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Lokesh Pal
July 23, 2026 05:15
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भारतीय रेलवे में यात्रियों द्वारा तौलिये, चादरें, कंबल तथा अन्य सुविधाओं की चोरी की घटनाएँ, जबकि इनमें कई शिक्षित एवं संपन्न वर्ग के लोग भी शामिल होते हैं, गंभीर नैतिक चिंताओं को जन्म देती हैं।
नहीं। यहाँ दो प्रतिस्पर्धी नैतिक मूल्यों के बीच कोई टकराव नहीं है। यह नैतिक अंधापन (Ethical Blindness) का मामला है, न कि नैतिक दुविधा का।
सार्वजनिक संपत्ति की चोरी, चाहे वह कितनी भी छोटी क्यों न हो, सत्यनिष्ठा, नागरिक उत्तरदायित्व और साझा संसाधनों के प्रति सम्मान में गिरावट का संकेत है। वास्तव में एक नैतिक समाज केवल बड़े स्तर के भ्रष्टाचार को रोकने से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक द्वारा दैनिक जीवन में ईमानदारी और नैतिक आचरण अपनाने से निर्मित होता है।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्नप्रश्न: “सार्वजनिक संपत्ति की चोरी केवल एक कानूनी अपराध नहीं, बल्कि सत्यनिष्ठा, प्रोबिटी एवं नागरिक उत्तरदायित्व के क्षरण का प्रतीक है।” इस कथन के आलोक में सार्वजनिक संपत्ति की चोरी के नैतिक आयामों का विश्लेषण कीजिए तथा इसे रोकने के लिए आवश्यक उपाय सुझाइए। (10 अंक, 150 शब्द) प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्नप्रश्न: निम्नलिखित में से ‘सदाचार (Integrity)’ का सर्वोत्तम अर्थ क्या है? (UPSC CSE Prelims 2013) (a) केवल कानून का पालन करना। (b) व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में नैतिक सिद्धांतों के अनुरूप ईमानदारी एवं निष्पक्षता के साथ कार्य करना। (c) केवल आर्थिक लेन-देन में पारदर्शिता बनाए रखना। (d) केवल वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों का पालन करना। उत्तर: (b) |
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