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बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य की सुरक्षा में भारत को नेतृत्व करना चाहिए

Lokesh Pal July 23, 2026 05:00 3 0

संदर्भ

ईरान से जुड़े तनावों के बाद हूती विद्रोहियों द्वारा बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य (Strait of Bab el-Mandeb) से होकर गुजरने वाले जहाजों को बाधित करने की बढ़ती धमकियों ने विश्व के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न कर दी हैं। इसका भारत के व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा तथा समुद्री रणनीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।

2023–24 के लाल सागर संकट से प्राप्त सबक

  • हूती हमले : 2023 में गाज़ा युद्ध के बाद हूती विद्रोहियों ने फिलिस्तीनियों के समर्थन का दावा करते हुए लाल सागर में कम-से-कम 40 वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया।
  • ऑपरेशन प्रॉस्पेरिटी गार्जियन : दिसंबर 2023 में अमेरिका के नेतृत्व में एक समुद्री गठबंधन का गठन किया गया, जिसका उद्देश्य लाल सागर में नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) सुनिश्चित करना था।
  • संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2722 (2024) ने व्यापारिक जहाजों पर हमलों की निंदा की तथा समुद्री सुरक्षा का समर्थन किया।
  • भारतीय नौसेना की भूमिका : जनवरी 2024 में हमले का शिकार हुए एक ब्रिटिश तेल टैंकर के चालक दल को बचाकर भारतीय नौसेना ने अपनी समुद्री प्रतिबद्धता का परिचय दिया।
  • व्यापार मार्ग में व्यवधान : लगभग 2,000 जहाजों ने स्वेज नहर का उपयोग करने के बजाय केप ऑफ गुड होप के रास्ते यात्रा की, जिससे यात्रा का समय और लागत दोनों बढ़ गए।
  • आर्थिक प्रभाव 
    • मिस्र को स्वेज नहर से होने वाले राजस्व का लगभग एक-चौथाई नुकसान हुआ।
    • इज़राइल का ईलात बंदरगाह (Eilat Port) जहाजों की आवाजाही घटने के कारण दिवालियापन की स्थिति में पहुँच गया।

वर्तमान संकट अधिक गंभीर क्यों है?

  • रणनीतिक अनिश्चितता : अमेरिकी सैन्य बलों का ध्यान ईरान पर केंद्रित होने के कारण लाल सागर की सुरक्षा सुनिश्चित करने की उनकी क्षमता एवं इच्छा दोनों अनिश्चित हैं।
  • कूटनीतिक प्रभाव में कमी : पूर्व में भारत हूतियों पर हमले कम कराने के लिए ईरान के प्रभाव का उपयोग करता था, किंतु वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ भिन्न हैं।
  • कमजोर बहुपक्षीय प्रतिक्रिया: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मतभेदों के कारण प्रभावी समुद्री सुरक्षा बल को अधिकृत करना कठिन हो सकता है।
  • चीन का दृष्टिकोण : चीन अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा हेतु हूतियों के साथ द्विपक्षीय समझौते करने का प्रयास कर सकता है।
  • अनेक समुद्री अवरोध बिंदुओं का जोखिम : यदि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब दोनों क्षेत्रों में एक साथ अस्थिरता उत्पन्न होती है, तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

भारत के लिए निहितार्थ 

  • व्यापारिक संवेदनशीलता : बाब-अल-मंदेब में व्यवधान से लाल सागर एवं स्वेज नहर होकर गुजरने वाले भारत–यूरोप व्यापार मार्ग प्रभावित होंगे।
  • लॉजिस्टिक्स लागत में वृद्धि : केप ऑफ गुड होप से होकर जहाजों के जाने पर ईंधन की खपत, माल-भाड़ा (Freight) तथा बीमा लागत बढ़ जाती है।
  • आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान : महत्वपूर्ण आयात, निर्यात तथा औद्योगिक कच्चे माल की आपूर्ति में देरी हो सकती है।
  • मुद्रास्फीति का दबाव : परिवहन लागत बढ़ने से ऊर्जा, उर्वरक एवं आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।
  • भारतीय नाविकों की सुरक्षा : खतरनाक समुद्री क्षेत्रों में भारतीय नाविकों के संचालन पर प्रतिबंध लगने से हजारों समुद्री कर्मियों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।

समुद्री सुरक्षा के लिए भारत की रणनीति

  • नौसैनिक सुरक्षा ढाँचे का निर्माण 
    • भारत–फ्रांस–जापान सहयोग: भारत को फ्रांस और जापान के साथ मिलकर व्यापार संरक्षण कार्यबल (Trade Protection Task Force) का गठन करना चाहिए।
    • रणनीतिक लाभ: फ्रांस और जापान की जिबूती (Djibouti) में सैन्य उपस्थिति लाल सागर के निकट आवश्यक रसद (Logistics) सहायता प्रदान कर सकती है।
    • मौजूदा नौसैनिक सहयोग: इन देशों और भारतीय नौसेना के बीच होने वाले संयुक्त नौसैनिक अभ्यास समन्वित समुद्री अभियानों को सुगम बना सकते हैं।
  • क्षेत्रीय कूटनीतिक सहभागिता 
    • मिस्र एवं सऊदी अरब के साथ सहयोग: भारत को इन देशों के साथ सक्रिय सहयोग बढ़ाना चाहिए, क्योंकि उनकी अर्थव्यवस्था भी लाल सागर के सुरक्षित समुद्री व्यापार पर निर्भर है।
    • समावेशी दृष्टिकोण : सहयोग का उद्देश्य किसी देश के विरुद्ध सैन्य गठबंधन बनाना नहीं, बल्कि समुद्री सुरक्षा और व्यापार संरक्षण सुनिश्चित करना होना चाहिए।
  • समुद्री क्षेत्रीय जागरूकता को सुदृढ़ करना 
    • सूचना संलयन केंद्र–हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR): भारत वास्तविक समय (Real-Time) में समुद्री खुफिया जानकारी, निगरानी एवं खतरे का आकलन उपलब्ध करा सकता है।
    • संयुक्त अभियान : साझेदार देशों की नौसेनाएँ जहाजों की निगरानी, खुफिया जानकारी साझा करने तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया में समन्वय स्थापित कर सकती हैं।
  • वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा 
    • एस्कॉर्ट अभियान : नौसैनिक बल भारत, यूरोप एवं जापान की ओर जाने वाले व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।
    • कार्रवाई के नियम : साझेदार देशों को ड्रोन, मिसाइल एवं समुद्री हमलों से निपटने हेतु समान परिचालन प्रोटोकॉल विकसित करने चाहिए।

महत्त्व

  • नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था : बाब-अल-मंदेब की सुरक्षा नौवहन की स्वतंत्रता तथा अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों को सुदृढ़ करती है।
  • सागर (SAGAR) दृष्टि: यह पहल भारत की क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास” (Security and Growth for All in the Region – SAGAR) नीति के अनुरूप है।
  • समुद्री सुरक्षा प्रदाता : इस जलडमरूमध्य की सुरक्षा में नेतृत्व भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर (Net Security Provider) के रूप में और अधिक सशक्त बनाएगा।

निष्कर्ष

भारत के पास बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को वैश्विक व्यापार की कमजोर कड़ी बनने से रोकने की रणनीतिक जिम्मेदारी और नौसैनिक क्षमता दोनों मौजूद हैं। क्षेत्रीय एवं समान विचारधारा वाले साझेदारों के साथ सहयोगात्मक समुद्री सुरक्षा ढाँचा विकसित कर भारत नौवहन की स्वतंत्रता, अपने आर्थिक हितों की रक्षा तथा नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यवस्था को सुदृढ़ कर सकता है।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न 

प्रश्न: बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य की सुरक्षा भारत के व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा तथा हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी रणनीतिक भूमिका के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? भारत को इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु कौन-से कूटनीतिक एवं नौसैनिक कदम उठाने चाहिए? (10 अंक, 150 शब्द)

प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न 

प्रश्न: निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: (UPSC CSE Prelims 2024)

समुद्री मार्ग किन जल निकायों को जोड़ता है
1. बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर और अदन की खाड़ी
2. मलक्का जलडमरूमध्य अंडमान सागर और दक्षिण चीन सागर
3. हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी

उपर्युक्त में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3उत्तर: (d) 1, 2 और 3

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