MIRV प्रणाली से युक्त एक उन्नत अग्नि मिसाइल

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हाल ही में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेड री-एंट्री व्हीकल (MIRV) प्रणाली से युक्त एक उन्नत अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण किया।
संबंधित तथ्य
- यह उन्नत अग्नि-5 का दूसरा ज्ञात परीक्षण था, जिसे ‘मिशन दिव्यास्त्र’ भी कहा जाता है। यह अग्नि-5 का MIRV-सक्षम संस्करण है।
अग्नि-5 मिसाइल
- अग्नि-5 भारत की लंबी दूरी की परमाणु-सक्षम अंतरमहाद्वीपीय श्रेणी की बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे रणनीतिक प्रतिरोध तथा उन्नत प्रहार क्षमता के लिए विकसित किया गया है।
- विकासकर्ता: इसका विकास DRDO द्वारा एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम के अंतर्गत किया गया है।
- मारक क्षमता: इसकी प्रहार क्षमता 5,000 किमी से अधिक है जिससे दूरस्थ रणनीतिक लक्ष्यों को कवर किया जा सकता है।
- चरण: यह एक सतह-से-सतह पर मार करने वाली तथा तीन-चरणीय ठोस ईंधन मिसाइल है।
- प्रक्षेपण मंच: इसे सड़क पर गतिशील कैनिस्टराइज्ड प्लेटफॉर्म से प्रक्षेपित किया जा सकता है, जिससे इसकी कार्यशील क्षमता तथा त्वरित तैनाती में सुधार होता है।
- रणनीतिक भूमिका: यह भारत की विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध क्षमता तथा द्वितीय प्रहार परमाणु क्षमता को सुदृढ़ करती है।
- प्रथम परीक्षण: इसका पहला सफल परीक्षण वर्ष 2012 में ओडिशा से किया गया था।
मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेड री-एंट्री व्हीकल (MIRV) प्रणाली
- MIRV एक ऐसी मिसाइल प्रौद्योगिकी है, जो एकल बैलिस्टिक मिसाइल को अनेक वारहेड ले जाने में सक्षम बनाती है।
- वैश्विक स्थिति: MIRV प्रौद्योगिकी का विकास सर्वप्रथम संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा किया गया था, जिसके बाद सोवियत संघ, यूनाइटेड किंगडम, फ्राँस तथा चीन ने इसे विकसित किया।
- प्रमुख विशेषताएँ
- स्वतंत्र लक्ष्यीकरण: प्रत्येक वारहेड उड़ान के दौरान अलग होने के बाद स्वतंत्र रूप से विभिन्न लक्ष्यों पर प्रहार कर सकता है।
- भ्रम उत्पन्न करने की क्षमता: MIRV प्रणालियाँ शत्रु की मिसाइल रक्षा प्रणालियों से बचने के लिए डिकॉय (Decoys) तथा ‘मारक सुविधा’ का भी प्रयोग कर सकती हैं।
- महत्त्व
- रणनीतिक लाभ: MIRV किसी देश की प्रतिरोध क्षमता तथा प्रहार दक्षता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाता है।
- रक्षा प्रणाली को भेदना: यह प्रणाली एक साथ अनेक वारहेड तैनात करके मिसाइल रक्षा कवच को पार करने में सहायता करती है।
- पेलोड अनुकूलनशीलता: MIRV युक्त मिसाइलें रणनीतिक आवश्यकताओं के अनुसार परमाणु अथवा परंपरागत पेलोड ले जा सकती हैं।
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राष्ट्रीय पंचायती राज पुरस्कार 2025
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राष्ट्रीय पंचायती राज पुरस्कार, 2025 की घोषणा पंचायती राज मंत्रालय द्वारा जमीनी स्तर पर सुशासन और सतत् ग्रामीण विकास में उत्कृष्टता को मान्यता देने के लिए की गई।
राष्ट्रीय पंचायती राज पुरस्कार, 2025 की मुख्य विशेषताएँ
- देशभर से कुल 42 पंचायतों का चयन किया गया, जिनमें कर्नाटक ने सर्वाधिक 6 पुरस्कार प्राप्त किए, जबकि आंध्र प्रदेश और ओडिशा को 5-5 पुरस्कार मिले।
- मूल्यांकन: ये पुरस्कार पंचायत उन्नति सूचकांक 2.0 से संबद्ध हैं, जिससे पारदर्शी एवं डेटा-आधारित मूल्यांकन को बढ़ावा मिलता है।
- नकद पुरस्कार: विजेता पंचायतों को राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) के अंतर्गत ₹50 लाख से ₹5 करोड़ तक की वित्तीय प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
राष्ट्रीय पंचायती राज पुरस्कार के बारे में
- नोडल मंत्रालय: इन पुरस्कारों का प्रतिवर्ष संचालन पंचायती राज मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
- योजना से संबद्धता: यह पुरस्कार पुनर्गठित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) के “पंचायत प्रोत्साहन” घटक के अंतर्गत संस्थागत रूप से लागू किए गए हैं।
- मुख्य उद्देश्य: सामुदायिक नेतृत्व वाली पहलों के माध्यम से समावेशी, सहभागितापूर्ण, पारदर्शी एवं सतत् ग्रामीण शासन को प्रोत्साहित करना।
- सतत् विकास लक्ष्य के साथ संरेखण: वर्ष 2023 से पुरस्कार ढाँचे को स्थानीयकृत सतत् विकास लक्ष्यों (LSDGs) के नौ विषयों के अनुरूप बनाया गया है।
- पुरस्कारों की श्रेणियाँ
- दीन दयाल उपाध्याय पंचायत सतत् विकास पुरस्कार: 9 स्थानीयकृत सतत् विकास लक्ष्य (LSDGs) विषयों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली ग्राम पंचायतों को प्रदान किया जाता है।
- नानाजी देशमुख सर्वोत्तम पंचायत सतत् विकास पुरस्कार: जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर समग्र रूप से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को प्रदान किया जाता है।
- आत्मनिर्भर पंचायत विशेष पुरस्कार: स्वयं के राजस्व स्रोतों के संकलन एवं वृद्धि के लिए किए गए प्रयासों हेतु ग्राम पंचायतों को दिया जाता है।
- जलवायु कार्रवाई विशेष पंचायत पुरस्कार: नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करने तथा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देने वाली ग्राम पंचायतों को प्रदान किया जाता है।
- पंचायत क्षमता निर्माण सर्वोत्तम संस्थान पुरस्कार: ग्राम पंचायतों को LSDGs की प्राप्ति में संस्थागत सहयोग प्रदान करने वाले संस्थानों को दिया जाता है।
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रबींद्रनाथ टैगोर

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प्रधानमंत्री मोदी ने पोइला बोइशाख के अवसर पर गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
रबींद्रनाथ टैगोर के बारे में
- रबींद्रनाथ टैगोर (1861–1941), जिन्हें लोकप्रिय रूप से ‘गुरुदेव’, ‘कविगुरु’ और ‘विश्वकवि’ के नाम से जाना जाता है, बंगाल के एक महान कवि, दार्शनिक, उपन्यासकार, नाटककार, चित्रकार, संगीतकार एवं समाज सुधारक थे।
- पोचीशे बोइशाख: पोचीशे बोइशाख बंगाली माह ‘बोइशाख’ के 25वें दिन को संदर्भित करता है, जिसे रबींद्रनाथ टैगोर की जयंती (7 मई) के रूप में मनाया जाता है।
- ‘पोचीशे बोइशाख’ रबींद्रनाथ टैगोर द्वारा अपने जन्मदिन (1922) पर लिखी गई एक कविता भी है।
- नोबेल पुरस्कार: वर्ष 1913 में अपनी कृति गीतांजलि के लिए वे साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रथम गैर-यूरोपीय बने।
- बंगाल पुनर्जागरण: टैगोर, बंगाल पुनर्जागरण के प्रमुख व्यक्तित्व थे। उन्होंने साहित्य और शिक्षा के माध्यम से मानवतावाद, आधुनिकता और सांस्कृतिक सुधार को बढ़ावा दिया।
- शैक्षिक योगदान: उन्होंने वर्ष 1921 में शांति निकेतन में विश्व-भारती विश्वविद्यालय की स्थापना की, जो रटने की पद्धति से परे समग्र एवं वैश्विक शिक्षा को प्रोत्साहित करता है।
- राष्ट्रीय गान: उन्होंने भारत के राष्ट्रीय गान “जन गण मन” तथा बांग्लादेश के राष्ट्रीय गान “आमार सोनार बांग्ला” की रचना की।
- औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध विरोध: वर्ष 1919 में जलियाँवाला बाग हत्याकांड के विरोध में उन्होंने अपनी ब्रिटिश नाइटहुड की उपाधि (जो उन्हें वर्ष 1915 में प्रदान की गई थी) त्याग दी।
- साहित्यिक कृतियाँ: उनकी प्रमुख साहित्यिक रचनाओं में गीतांजलि, घरे-बाइरे (घर और दुनिया), गोरा और चार अध्याय शामिल हैं।
- व्हेअर द माइंड इज विदाउट फीयर: उनकी प्रसिद्ध कविता व्हेअर द माइंड इज विदाउट फीयर (Where the Mind is Without Fear) (चित्तो जेथा भयशून्यो), जो गीतांजलि में शामिल है, भय, अज्ञानता और संकीर्ण विभाजनों से मुक्त भारत की परिकल्पना प्रस्तुत करती है।
- एकला चलो रे: वर्ष 1905 के स्वदेशी आंदोलन के दौरान लिखी गई यह रचना लोगों को सार्वजनिक समर्थन न मिलने पर भी साहसपूर्वक संघर्ष जारी रखने के लिए प्रेरित करती है।
- राष्ट्रवाद पर विचार: टैगोर ने आक्रामक राष्ट्रवाद की कड़ी आलोचना की और माना कि मानवता को संकीर्ण देशभक्ति एवं कठोर सीमाओं से ऊपर रखना चाहिए।
- उनका प्रसिद्ध विचार था: “देशभक्ति हमारा अंतिम आध्यात्मिक आश्रय नहीं हो सकती; मेरा आश्रय मानवता है।”
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चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS)

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सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि (सेवानिवृत्त) को नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) तथा सैन्य कार्य विभाग का सचिव नियुक्त किया है।
- वे जनरल बिपिन रावत और जनरल अनिल चौहान के बाद इस पद को सँभालने वाले तीसरे व्यक्ति होंगे।
लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि के बारे में
- प्रमुख पूर्व नियुक्तियाँ: वर्तमान में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं।
- इससे पूर्व वे भारतीय सेना के उप-सेनाध्यक्ष रह चुके हैं।
- उन्होंने भारतीय सेना की केंद्रीय कमान (Central Command) के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में भी सेवा दी है।
- प्रमुख सैन्य कमान नियुक्तियाँ: असम में ऑपरेशन राइनो (Operation Rhino) के अंतर्गत आतंकवाद-रोधी अभियानों में 16 गढ़वाल राइफल्स की कमान सँभाली।
- जम्मू-कश्मीर में 168 इन्फैंट्री ब्रिगेड का नेतृत्व किया।
- केंद्रीय क्षेत्र में 17 माउंटेन डिवीजन का नेतृत्व किया।
- पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय सेना की प्रमुख स्ट्राइक कोर ‘2 कॉर्प्स’ की कमान सँभाली।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के बारे में
- चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) भारत का सर्वोच्च सैन्य अधिकारी होता है और त्रि-सेवा (Tri-Service) मामलों पर सरकार का प्रमुख सैन्य सलाहकार होता है।
- स्थापना: सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच संयुक्तता, एकीकरण एवं समन्वय को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस पद का सृजन वर्ष 2019 में किया गया था।
- नियुक्ति प्राधिकरण: नियुक्ति मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति द्वारा की जाती है।
- पात्रता: इस पद पर सेना, नौसेना या वायुसेना- किसी भी सेवा से अधिकारी का चयन किया जा सकता है।
- वरीयता क्रम: सीडीएस भारतीय वरीयता क्रम में 12वें स्थान पर होता है, जो तीनों सेनाओं के प्रमुखों के समकक्ष है।
- रैंक एवं स्थिति: सीडीएस चार-स्टार जनरल के समकक्ष रैंक धारण करता है, जो सेवा प्रमुखों के बराबर होती है।
- भूमिका
- रक्षा मंत्री के प्रमुख सैन्य सलाहकार।
- चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CoSC) के स्थायी अध्यक्ष।
- रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत सैन्य कार्य विभाग (DMA) के सचिव।
- प्रमुख दायित्व
- संयुक्तता को बढ़ावा देना: संचालन, लॉजिस्टिक्स एवं प्रशिक्षण में समन्वय को सुदृढ़ करना।
- रक्षा योजना: एकीकृत रक्षा अधिग्रहण एवं क्षमता निर्माण योजना की निगरानी करना।
- त्रि-सेवा प्रशासन: संयुक्त संगठनों एवं एजेंसियों का प्रशासनिक प्रबंधन करना।
- रणनीतिक भूमिका: परमाणु कमान प्राधिकरण को सलाह प्रदान करना।
- सैन्य सुधार: थिएटर कमांड सुधारों एवं सैन्य आधुनिकीकरण को आगे बढ़ाना।
- सीडीएस की सीमाएँ
- कोई परिचालन कमान नहीं: परिचालन नियंत्रण संबंधित सेवा प्रमुखों के पास ही रहता है।
- स्वतंत्र युद्धक शक्तियों का अभाव: सीडीएस स्वतंत्र रूप से सैन्य बलों की तैनाती या सैन्य अभियान का आदेश नहीं दे सकता।
- सीमित वित्तीय अधिकार: प्रमुख पूँजीगत रक्षा खरीद सीडीएस के नियंत्रण से बाहर रहती है।
- सीडीएस का महत्त्व
- एकीकृत सैन्य परामर्श: नागरिक नेतृत्व को समन्वित एवं एकीकृत सैन्य सलाह प्रदान करता है।
- त्रि-सेवा समन्वय: तीनों सेनाओं के बीच सहयोग एवं समन्वय को सुदृढ़ करता है।
- संसाधनों का कुशल उपयोग: रक्षा अवसंरचना एवं व्यय में अनावश्यक दोहराव को कम करता है।
- बेहतर संकट प्रतिक्रिया: त्वरित एवं प्रभावी रणनीतिक निर्णय लेने में सहायता करता है।
- वैश्विक सामंजस्य: भारत को विश्व की उन्नत सैन्य व्यवस्थाओं के अनुरूप बनाता है।
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ICGS अचल

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हाल ही में भारतीय तटरक्षक बल (ICG) ने गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में ICGS अचल को कमीशन किया है।
ICGS अचल के बारे में
- वर्गीकरण: भारतीय तटरक्षक पोत (ICGS) अचल, भारतीय तटरक्षक बल का नई पीढ़ी का आदम्य श्रेणी (Adamya-class) फास्ट पेट्रोल वेसल है।
- नाम का अर्थ: “अचल” का अर्थ “दृढ़” है, जो समुद्री सुरक्षा के प्रति अटल प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
- निर्माण कार्यक्रम: यह गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा भारतीय तटरक्षक बल के लिए निर्मित किए जा रहे आठ फास्ट पेट्रोल वेसलों की शृंखला का पाँचवाँ पोत है।
- परिचालन नियंत्रण: यह तटरक्षक क्षेत्र (उत्तर-पश्चिम) के कमांडर के प्रशासनिक एवं परिचालन नियंत्रण के अंतर्गत कार्य करेगा।
ICGS अचल की विशेषताएँ
- प्रणोदन प्रणाली: यह दो 3,000 किलोवाट क्षमता वाले उन्नत डीजल इंजनों से संचालित है।
- गति एवं परिचालन क्षमता: यह 27 समुद्री मील की अधिकतम गति प्राप्त करने में सक्षम है तथा इसकी परिचालन क्षमता 1,500 समुद्री मील है।
- उन्नत प्रौद्योगिकियाँ: यह एकीकृत ब्रिज प्रणाली, एकीकृत मशीनरी नियंत्रण प्रणाली और स्वचालित विद्युत प्रबंधन प्रणाली से सुसज्जित है।
- स्वदेशी सामग्री: इसमें लगभग 60% स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो रक्षा विनिर्माण में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
- द्वैध प्रमाणन: इसे अमेरिकन ब्यूरो ऑफ शिपिंग (ABS) तथा इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (IRS) से द्वितीय श्रेणी प्रमाणन प्राप्त है।
ICGS अचल के कार्य
- समुद्री निगरानी: तटीय एवं अपतटीय निगरानी अभियान संचालित करना।
- अवरोधन अभियान: अवरोधन एवं तस्करी-रोधी अभियानों में सहयोग करना।
- खोज एवं बचाव: समुद्र में खोज एवं बचाव (Search and Rescue – SAR) अभियान संचालित करना।
- प्रदूषण नियंत्रण: समुद्री प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरण संरक्षण में सहायता करना।
भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के बारे में
- भारतीय तटरक्षक बल (ICG) भारत की समुद्री कानून प्रवर्तन तथा खोज एवं बचाव एजेंसी है, जिसका उद्देश्य देश के समुद्री हितों की रक्षा करना तथा समुद्र में सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
- स्थापना: इसकी स्थापना अगस्त 1978 में हुई थी और यह रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
- अधिकार क्षेत्र: इसका अधिकार क्षेत्र भारत के प्रादेशिक जल, संलग्न क्षेत्र (Contiguous Zone) तथा विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र ( EEZ) तक विस्तृत है।
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भारत–अल्जीरिया रक्षा आयोग बैठक

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भारत और अल्जीरिया ने द्विपक्षीय रणनीतिक एवं सैन्य सहयोग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से नई दिल्ली में अपनी पहली संयुक्त रक्षा सहयोग आयोग बैठक आयोजित की।
भारत–अल्जीरिया रक्षा आयोग बैठक की मुख्य विशेषताएँ
- रक्षा सहयोग रूपरेखा: दोनों देशों ने वर्ष 2024 में हस्ताक्षरित भारत–अल्जीरिया रक्षा समझौता ज्ञापन (MoU) के कार्यान्वयन के मार्गदर्शन हेतु रूल्स ऑफ प्रोसीजर पर हस्ताक्षर किए।
- सहयोग के क्षेत्र: चर्चा का मुख्य केंद्र सैन्य प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास, रक्षा उद्योग सहयोग, चिकित्सा सहयोग तथा संस्थागत रक्षा सहभागिता रहा।
- रणनीतिक महत्त्व: यह बैठक अफ्रीका में भारत की बढ़ती रक्षा कूटनीति तथा भूमध्यसागरीय क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारियों के विविधीकरण को दर्शाती है।
अल्जीरिया के बारे में
- अल्जीरिया, आधिकारिक रूप से पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ अल्जीरिया, अफ्रीका का सबसे बड़ा देश है, जिसकी राजधानी अल्जीयर्स है।
- स्थिति: यह उत्तर अफ्रीका के मगरेब (Maghreb) क्षेत्र में भूमध्य सागर के तट पर स्थित है।
- अल्जीरिया की सीमाएँ
- उत्तर में — भूमध्य सागर
- पूर्व में — ट्यूनीशिया और लीबिया
- दक्षिण-पूर्व में — नाइजर
- दक्षिण-पश्चिम में — माली और मॉरिटानिया
- पश्चिम में — मोरक्को और पश्चिमी सहारा।
- भूगोल
- मरुस्थलीय प्रभुत्व: सहारा मरुस्थल अल्जीरिया के कुल भू-भाग के 80% से अधिक क्षेत्र को आच्छादित करता है।
- पर्वत श्रेणियाँ: प्रमुख पर्वत प्रणालियों में टेल एटलस, सहारन एटलस तथा होग्गर (अहग्गर) पर्वत शामिल हैं।
- सर्वोच्च शिखर: होग्गर पर्वतों में स्थित माउंट तहात अल्जीरिया की सर्वोच्च चोटी है।
- नदी तंत्र: शेलिफ नदी (Chelif River) अल्जीरिया की सबसे लंबी नदी है।
- जलवायु: तटीय क्षेत्रों में भूमध्यसागरीय जलवायु पाई जाती है, जहाँ गर्म एवं शुष्क ग्रीष्म ऋतु तथा हल्की वर्षायुक्त शीत ऋतु होती है, जबकि सहारा क्षेत्र अत्यधिक गर्म एवं शुष्क रहता है।
- वनस्पतियाँ: उत्तरी अल्जीरिया में कॉर्क ओक एवं चीड़ के वन पाए जाते हैं, जबकि दक्षिणी मरुस्थलीय क्षेत्रों में खजूर के नखलिस्तान (कृषि क्षेत्र), झाड़ियाँ एवं सूखा-प्रतिरोधी घास पाई जाती हैं।
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