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राष्ट्रीय नागरिक सम्मान: योग्यता, सम्मान और निष्पक्षता का प्रश्न

Lokesh Pal July 17, 2026 05:00 15 0

संदर्भ 

हाल के समय में यह विषय पुनः चर्चा में आया है क्योंकि भारत के राष्ट्रीय नागरिक सम्मानों, विशेषकर भारत रत्न तथा पद्म पुरस्कारों इत्यादि पर राजनीतिक प्रभाव, क्षेत्रीय असंतुलन, सम्मान देने में विलंब तथा चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी जैसे आरोप लगाए जा रहे हैं।

बहस का मुख्य मुद्दा यह है कि क्या ये सम्मान वास्तव में असाधारण योग्यता एवं आजीवन योगदान को सम्मानित करते हैं, अथवा इन पर चुनावी राजनीति और मीडिया की लोकप्रियता के प्रभाव को बढ़ता है।

भारत के प्रमुख राष्ट्रीय नागरिक सम्मान

भारत रत्न

  • भारत रत्न भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जिसकी स्थापना वर्ष 1954 में की गई थी।
  • यह किसी भी क्षेत्र में मानव प्रयास के सर्वोच्च स्तर की असाधारण सेवा या उपलब्धि के लिए प्रदान किया जाता है।
  • सामान्यतः एक वर्ष में अधिकतम तीन व्यक्तियों को यह सम्मान दिया जाता है।
  • यह सम्मान मरणोपरांत भी प्रदान किया जा सकता है।

पद्म पुरस्कार

भारत के नागरिक सम्मान तीन श्रेणियों में प्रदान किए जाते हैं—

  • पद्म विभूषण – असाधारण एवं विशिष्ट सेवा के लिए।
  • पद्म भूषण – उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा के लिए।
  • पद्म श्री – किसी भी क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवा के लिए।

संवैधानिक एवं न्यायिक स्थिति

अनुच्छेद 18

  • संविधान का अनुच्छेद 18(1) राज्य को उपाधियाँ प्रदान करने से रोकता है।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि भारत रत्न तथा पद्म पुरस्कार उपाधियाँ नहीं, बल्कि सम्मान एवं अलंकरण हैं।
  • इसलिए सम्मान प्राप्त व्यक्ति अपने नाम के आगे या पीछे इनका प्रयोग नहीं कर सकते।

बालाजी राघवन बनाम भारत संघ (1996)

  • सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय नागरिक सम्मानों की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा।
  • न्यायालय ने कहा कि इन सम्मानों का उपयोग व्यावसायिक लाभ अथवा व्यक्तिगत प्रचार के साधन के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।

वर्तमान पुरस्कार प्रणाली की मुख्य समस्याएँ

  • चयन प्रक्रिया में राजनीतिक प्रभाव
    • यह धारणा प्रबल होती जा रही है कि पुरस्कारों के चयन में राजनीतिक विचारों का प्रभाव रहता है।
    • सत्ता या राजनीतिक नेतृत्व के निकट रहने वाले व्यक्तियों को अपेक्षाकृत शीघ्र सम्मान मिलने की संभावना अधिक मानी जाती है।
    • ऐसी धारणाएँ पुरस्कार प्रणाली की विश्वसनीयता एवं निष्पक्षता को प्रभावित करती हैं।
    • उदाहरण :
      • कुछ पुरस्कारों की घोषणा का समय चुनावी अथवा राजनीतिक महत्व से जोड़कर देखा गया है।
  • चुनाव के निकट पुरस्कारों की घोषणा
    • कई बार पुरस्कारों की घोषणा चुनाव के आसपास की जाती है, जिससे राजनीतिक संदेश देने की धारणा बनती है।
    • राष्ट्रीय सम्मानों को चुनावी राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए।
    • ऐसी प्रवृत्ति पुरस्कार प्रणाली पर जनता के विश्वास को कमजोर कर सकती है।
  • क्षेत्रीय असंतुलन एवं सांस्कृतिक केंद्रीकरण
    • पुरस्कार के केंद्र में प्रायः दिल्ली और मुंबई जैसे महानगर रहे हैं, जहाँ प्रमुख सांस्कृतिक संस्थाएँ और निर्णय लेने वाले केंद्र स्थित हैं।
    • दक्षिण भारत, उत्तर-पूर्व, जनजातीय समुदायों तथा दूरदराज़ के क्षेत्रों के अनेक कलाकारों को अपेक्षाकृत देर से सम्मान मिलता है या वे उपेक्षित रह जाते हैं।
    • इससे समावेशी राष्ट्रीय सम्मान के बजाय सांस्कृतिक केंद्रीकरण की धारणा बनती है।
    • उदाहरण :
      • दक्षिण भारत तथा उत्तर-पूर्व के अनेक प्रतिष्ठित कलाकारों को उनके असाधारण योगदान के बावजूद काफी विलंब से राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ।
  • सांस्कृतिक अभिलेखन का अभाव
    • लोक कलाकारों, पारंपरिक शिल्पकारों तथा सांस्कृतिक साधकों का कोई व्यापक राष्ट्रीय अभिलेख उपलब्ध नहीं है।
    • अनेक योग्य कलाकार औपचारिक नामांकन प्रक्रिया से बाहर रह जाते हैं क्योंकि उनका समुचित दस्तावेजीकरण नहीं हुआ होता।
    • विश्वसनीय आँकड़ों के अभाव में समावेशी सम्मान प्रणाली प्रभावित होती है।
  • पुरस्कार के स्तर में असंगति
    • कई बार अपेक्षाकृत कम अनुभव वाले लोकप्रिय व्यक्तियों को उच्च सम्मान शीघ्र मिल जाता है।
    • वहीं दशकों तक योगदान देने वाले वरिष्ठ व्यक्तियों को जीवन के अंतिम चरण में अपेक्षाकृत निम्न सम्मान प्राप्त होता है।
    • इससे सम्मान की निष्पक्षता पर प्रश्न उठते हैं।
  • सम्मान देने में अत्यधिक विलंब
    • अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तियों को सम्मान बहुत अधिक आयु में या मरणोपरांत प्रदान किया जाता है।
    • समय रहते सम्मान देने से समाज उनके योगदान का सम्मान उनके जीवनकाल में ही कर सकता है।
  • राज्य स्तरीय पुरस्कारों की घटती प्रभावशीलता
    • अनेक राज्यों के सांस्कृतिक पुरस्कार अनियमितता तथा प्रशासनिक विलंब से प्रभावित हैं।
    • लंबे अंतराल के बाद एक साथ बड़ी संख्या में पुरस्कार घोषित करने से उनकी गरिमा और विशिष्टता कम होती है।
    • इससे सांस्कृतिक सम्मान की समग्र व्यवस्था कमजोर होती है।
  • राष्ट्रीय सम्मानों का व्यावसायीकरण
    • कुछ सम्मान प्राप्त व्यक्ति व्यावसायिक विज्ञापनों और प्रचार अभियानों से जुड़ जाते हैं।
    • अत्यधिक व्यावसायिक उपयोग से राष्ट्रीय सम्मान की नैतिक गरिमा एवं सार्वजनिक प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है।

योग्यता आधारित सम्मान क्यों आवश्यक हैं?

  • उत्कृष्ट कार्य करने की प्रेरणा मिलती है।
  • देश के सभी क्षेत्रों की प्रतिभाओं को समान सम्मान देकर राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है।
  • भारत की सांस्कृतिक विविधता का संरक्षण होता है।
  • सार्वजनिक संस्थाओं पर नागरिकों का विश्वास बढ़ता है।
  • युवा कलाकारों, वैज्ञानिकों, खिलाड़ियों तथा समाजसेवियों को उत्कृष्टता के लिए प्रेरणा मिलती है।

आगे की राह

  • चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए
    • स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चयन समिति का गठन किया जाए।
    • पात्रता तथा चयन के स्पष्ट मानदंड सार्वजनिक किए जाएँ।
    • संस्थागत व्यवस्था के माध्यम से राजनीतिक हस्तक्षेप को न्यूनतम किया जाए।
  • लोकप्रियता नहीं, योग्यता को प्राथमिकता दी जाए
    • सम्मान दीर्घकालिक योगदान, नवाचार तथा जनसेवा के आधार पर दिए जाएँ।
    • केवल प्रसिद्धि अथवा मीडिया में उपस्थिति को आधार न बनाया जाए।
  • सांस्कृतिक अभिलेखन को सुदृढ़ किया जाए
    • प्रत्येक जिले में लोक एवं पारंपरिक कलाकारों की पहचान के लिए राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण अभियान का विस्तार किया जाए।
    • लोक, जनजातीय, शास्त्रीय तथा क्षेत्रीय कलाकारों का राष्ट्रीय डिजिटल अभिलेख तैयार किया जाए।
  • क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए
    • उत्तर-पूर्व, जनजातीय क्षेत्रों, ग्रामीण कलाकारों तथा अन्य उपेक्षित क्षेत्रों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जाए।
    • राज्य अकादमियों, विश्वविद्यालयों तथा सांस्कृतिक संस्थानों के माध्यम से नामांकन को प्रोत्साहित किया जाए।
  • समय पर सम्मान प्रदान किया जाए
    • जहाँ संभव हो, योग्य व्यक्तियों को उनके जीवनकाल में ही सम्मानित किया जाए।
    • मरणोपरांत सम्मान सामान्यतः मृत्यु के उचित समय के भीतर प्रदान किए जाएँ।
  • राष्ट्रीय सम्मानों की गरिमा बनाए रखी जाए
    • सम्मान प्राप्त व्यक्तियों को ऐसे व्यावसायिक प्रचार से बचना चाहिए जिससे राष्ट्रीय सम्मान की प्रतिष्ठा कम हो।
    • राष्ट्रीय सम्मान सेवा, उत्कृष्टता और ईमानदारी के प्रतीक बने रहें, न कि व्यावसायिक मूल्य के।

निष्कर्ष

भारत के राष्ट्रीय नागरिक सम्मान उत्कृष्टता, सेवा और सांस्कृतिक उपलब्धियों के सर्वोच्च आदर्शों का सम्मान करने के लिए स्थापित किए गए हैं। चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता, योग्यता आधारित निर्णय, क्षेत्रीय समावेशन तथा संस्थागत स्वतंत्रता सुनिश्चित करके इन सम्मानों की विश्वसनीयता को और सुदृढ़ किया जा सकता है। इससे जनता का विश्वास भी मजबूत होगा कि राष्ट्रीय सम्मान केवल योग्यता और योगदान के आधार पर दिए जाते हैं, न कि सत्ता के निकट होने के आधार पर।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: “राष्ट्रीय नागरिक सम्मान उत्कृष्टता और जनसेवा के सर्वोच्च प्रतीक हैं, किंतु उनकी विश्वसनीयता चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता पर निर्भर करती है।” टिप्पणी कीजिए।

(10 अंक 150 शब्द)

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