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17 Apr 2026

मेमफ्लेशन (Memflation)

वर्ष 2026 तक वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार के $1.3 ट्रिलियन से अधिक होने की अपेक्षा है, जिसका प्रमुख कारण “मेमफ्लेशन (Memflation)” नामक प्रवृत्ति है।

मेमफ्लेशन क्या है?

  • मेमफ्लेशन से आशय स्मृति चिप्स (DRAM, NAND) में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) प्रेरित मुद्रास्फीति से है, जो तब उत्पन्न होती है, जब आपूर्ति का बड़ा हिस्सा डेटा सेंटरों पर आश्रित हो जाता है।
  • AI क्राउडिंग प्रभाव: बड़े पैमाने पर AI अवसंरचना की माँग सीमित मैमोरी आपूर्ति को अन्य क्षेत्रों से हटाकर डेटा सेंटरों की ओर स्थानांतरित कर देती है।
  • मूल्य वृद्धि: इसके परिणामस्वरूप डायनेमिक रैंडम एक्सेस मेमोरी (DRAM)  एवं NAND (Not AND) मेमोरी चिप्स की कीमतों में तीव्र वृद्धि होती है।
  • विकृत वृद्धि (Distorted Growth): सेमीकंडक्टर क्षेत्र में राजस्व वृद्धि समान औद्योगिक विस्तार के कारण नहीं, बल्कि मूल्य वृद्धि (Price inflation) के कारण संचालित होती है।
  • प्रभाव: उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल तथा औद्योगिक क्षेत्रों को चिप की कमी, उत्पादन में देरी तथा बढ़ी हुई लागत का सामना करना पड़ता है।
  • अस्थायी प्रवृत्ति: इस प्रवृत्ति की आपूर्ति स्थिर होने (लगभग 2027) के बाद जारी रहने की कम संभावना है, किंतु यह AI आधारित संरचनात्मक परिवर्तन को भी दर्शाती है।

भारत–ऑस्ट्रिया द्विपक्षीय संबंध

ऑस्ट्रियाई चांसलर डॉ. क्रिश्चियन स्टॉकर की नई दिल्ली यात्रा के दौरान भारत–ऑस्ट्रिया के मध्य अनेक समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

प्रमुख समझौते एवं संस्थागत तंत्र

  • बहु-क्षेत्रीय सहयोग: खाद्य सुरक्षा पर समझौता (MoU), सैन्य सहयोग पर आशय पत्र (LOI) तथा आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह सहित कई समझौते संपन्न हुए।
  • भविष्य की प्रौद्योगिकियाँ: सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी एवं रक्षा के क्षेत्रों में सहयोग, उच्च-प्रौद्योगिकी रणनीतिक साझेदारी की ओर परिवर्तन को दर्शाता है।
  • आर्थिक एवं व्यापारिक संबंध: पिछले दशक में द्विपक्षीय व्यापार लगभग €3 बिलियन तक पहुँच चुका है।
  • वर्किंग हॉलिडे कार्यक्रम: युवा गतिशीलता पहल प्रारंभ की गई, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं कौशल विकास को बढ़ावा देना है।
  • भू-राजनैतिक महत्त्व: वैश्विक अस्थिरता के बीच, ऑस्ट्रिया भारत को यूरोपीय संघ के बाहर एक स्थिर एवं रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है।

ऑस्ट्रिया के बारे में 

  • अवस्थिति: ऑस्ट्रिया मध्य यूरोप में स्थित एक स्थल-रुद्ध (landlocked) देश है।
  • सीमाएँ: इसकी सीमाएँ जर्मनी, चेक गणराज्य, स्लोवाकिया, हंगरी, स्लोवेनिया, इटली, स्विट्जरलैंड तथा लिकटेंस्टीन से लगती हैं।
  • भौगोलिक विशेषताएँ: लगभग 60% क्षेत्र आल्प्स पर्वत से आच्छादित है तथा डेन्यूब नदी जैसी महत्त्वपूर्ण नदियाँ यहाँ से होकर बहती हैं।
  • राजधानी: वियना (Vienna)।
  • तटस्थता: स्विट्जरलैंड के साथ मिलकर यह यूरोप के तटस्थ केंद्र (Neutral core) का निर्माण करता है।
  • अंतरराष्ट्रीय भूमिका: वियना में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) तथा पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन (OPEC) जैसे प्रमुख वैश्विक संगठन स्थित हैं।

इजराइल–लेबनान युद्धविराम

 

हाल ही में इजरायल और लेबनान के मध्य 10-दिवसीय युद्धविराम प्रभाव में आया है।

संबंधित तथ्य

  • वर्ष 1993 के बाद यह पहली बार है, जब लेबनान और इजरायल सीधे वार्ता कर रहे हैं। इससे पूर्व उनके बीच अधिकांश युद्धविराम संयुक्त राष्ट्र (UN), अमेरिका (US) या फ्राँस जैसे तृतीय पक्षों द्वारा मध्यस्थता की गई थी। 

युद्धविराम की व्यापक रूपरेखा

  • शांति की परिस्थितियों का निर्माण: लेबनान और इजरायल ने एक ऐसी समझ विकसित की है, जिसके अंतर्गत दोनों देश स्थायी शांति के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ निर्मित करने हेतु कार्य करेंगे।
  • संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता की मान्यता: दोनों पक्ष एक-दूसरे की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता को पूर्ण रूप से मान्यता देंगे तथा साझा सीमा पर वास्तविक सुरक्षा स्थापित करेंगे, साथ ही इजरायल की आत्मरक्षा के अंतर्निहित अधिकार को सुरक्षित रखा जाएगा।

लेबनान के बारे में

  • लेबनान पश्चिमी एशिया में भूमध्य सागर के पूर्वी तट पर स्थित एक छोटा मध्य-पूर्वी देश है।
  • राजधानी: बेरूत (Beirut)।
  • यह पृथ्वी के उत्तरी एवं पूर्वी गोलार्द्ध में स्थित है।
  • सीमावर्ती देश: इसके उत्तर एवं पूर्व में सीरिया तथा दक्षिण में इजरायल स्थित है।
    • समुद्री सीमाएँ: यह साइप्रस के साथ अपनी समुद्री सीमा साझा करता है।
  • भौगोलिक परिदृश्य: पश्चिम में लेबनान पर्वत तथा पूर्व में समानांतर एंटी-लेबनान पर्वत के बीच अल-बिका घाटी (Al-Biqāʿ Valley) स्थित है। यह घाटी पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट तंत्र का भाग है और उपजाऊ मृदा से युक्त है।
  • सर्वोच्च बिंदु: कुर्नत अस-सौदा (Qurnat as Sawda’) लेबनान का सर्वोच्च बिंदु है।

इजरायल के बारे में

  • इजरायल पश्चिमी एशिया में स्थित एक मध्य-पूर्वी देश है।
  • यह पृथ्वी के उत्तरी एवं पूर्वी गोलार्द्ध में स्थित है।
  • सीमावर्ती देश: इसके उत्तर में लेबनान, उत्तर-पूर्व में सीरिया, पूर्व में जॉर्डन, दक्षिण-पश्चिम में मिस्र तथा पूर्व एवं पश्चिम में फिलिस्तीनी क्षेत्र (वेस्ट बैंक एवं गाजा पट्टी) स्थित हैं।
  • यह भूमध्य सागर के दक्षिण-पूर्वी तट तथा लाल सागर के उत्तरी तट पर स्थित है।
  • राजधानी: तेल अवीव (Tel Aviv)।
    • यह भूमध्य सागर और मृत सागर के मध्य जुडेन पर्वतों के पठार पर अवस्थित है।
  • न्यूनतम बिंदु: मृत सागर (Dead Sea), जो पृथ्वी का सबसे निम्न बिंदु (समुद्र तल से नीचे) है।
  • नदी: जॉर्डन नदी (River Jordan), जो इजरायल और जॉर्डन के मध्य प्राकृतिक सीमा बनाती है।
  • जल निकासी तंत्र: टिबेरियास झील (Lake Tiberias) एवं जॉर्डन नदी मिलकर प्रमुख जल निकासी तंत्र बनाते हैं।
  • सर्वोच्च बिंदु: माउंट मेरोन (Mt. Meron)।

हिज्बुल्लाह (Hezbollah) के बारे में

  • यह वर्ष 1982 में ईरान की सक्रिय सहायता से विशेष रूप से लेबनान की भूमि से इजरायल को बाहर करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था।
  • यह स्वयं को एकमात्र अरब समूह होने का दावा करता है, जिसने इजरायल का सफलतापूर्वक सामना किया है।
  • यह इजरायल से खतरा बने रहने तक निरस्त्रीकरण के सभी आह्वानों को अस्वीकार करता रहा है।

प्रोजेक्ट ‘ग्लासविंग’ (Project Glasswing

एंथ्रोपिक अपने प्रोजेक्ट ‘ग्लासविंग’ का विस्तार यू.के. तक कर रहा है, जिसके अंतर्गत वित्तीय संस्थानों को उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल्स तक प्रारंभिक पहुँच प्रदान की जा रही है, ताकि साइबर सुरक्षा परीक्षण को सुदृढ़ किया जा सके।

प्रोजेक्ट ‘ग्लासविंग’ के बारे में 

  • प्रोजेक्ट ‘ग्लासविंग’ एक सहयोगात्मक साइबर सुरक्षा पहल है, जिसका नेतृत्व एंथ्रोपिक द्वारा किया जा रहा है।
  • यह उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके बड़े पैमाने के सॉफ्टवेयर सिस्टम में कमजोरियों का पता लगाने, उनका विश्लेषण करने तथा उन्हें ठीक करने का उद्देश्य रखता है।
  • यह परियोजना सक्रिय, कृत्रिम बुद्धिमत्ता-संचालित साइबर सुरक्षा रक्षा की दिशा में परिवर्तन को दर्शाती है।
  • मुख्य विशेषताएँ 
    • उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षमता: यह शक्तिशाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल्स (जैसे- क्लॉड मिथोस) का उपयोग करता है, जिनमें उच्च स्तर की कोडिंग और तार्किक क्षमता होती है, जिससे जटिल प्रणालियों का विश्लेषण संभव होता है।
    • बड़े पैमाने पर कमजोरियों की पहचान: यह ऑपरेटिंग सिस्टम, ब्राउज़र और व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले सॉफ्टवेयर में शून्य-दिवसीय कमजोरियों की पहचान करने में सक्षम है।
    • छिपी हुई त्रुटियों का पता लगाना: यह दीर्घकाल से मौजूद और पहले से पहचानी नहीं गई सुरक्षा कमजोरियों को उजागर करता है।
    • नियंत्रित और सीमित पहुँच: दुरुपयोग को रोकने और जोखिम प्रबंधन हेतु इसकी पहुँच केवल विश्वसनीय संगठनों तक सीमित रखी जाती है।
    • सहयोगात्मक पारिस्थितिकी तंत्र: इसमें गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसी प्रमुख तकनीकी कंपनियाँ और संस्थान शामिल हैं।
    • द्वि-उपयोग जोखिम की समझ: यह स्वीकार करता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग साइबर रक्षा और आक्रामक हमलों दोनों के लिए किया जा सकता है, जिसके लिए सुरक्षा उपायों की आवश्यकता होती है।
  • संभावित अनुप्रयोग 
    • वैश्विक साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करना: खतरों की प्रारंभिक पहचान और शमन को सक्षम बनाता है, जिससे डिजिटल अवसंरचना की लचीलापन क्षमता बढ़ती है।
    • वित्तीय प्रणालियों की सुरक्षा: बैंकों और वित्तीय संस्थानों को साइबर धोखाधड़ी, डेटा उल्लंघन तथा प्रणालीगत जोखिमों को रोकने में सहायता करता है।
    • ओपन-सोर्स पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा: डेवलपर्स को कमजोरियों की पहचान में सहयोग प्रदान करता है, जिससे व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर की सुरक्षा में सुधार होता है।

डायरेक्ट-फोर्सिंग पोरस इमर्स्ड बाउंड्री मेथड  (DF-PIBM)

फ्राँस और संयुक्त राज्य अमेरिका के शोधकर्ताओं की एक टीम ने DF-PIBM विकसित किया है, जो शहरों में परागकण (Pollen) के संचरण की भविष्यवाणी करता है।

डायरेक्ट-फोर्सिंग पोरस इमर्स्ड बाउंड्री मेथड  (DF-PIBM)

  • DF-PIBM एक उन्नत कंप्यूटर सिमुलेशन विधि है, जिसका उपयोग यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि परागकण शहरी वायु में कैसे संचरित होते हैं।
  • यह पेड़ों को छिद्रपूर्ण संरचनाओं के रूप में मानता है, जिससे वायु पत्तियों और शाखाओं के माध्यम से प्रवाहित हो सकती है, साथ ही परागकण के प्रसार की निगरानी की जाती है।
  • मुख्य विशेषताएँ 
    • यथार्थवादी ‘ट्री मॉडलिंग’: पेड़ों को स्पंज-सदृश छिद्रपूर्ण तंत्र के रूप में प्रदर्शित करता है, जिससे पत्तियों और शाखाओं के माध्यम से वायु प्रवाह को सटीक रूप से दर्शाया जा सके।
    • भौतिकी-आधारित सिमुलेशन: यह पवन वेग, दाब तथा पृथक्करण बल का उपयोग करके निर्धारित करता है कि परागकण कब मुक्त होंगे और वे कैसे संचरित होंगे।
    • उच्च सटीकता प्रमाणीकरण: इसे LiDAR-आधारित पवन मापों के साथ वास्तविक डेटा के विरुद्ध परीक्षण किया गया है, जिसमें लगभग 95% सटीकता प्राप्त हुई है।
    • सूक्ष्म-स्तरीय विश्लेषण: यह व्यक्तिगत पेड़ों के स्तर पर परागकण के व्यवहार, जिसमें प्रसार पैटर्न शामिल हैं, का विश्लेषण करता है।
  • महत्त्व
    • लोक स्वास्थ्य नियोजन: एलर्जेन (Allergen) के संपर्क क्षेत्रों की भविष्यवाणी करने में सहायता करता है, जिससे ‘हे फीवर’ जैसी श्वसन संबंधी बीमारियों के प्रबंधन में मदद मिलती है।
    • शहरी नियोजन में सहयोग: योजनाकारों को वृक्ष प्रजातियों के चयन और वृक्षारोपण स्थलों के निर्धारण में सहायता करता है, ताकि परागकण के प्रभाव को न्यूनतम किया जा सके।
    • जलवायु परिवर्तन अनुकूलन: लंबे होते परागकण मौसम और बढ़ती शहरी हरित क्षेत्र से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करने में सहायक है।

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