परिवर्तित करने का कोई अधिकार नहीं है।

संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950

  • खंड 3: इस आदेश में मूल रूप से कहा गया था, कि हिंदू धर्म से भिन्न धर्म को मानने वाले किसी भी व्यक्ति को अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाएगा।
  • सूची का विस्तार:
    • 1956: सिख धर्म को जोड़ा गया क्योंकि यह भारतीय मूल का है, तथा इसमें जातिगत विरासत शामिल है।
    • 1990: बौद्ध धर्म को जोड़ा गया क्योंकि अंबेडकर के नेतृत्व में कई दलित वर्गों ने धर्म परिवर्तन किया था।
  • अपवर्जन: ईसाई और इस्लाम धर्मों को अनुसूचित जाति के दर्जे से बाहर रखा गया है, क्योंकि ये धर्म सैद्धांतिक रूप से जातिविहीन माने जाते हैं और दोनों को विदेशी मूल का धर्म माना जाता है।

सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय (मार्च 2026)

  • चिंतादा आनंद मामला: मडिगा अनुसूचित जाति समुदाय के एक व्यक्ति ने ईसाई धर्म अपना लिया था, लेकिन बाद में SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत सुरक्षा मांगते समय अनुसूचित जाति के दर्जे का दावा किया।
  • मुख्य निर्णय: सर्वोच्च न्यायालय ने माना, कि ईसाई या इस्लाम में धर्मांतरण के साथ ही अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाता है।
  • मानना’ (Profess) की परिभाषा: अनुच्छेद 25 के तहत, ‘मानने’ का अर्थ है – किसी धर्म की सार्वजनिक रूप से घोषणा करना और खुले तौर पर उसका अभ्यास करना (उदाहरण के लिए, नियमित रूप से चर्च जाना)।
    • कोई व्यक्ति ऐसे धर्म का खुले तौर पर अभ्यास करते हुए अनुसूचित जाति के लाभ का दावा नहीं कर सकता, जो जाति व्यवस्था को मान्यता नहीं देता है।
  • दवा और बीमारी” सादृश्य: न्यायालय ने अनुसूचित जाति के आरक्षण की तुलना भेदभाव की ‘बीमारी’ के लिए ‘दवा’ से की।
    • यदि कोई व्यक्ति ऐसे धर्म में चला जाता है, जहाँ सैद्धांतिक रूप से जातिगत भेदभाव की ‘बीमारी’ मौजूद नहीं है, तो ‘दवा’ (आरक्षण) की आवश्यकता नहीं रह जाती है।

विद्यमान चर्चाएँ और याचिकाएँ

  • निरंतर भेदभाव: 2004 की एक याचिका में तर्क दिया गया है, कि दलित ईसाइयों और मुसलमानों को धर्मांतरण के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक कलंक तथा भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
    • इसमें दावा किया गया है, कि ऐतिहासिक धर्मांतरण अक्सर जातिगत उत्पीड़न के कारण बाध्यतापूर्वक किए गए थे, और इससे सामाजिक पूर्वाग्रह समाप्त नहीं हुआ।
  • के.जी. बालकृष्णन आयोग: अक्तूबर 2022 में, सरकार ने इस बात का अध्ययन करने के लिए इस आयोग का गठन किया, कि क्या ईसाई और इस्लाम धर्म अपनाने वालों को अनुसूचित जाति का दर्जा दिया जाना चाहिए। यह रिपोर्ट अभी कार्याधीन है।

पुन: धर्मांतरण और दर्जा पुनः प्राप्त करना

  • तीन परीक्षण: एक व्यक्ति, जो अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से अन्य (जैसे- ईसाई धर्म) में धर्मांतरण करता है, लेकिन बाद में पुन: धर्मांतरित होता है, वह SC दर्जा वापस पा सकता है यदि वह तीन परीक्षणों को पूरा करता है:
    • मूल सदस्यता: मूल SC वंश का पुख्ता साक्ष्य प्रदान करना।
    • वास्तविक पुन: धर्मांतरण: पिछले धर्म से पूर्ण अलगाव और मूल जातिगत रीति-रिवाजों को अपनाने का प्रदर्शन करना।
    • सामुदायिक स्वीकृति: मूल SC समुदाय को उस व्यक्ति को औपचारिक रूप से वापस स्वीकार करना चाहिए।

अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा

  • ST दर्जे का आधार: अनुसूचित जाति के दर्जे के विपरीत, अनुसूचित जनजाति का दर्जा धर्म-आधारित नहीं है और यह जनजातीय पहचान, रीति-रिवाजों तथा सामुदायिक जीवन से जुड़ा है।
  • धर्म और ST पहचान: अनुसूचित जनजातियों के सदस्य किसी भी धर्म का पालन कर सकते हैं (उदाहरण के लिए, नगालैंड में ईसाई धर्म) और फिर भी ST दर्जा बरकरार रख सकते हैं, क्योंकि जनजातीय पहचान को धार्मिक अभ्यास से स्वतंत्र माना जाता है।

निष्कर्ष

न्यायालय का तर्क उन संवैधानिक और वैधानिक प्रावधानों में निहित है, जो अनुसूचित जाति की पहचान को सीधे उस धर्म से जोड़ते हैं जिसे व्यक्ति मानता और उसके कार्यों का पालन करता है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न. अनुसूचित जाति (SC) के दर्जे को विशिष्ट धर्मों तक सीमित रखने के संवैधानिक तथा सामाजिक निहितार्थों का परीक्षण कीजिए। क्या यह धार्मिक स्वतंत्रता के साथ सामाजिक न्याय को पर्याप्त रूप से संतुलित करता है?

(10 अंक, 150 शब्द)

अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा और धर्मांतरण

Explore UPSC Foundation Batches

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Free Counselling for UPSC Aspirants

Connect with our experts and take the right next step.

Expert Guidance
Personalized Strategy
100% Free

Book Your Free Session

NEED ASSISTANCE?

Request a Callback

Our counsellor will connect with you and help you choose the right course and centre.

  • Expert Guidance
  • Course & Fee Information
  • Quick Callback Support

Request a Callback

Books
UPSC PYQs
UPSC Notes
Current Affairs
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.