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Lokesh Pal
July 24, 2026 05:00
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नीट (NEET) प्रश्नपत्र लीक प्रकरण ने भ्रष्टाचार, संस्थागत जवाबदेही तथा शासन में पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंताओं को पुनः उजागर किया है। इसने इस बहस को भी पुनर्जीवित किया है कि क्या भ्रष्टाचार ‘विकसित भारत’ (Viksit Bharat) के लक्ष्य को प्राप्त करने की राह में सबसे बड़ी चुनौती है।
भ्रष्टाचार से तात्पर्य सार्वजनिक पद अथवा सौंपे गए अधिकारों का निजी लाभ के लिए दुरुपयोग करना है। यह रिश्वत (Bribery), गबन (Embezzlement), पक्षपात (Favouritism), भाई-भतीजावाद/क्रोनीवाद (Cronyism), धोखाधड़ी (Fraud) अथवा आधिकारिक शक्तियों के दुरुपयोग के रूप में सामने आता है, जिससे सुशासन, विधि का शासन (Rule of Law) तथा जनता का विश्वास कमजोर होता है।
भ्रष्टाचार सुशासन, समावेशी विकास तथा विधि के शासन के समक्ष सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बना हुआ है। विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केवल सशक्त कानूनी प्रावधान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि स्वतंत्र एवं प्रभावी संस्थाएँ, त्वरित न्याय, अधिक पारदर्शिता, नैतिक सार्वजनिक प्रशासन तथा नागरिक जवाबदेही की मजबूत संस्कृति का विकास भी अनिवार्य है।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न (UPSC CSE Mains 2018, GS Paper-IV)प्रश्न : भ्रष्टाचार सार्वजनिक जीवन में नैतिक मूल्यों के ह्रास का परिणाम है। इस कथन के संदर्भ में भ्रष्टाचार के कारणों, उसके दुष्प्रभावों तथा उसे रोकने के उपायों पर चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) |
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