संदर्भ
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का 10वाँ स्थापना दिवस 11 मार्च, 2026 को नई दिल्ली में मनाया गया।
संबंधित तथ्य
- नई पहल: हरित हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों में नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन और स्टोरेज स्टार्ट-अप चैलेंज, 2026 की शुरुआत की गई।
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के बारे में
- स्थापना: वर्ष 2015 में भारत और फ्राँस द्वारा पेरिस जलवायु सम्मेलन, 2015 के दौरान शुरू किया गया।
- संगठन का स्वरूप: यह एक संधि-आधारित अंतर-सरकारी संगठन है, जो सौर ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देता है।
- मुख्यालय: गुरुग्राम, हरियाणा में स्थित है।
- सदस्यता: 120 से अधिक सदस्य और हस्ताक्षरकर्ता देश सौर ऊर्जा के प्रसार के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं।
- मुख्य उद्देश्य: सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को कम करते हुए सतत् विकास का समर्थन करना।
- मुख्य फोकस क्षेत्र
- सौर ऊर्जा का विस्तार
- विकासशील देशों में ऊर्जा तक पहुँच बढ़ाना
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण
- सौर परियोजनाओं के लिए वित्त जुटाना।
- लक्षित क्षेत्र: अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और लघु द्वीपीय विकासशील देशों को प्राथमिकता दी जाती है।
- अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के रणनीतिक स्तंभ
- कैटेलिटिक फाइनेंस हब: सौर ऊर्जा परियोजनाओं के समर्थन के लिए बड़े पैमाने पर निवेश और वित्तीय संसाधनों को जुटाता है।
- वैश्विक क्षमता केंद्र और डिजिटलीकरण: सदस्य देशों के बीच नवाचार, डिजिटल मंच, ज्ञान साझा करने और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देता है।
- क्षेत्रीय और देश-स्तरीय सहभागिता: विभिन्न क्षेत्रों और देशों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए साझेदारी तथा अनुकूल हस्तक्षेप को प्रोत्साहित करता है।
- प्रौद्योगिकी रोडमैप और नीति: वैश्विक स्तर पर सौर प्रौद्योगिकियों के प्रसार को तीव्र करने के लिए नीतिगत ढाँचा और प्रौद्योगिकी रणनीतियाँ विकसित करता है।
- “टुवर्ड्स 1000” रणनीति
- मिशन वक्तव्य: यह सुनिश्चित करना कि हर घर, चाहे वह कितना भी दूरस्थ क्यों न हो, सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली तक पहुँच प्राप्त कर सके।
- निवेश लक्ष्य: वर्ष 2030 तक सौर ऊर्जा समाधानों में 1,000 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश जुटाना।
- ऊर्जा पहुँच लक्ष्य: विश्वभर में 1,000 मिलियन (1 अरब) लोगों को स्वच्छ ऊर्जा की पहुँच प्रदान करना।
- सौर क्षमता विस्तार: वैश्विक स्तर पर 1,000 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता की स्थापना प्राप्त करना।
- जलवायु प्रभाव: प्रतिवर्ष लगभग 1,000 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने में सहायता करना।
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की प्रमुख पहलें
- सोलर टेक्नोलॉजी एप्लीकेशन रिसोर्स सेंटर (STAR-C): सदस्य देशों में केंद्र स्थापित किए जाते हैं ताकि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में कौशल, प्रौद्योगिकी ज्ञान और संस्थागत क्षमता का विकास किया जा सके।
- आईएसए सोलर फेलोशिप कार्यक्रम: सदस्य देशों के मध्य-कॅरियर पेशेवरों को सौर नीति और परियोजना प्रबंधन में विशेषज्ञता विकसित करने के लिए फेलोशिप प्रदान की जाती है।
- वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड पहल: इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर क्षेत्रीय विद्युत ग्रिडों को आपस में जोड़ना है, ताकि नवीकरणीय ऊर्जा, विशेषकर सौर ऊर्जा का साझा उपयोग किया जा सके।
- ग्लोबल सोलर फैसिलिटी: यह विकासशील क्षेत्रों में सौर परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर निजी और वाणिज्यिक निवेश जुटाने के लिए तैयार की गई व्यवस्था है।
- सोलर एक्स स्टार्टअप चैलेंज: यह सदस्य देशों में उद्यमिता को प्रोत्साहित करता है ताकि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में विस्तार योग्य समाधान विकसित किए जा सकें।
भारत में सौर ऊर्जा की प्रगति
- क्षमता में वृद्धि: भारत ने लगभग 136 गीगावाट स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता प्राप्त कर ली है, जिससे यह विश्व के सबसे तेजी से बढ़ते सौर ऊर्जा बाजारों में से एक बन गया है।
- नवीकरणीय ऊर्जा में हिस्सा: सौर ऊर्जा अब भारत की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लगभग आधा भाग है।
- नीतिगत समर्थन: इस तीव्र विस्तार को सरकारी नीतियों, प्रोत्साहनों और नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों से बढ़ावा मिला है।
- सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली प्रमुख योजनाएँ
- पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना: यह योजना घरों में रूफटॉप सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने को प्रोत्साहित करती है।
- पीएम-कुसुम योजना: यह किसानों के लिए सौर ऊर्जा संचालित सिंचाई प्रणालियों को समर्थन प्रदान करती है।
- नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य: भारत का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना है।