//php print_r(get_the_ID()); ?>
Lokesh Pal
July 17, 2026 05:15
12
0
शिक्षा सुधारों का विषय हाल ही में शिक्षा सुधारों के समर्थक सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन के बाद एक बार पुनः चर्चा में आया है। इस अनशन का उद्देश्य भारत की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक एवं संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता की ओर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित करना है।
यह मुद्दा इस तथ्य को उजागर करती है कि शिक्षा में स्थायी सुधार केवल राजनीतिक नेतृत्व बदलने से नहीं, बल्कि संस्थागत परिवर्तन से ही संभव है।
उक्ति : “कोई भी शिक्षा व्यवस्था अपने शिक्षकों की गुणवत्ता से ऊपर नहीं उठ सकती।”
भारत का जनसांख्यिकीय लाभ तभी आर्थिक प्रगति का सशक्त आधार बन सकती है, जब उसे गुणवत्तापूर्ण, समावेशी तथा भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा का समर्थन प्राप्त हो। शिक्षा सुधारों का लक्ष्य रटने की प्रवृत्ति, कोचिंग पर अत्यधिक निर्भरता तथा प्रशासनिक नियंत्रण से आगे बढ़कर ऐसी शिक्षा व्यवस्था का निर्माण होना चाहिए, जो आलोचनात्मक चिंतन, नवाचार, समावेशिता और आजीवन सीखने की संस्कृति को प्रोत्साहित करे।
निबंधप्रश्न : “कोई भी शिक्षा व्यवस्था अपने शिक्षकों की गुणवत्ता से ऊपर नहीं उठ सकती।” — मैकिंज़ी रिपोर्ट (2007) (1000-1200 शब्द ) |
<div class="new-fform">
</div>

Latest Comments