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Lokesh Pal
July 23, 2026 05:30
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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा संसद की ओर निकाले गए विरोध मार्च तथा उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई ने एक बार फिर विरोध प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार, उस पर लगाए जा सकने वाले युक्तिसंगत प्रतिबंधों तथा नागरिक स्वतंत्रताओं और लोक व्यवस्था के बीच संतुलन पर बहस को पुनर्जीवित कर दिया है।
यह घटना संविधान के भाग III में निहित मौलिक अधिकारों तथा राज्य सूची की प्रविष्टि 1 के अंतर्गत राज्य के लोक व्यवस्था बनाए रखने के दायित्व के बीच संतुलन को रेखांकित करती है।


भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में अहिंसक विरोध प्रदर्शनों की केंद्रीय भूमिका रही।
शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार भारतीय संवैधानिक लोकतंत्र की आधारशिला है। यह नागरिकों को शासन में भागीदारी करने तथा सरकार को उत्तरदायी बनाए रखने का अवसर प्रदान करता है। यद्यपि यह अधिकार युक्तिसंगत प्रतिबंधों के अधीन है, फिर भी ऐसे प्रतिबंध निष्पक्ष, आनुपातिक एवं गैर-मनमाने होने चाहिए, ताकि व्यक्तिगत स्वतंत्रताओं और लोक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।
UPSC मुख्य परीक्षा (Mains) अभ्यास प्रश्न (GS Paper II | 10 अंक | 150 शब्द)प्रश्न: भारतीय संविधान शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार की गारंटी देता है, किंतु यह अधिकार निरपेक्ष (Absolute) नहीं है। अनुच्छेद 19 के प्रावधानों, प्रमुख न्यायिक निर्णयों तथा लोक व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता के संदर्भ में इस कथन का परीक्षण कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द) UPSC प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) PYQ (संबंधित विषय)प्रश्न: भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (UPSC CSE Prelims 2023)
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (a) केवल 1 और 2 उत्तर: (a) केवल 1 और 2 |
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