वुमनिया पहल
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हाल ही में सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर वुमनिया (Womaniya) पहल के विस्तार से महिला उद्यमियों की औपचारिक खरीद नेटवर्क में भागीदारी बढ़ी है।
वुमनिया पहल के बारे में
- वुमनिया, वर्ष 2019 में शुरू की गई एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य महिला-नेतृत्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSEs) तथा स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को जैम (GeM) मंच पर बढ़ावा देना है।
- उद्देश्य: महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को सरकारी खरीद प्रणाली से जोड़कर, उनके लिए बाजार तक पहुँच में बढोतरी करना है।
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- बिचौलियों को समाप्त करना और एक पारदर्शी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रवेश बाधाओं को कम करना।
- कार्यान्वयन निकाय: यह पहल वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत जैम पोर्टल (GeM Portal) के माध्यम से संचालित होती है।
वुमनिया पहल के अंतर्गत पात्र लाभार्थी
- महिला-नेतृत्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यम (MSEs): महिला स्वामित्व या नेतृत्व वाले उद्यम जैम पर पंजीकरण कर अपने उत्पाद बेच सकते हैं।
- स्वयं सहायता समूह (SHGs): स्थानीय उत्पादन और आय-सृजन गतिविधियों में संलग्न महिला स्वयं सहायता समूह सीधे सरकारी खरीद में भाग ले सकते हैं।
- वंचित वर्गों की महिला उद्यमी (हालिया समावेशन): विशेष ध्यान अनुसूचित जाति/जनजाति, ग्रामीण महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर, ताकि समान अवसर सुनिश्चित हो सके।
- महिला-नेतृत्व वाले स्टार्ट-अप और छोटे उत्पादक: सरल पंजीकरण प्रक्रिया और नीतिगत समर्थन के माध्यम से इनकी भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाता है।
मुख्य विशेषताएँ
- डिजिटल ऑनबोर्डिंग: सरल दस्तावेजीकरण और उद्यम पंजीकरण के माध्यम से महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों का आसान पंजीकरण।
- संपूर्ण ऑनलाइन खरीद प्रक्रिया: ऑनलाइन निविदा, ऑर्डर, बिलिंग और भुगतान की सुविधा, जिससे पूरी प्रक्रिया पेपरलेस और पारदर्शी बनती है।
- मानकीकृत उत्पाद सूचीकरण: उत्पादों की एकरूप सूची प्रदान करता है, जिससे खरीदारों के लिए तुलना और दृश्यता बेहतर होती है।
- क्षमता निर्माण समर्थन: प्रशिक्षण, ऑनबोर्डिंग सत्र और क्रेता-विक्रेता बैठकें आयोजित कर भागीदारी को सुदृढ़ किया जाता है।
महत्त्व
- महिला उद्यमिता को बढ़ावा: महिला उत्पादकों को औपचारिक और संगठित बाजारों से जोड़ता है।
- वित्तीय समावेशन को सुदृढ़ करना: स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSEs) को सरकारी खरीदारों तक सीधी पहुँच और समय पर भुगतान सुनिश्चित करता है।
- समावेशी विकास को प्रोत्साहन: लैंगिक समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है और व्यवसाय करने में सुगमता के लक्ष्यों के अनुरूप है।
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अभ्यास ‘डस्टलिक’
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भारतीय सेना का एक दल उज्बेकिस्तान के लिए रवाना हुआ है, जहाँ वह अभ्यास ‘डस्टलिक’ के 7वें संस्करण में भाग लेगा।
अभ्यास ‘डस्टलिक’ के बारे में
- अभ्यास ‘डस्टलिक’ भारत और उज्बेकिस्तान के बीच आयोजित एक वार्षिक द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास है, जिसे रक्षा सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए दोनों देशों में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है।
- वर्ष 2026 का संस्करण: इसका 7वाँ संस्करण गुरुमसराय फील्ड प्रशिक्षण क्षेत्र, नामंगन (उज्बेकिस्तान) में आयोजित किया जा रहा है।
- पिछला संस्करण (2025): विदेशी प्रशिक्षण नोड, औंध (पुणे) में आयोजित किया गया था।
- प्रतिभागी
- भारतीय दल: कुल 60 कर्मी, जिनमें 45 सैनिक (मुख्यतः महार रेजिमेंट से) तथा 15 कर्मी भारतीय वायु सेना से शामिल हैं।
- उज्बेकिस्तानी दल: लगभग 60 कर्मी, जो उसकी सेना और वायु सेना से हैं।
- मुख्य फोकस क्षेत्र: यह अभ्यास अर्द्ध-पर्वतीय क्षेत्र में संयुक्त अभियानों पर केंद्रित है।
- मुख्य गतिविधियाँ
- संयुक्त योजना और रणनीतिक अभ्यास
- स्थल नेविगेशन और प्रहार मिशन
- दुश्मन के अधिकार वाले क्षेत्रों पर नियंत्रण और अवैध सशस्त्र समूहों का मुकाबला।
- साथ ही, यह समन्वित संचालन के लिए एक एकीकृत कमान एवं नियंत्रण तंत्र विकसित करने का भी प्रयास करता है।
- महत्त्व
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- परस्पर संचालन क्षमता में वृद्धि: दोनों सेनाओं के बीच समन्वय, रणनीति और संयुक्त संचालन क्षमताओं में सुधार होता है।
- रक्षा संबंधों को सुदृढ़ करना: द्विपक्षीय सैन्य सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करता है।
- क्षमता निर्माण: सर्वोत्तम प्रथाओं और परिचालन अनुभवों के आदान-प्रदान के माध्यम से युद्धक तैयारी को बढ़ाता है।
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तेलंगाना की ट्रॉमा केयर नीति
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हाल ही में तेलंगाना ने सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के लिए 8 मिनट के आपातकालीन प्रतिक्रिया समय के लक्ष्य के साथ एक ट्रॉमा केयर नीति शुरू की है।
तेलंगाना की ट्रॉमा केयर नीति के बारे में
- इस नीति का उद्देश्य प्रतिक्रिया समय को 13–15 मिनट से घटाकर 8–9 मिनट से कम करना है, ताकि गंभीर घायलों की जीवित रहने की संभावना बढ़ाई जा सके।
- मुख्य सिद्धांत: “एक मरीज, एक प्रणाली, एक प्रोटोकॉल” के दृष्टिकोण पर आधारित, जिससे समन्वित और निर्बाध ट्रॉमा देखभाल सुनिश्चित हो।
- मानक संचालन प्रक्रिया (SOPs)
- ट्राइएज (Triage): मरीजों का आगमन के कुछ ही मिनटों में रंग-कोड आधारित वर्गीकरण किया जाता है।
- समयबद्ध हस्तक्षेप: गंभीर मरीजों की पहचान 5 मिनट के भीतर और उन्हें 10 मिनट के भीतर पुनर्जीवन के लिए स्थानांतरित किया जाता है।
- संरचित रेफरल: विभिन्न स्तरों के ट्रॉमा केंद्रों के बीच स्थिरीकरण और स्थानांतरण के स्पष्ट प्रोटोकॉल।
- डेटा-आधारित निगरानी: ट्रॉमा रजिस्ट्र्री की स्थापना, जिससे वास्तविक समय में निगरानी और नीति सुधार संभव हो।
- कार्यान्वयन एजेंसियाँ: राज्य स्वास्थ्य विभाग के नेतृत्व में, पुलिस और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के सहयोग से दुर्घटना-प्रवण क्षेत्रों की पहचान।
- लक्ष्य प्राप्ति के लिए प्रमुख कदम
- चार-स्तरीय ट्रॉमा केयर नेटवर्क (स्तर 1–4) का निर्माण (पूर्व-चिकित्सा से लेकर सुपर-स्पेशलिटी तक)।
- राज्य भर में 74 नए ट्रॉमा केंद्रों की स्थापना।
- उच्च जोखिम वाले मार्गों और ब्लैक स्पॉट्स पर सुविधाओं की रणनीतिक स्थापना।
- महत्त्व
- मृत्यु दर में कमी: त्वरित प्रतिक्रिया से समय पर जीवनरक्षक उपचार संभव होता है, जिससे रोकी जा सकने वाली मौतें कम होती हैं।
- स्वास्थ्य तंत्र को सुदृढ़ करना: शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में एकीकृत और मानकीकृत आपातकालीन ढाँचा विकसित होता है।
- डेटा-आधारित शासन: ट्रॉमा रजिस्ट्र्री के माध्यम से साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और निरंतर सुधार संभव होता है।
ट्रॉमा मामलों में त्वरित प्रतिक्रिया का महत्त्व
- गोल्डन ऑवर प्रबंधन: पहले एक घंटे में रक्तस्राव नियंत्रण और वायुमार्ग प्रबंधन अत्यंत महत्त्वपूर्ण होता है; विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रारंभिक हस्तक्षेप से मृत्यु को रोका जा सकता है।
- संरचित मूल्यांकन (ABCDE दृष्टिकोण): विश्व स्वास्थ्य संगठन जीवन-घातक स्थितियों को प्राथमिकता देने और नैदानिक त्रुटियों को कम करने के लिए व्यवस्थित मूल्यांकन (वायुमार्ग, श्वास, परिसंचरण, विकलांगता, जोखिम) की सिफारिश करता है।
- त्वरित स्थानांतरण: विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा-निर्देश सुविधाओं तक शीघ्र पहुँच पर जोर देते हैं, क्योंकि संगठित पूर्व-अस्पताल प्रणालियाँ आघात से संबंधित मृत्यु दर को काफी सीमा तक कम करती हैं।
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कॉमनवेल्थ संसदीय संघ क्षेत्रीय सम्मेलन
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हाल ही में कॉमनवेल्थ संसदीय संघ (CPA) भारत क्षेत्र, जोन VII सम्मेलन का आयोजन गोवा में किया गया।
सम्मेलन की मुख्य विशेषताएँ
- उद्घाटन: सम्मेलन का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला द्वारा किया गया।
- महिला सहभागिता: नीति-निर्माण में महिलाओं की भूमिका को जमीनी स्तर से संसद तक बढ़ाने पर जोर दिया गया।
- युवा सहभागिता: युवा विधायकों को सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया, ताकि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
- मुख्य विषय: विचार-विमर्श में व्यापार, सतत् विकास, समुद्री प्रबंधन और ब्लू इकोनॉमी जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
- तटीय विकास मॉडल: गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा जैसे तटीय राज्यों के विकास अनुभवों को आदर्श मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया।
कॉमनवेल्थ संसदीय संघ के बारे में
- स्थापना: वर्ष 1911 में, कॉमनवेल्थ देशों में संसदीय लोकतंत्र को बढ़ावा देने के लिए स्थापित।
- प्रकृति: यह कॉमनवेल्थ देशों के सांसदों का एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसका उद्देश्य लोकतांत्रिक शासन को सुदृढ़ करना है।
- सदस्यता: इसमें 180 से अधिक शाखाओं से राष्ट्रीय, राज्य, प्रांतीय और क्षेत्रीय विधानमंडल/ शामिल हैं।
- उद्देश्य: संसदीय प्रक्रियाओं की समझ को बढ़ाना, सुशासन को प्रोत्साहित करना तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखना।
- कार्य: यह सांसदों के बीच श्रेष्ठ प्रथाओं के आदान-प्रदान हेतु सम्मेलन, कार्यशालाएँ और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है।
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