UPSC PYQs

Prelims, Mains & Optional PYQs

UPSC Notes

Comprehensive & Short Notes

विश्व की प्रवासी प्रजातियों की स्थिति पर रिपोर्ट

10 Mar 2026

संदर्भ 

प्रवासी वन्य जीवों के संरक्षण पर सम्मेलन (CMS) के तहत एक नई वैश्विक रिपोर्ट प्रवासी वन्यजीवों की आबादी में महत्त्वपूर्ण गिरावट को उजागर करती है।

संबंधित तथ्य 

  • यह अंतरिम रिपोर्ट प्रवासी वन्य जीवों के संरक्षण पर सम्मेलन (CMS COP 15) के पक्षकारों के 15वें सम्मेलन से पहले जारी की गई है, जो 23 मार्च से कैम्पो ग्रांडे, ब्राजील में आयोजित किया जाएगा।
  • वर्ष 2024 स्टेट ऑफ वर्ल्ड्स माइग्रेटरी स्पीशीज प्रवासी जीवों का पहला व्यापक वैश्विक मूल्यांकन था, जिसमें CMS में सूचीबद्ध 1,189 प्रजातियों को शामिल किया गया था और इसके विश्लेषण से 3,000 से अधिक अतिरिक्त प्रवासी प्रजातियों का पता चला।

IUCN रेड लिस्ट के बारे में

  • IUCN रेड लिस्ट, मानकीकृत और कठोर वैज्ञानिक मानदंडों के आधार पर, प्रजातियों को विलुप्त होने के जोखिम की व्यापक श्रेणियों में वर्गीकृत करती है।
  • IUCN एक वैश्विक संस्था है, जिसमें 160 सदस्य देश और सैकड़ों नागरिक समाज समूह शामिल हैं, जो पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण के लिए मिलकर काम करते हैं।
  • यह प्रजातियों के स्वास्थ्य और उनके विलुप्त होने के जोखिमों का विश्लेषण करती है।

मुख्य विशेषताएँ

  • प्रवासी प्रजातियों की 49% आबादी घट रही है।
  • 24% प्रजातियाँ विलुप्त होने स्थिति पर हैं।
  • CMS के अंतर्गत सूचीबद्ध 1,189 प्रजातियों में से लगभग 582 प्रजातियों की आबादी में गिरावट देखी जा रही है।
    • पिछले दो वर्षों में
      • जनसंख्या घटने का खतरा 5% बढ़ गया।
      • विलुप्त होने का खतरा 2% बढ़ गया।
  • प्रवासी प्रजातियों के लिए प्रमुख खतरे 
    • CMS के अनुसार
      • अत्यधिक दोहन (शिकार, मछली पकड़ना, व्यापार)।
      • पर्यावास का क्षरण और विखंडन।
      • अवसंरचना संबंधी बाधाएँ जैसे सड़कें, रेलगाड़ियाँ, बाड़ और पाइपलाइनें।
      • पक्षी इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारियों का प्रकोप।
  • H5N1 का प्रभाव: अत्यधिक रोगजनक एवियन इन्फ्लुएंजा (HPAI) पक्षियों और स्तनधारियों की एक असामान्य रूप से व्यापक श्रेणी में पाया गया है।
    • प्रभावित प्रजातियों में शामिल हैं
      • अफ्रीकी पेंगुइन
      • हंबोल्ट पेंगुइन
      • पेरूवियन पेलिकन
      • रेड क्राउन क्रेन
  • IUCN डेटा: रिपोर्ट में प्रवासी प्रजातियों की संरक्षण स्थिति में हुए परिवर्तनों का विश्लेषण किया गया और प्रकृति संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय संघ (International Union for Conservation of Nature’s- IUCN) की संकटग्रस्त प्रजातियों की रेड लिस्ट के आँकड़ों, जनसंख्या प्रवृत्तियों और वैज्ञानिक साहित्य में प्रलेखित विलुप्त होने के जोखिम में परिवर्तनों के आधार पर उभरते रुझानों पर प्रकाश डाला गया।

महत्त्वपूर्ण तथ्य

CSM संयुक्त राष्ट्र आधारित एकमात्र वैश्विक संगठन है, जिसे विशेष रूप से प्रवासी पक्षी, स्थलीय और जलीय प्रजातियों के प्रबंधन और संरक्षण के लिए स्थापित किया गया था।

भारत और CSM (बॉन सम्मेलन)

  • भारत 1983 से CSM का सदस्य है।
  • संरक्षण और प्रबंधन के लिए, भारत ने CSM के साथ शिकारी पक्षियों, डुगोंग, साइबेरियाई सारस और समुद्री कछुओं के संरक्षण और प्रबंधन पर एक गैर-कानूनी बाध्यकारी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • विश्व के 2.4% भू-भाग वाले भारत का वैश्विक जैव विविधता में योगदान लगभग 8% है।
    • भारत में मध्य एशियाई फ्लाईवे जैसे महत्त्वपूर्ण पक्षी फ्लाईवे नेटवर्क मौजूद हैं।
    • अमूर फाल्कन, ब्लैक-नेक्ड क्रेन, डुगोंग, हंपबैक व्हेल आदि जैसी प्रवासी प्रजातियों को भारत में अस्थायी आश्रय मिलता है।
  • नोट: परिशिष्ट 1 और 2 में किसी भी पक्षकार सम्मेलन की बैठक में संशोधन किया जा सकता है। संशोधनों में प्रवासी प्रजातियों या उनकी आबादी को परिशिष्टों में जोड़ना या हटाना शामिल है।

CMS के बारे मे 

  • CSM, जिसे बॉन कन्वेंशन के नाम से भी जाना जाता है, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के तत्त्वावधान में एक अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संधि है।
  • प्रारंभ तिथि: यह 1 नवंबर, 1983 को लागू हुई।
  • पक्षकार: 1 मार्च, 2022 तक, प्रवासी प्रजातियों पर कन्वेंशन के 133 पक्षकार हैं।
    • हालाँकि कई देश इस सम्मेलन के पक्षकार नहीं हैं, फिर भी वे एक या अधिक समझौतों के पक्षकार हैं और उन्होंने एक या अधिक समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • उद्देश्य: प्रवासी वन्यजीव प्रजातियों और उनके आवासों का उनके संपूर्ण क्षेत्र में संरक्षण करना।
    • संरक्षण योजनाओं को विकसित करने और लागू करने के लिए विभिन्न राज्यों (जिन देशों में ये प्रजातियाँ पाई जाती हैं) के बीच सहयोग करना।

प्रवासी वन्यजीवों के संरक्षण पर सम्मेलन (CMS) के अंतर्गत परिशिष्ट

  • CMS में दो परिशिष्ट हैं, जो प्रवासी प्रजातियों को उनकी संरक्षण स्थिति और आवश्यक अंतरराष्ट्रीय सहयोग के आधार पर वर्गीकृत करते हैं।
  • परिशिष्ट I – लुप्तप्राय प्रवासी प्रजातियाँ
    • विलुप्त होने के खतरे में पड़ी प्रजातियों को शामिल किया गया है।
    • कुल प्रजातियाँ: 188
      • 28 स्थलीय स्तनधारी
      • 23 जलीय स्तनधारी
      • 103 पक्षी
      • 8 सरीसृप
      • 26 मछलियाँ
    • भारत में पाई जाने वाली परिशिष्ट I प्रजातियों के उदाहरण
      • ग्रेट इंडियन बस्टर्ड
      • एशियाई हाथी
      • बंगाल फ्लोरिकन
      • साइबेरियन क्रेन
      • हॉक्सबिल समुद्री कछुआ
      • ओलिव रिडले समुद्री कछुआ
      • लेदरबैक समुद्री कछुआ
  • परिशिष्ट 2: प्रवासी प्रजातियाँ, जिनकी संरक्षण स्थिति अनुकूल नहीं है और जिनके लिए अंतरराष्ट्रीय संरक्षण और प्रबंधन समझौतों की आवश्यकता है।
  • प्रवास क्षेत्रों के लिए दायित्व
    • सूचीबद्ध प्रजातियों को सख्त संरक्षण प्रदान करें।
    • इन प्रजातियों का शिकार या पकड़ना प्रतिबंधित करें।
    • पर्यावासों का संरक्षण और पुनर्स्थापन करें।
    • प्रवासन में आने वाली बाधाओं को दूर करें और प्रवासन मार्गों को प्रभावित करने वाले खतरों का समाधान करें।
विश्व की प्रवासी प्रजातियों की स्थिति पर रिपोर्ट

Explore UPSC Foundation Batches

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Free Counselling for UPSC Aspirants

Connect with our experts and take the right next step.

Expert Guidance
Personalized Strategy
100% Free

Book Your Free Session

NEED ASSISTANCE?

Request a Callback

Our counsellor will connect with you and help you choose the right course and centre.

  • Expert Guidance
  • Course & Fee Information
  • Quick Callback Support

Request a Callback

Books
UPSC PYQs
UPSC Notes
Current Affairs
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.