संदर्भ
लोकसभा में विपक्ष के नेता के विरुद्ध सत्तारूढ़ दल के एक नेता द्वारा एक मूल प्रस्ताव (सब्सटैंटिव मोशन) प्रस्तुत किया गया है।
मूल प्रस्ताव (सब्सटैंटिव मोशन) के बारे में
- मूल प्रस्ताव (सब्सटैंटिव मोशन) की परिभाषा: एक मूल प्रस्ताव (सब्सटैंटिव मोशन) लोकसभा के समक्ष प्रस्तुत किया गया एक स्वतंत्र प्रस्ताव होता है, जिसका उद्देश्य सदन से किसी विषय पर स्पष्ट और बाध्यकारी निर्णय प्राप्त करना होता है।
- उदाहरण: उपसभापति के चुनाव हेतु प्रस्ताव, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव तथा उस सदस्य की सीट को रिक्त घोषित करने का प्रस्ताव, जिसे अनुपस्थिति की अनुमति न दी गई हो—ये सभी राज्यसभा में प्रस्तुत किए जाने वाले मूल प्रस्ताव (सब्सटैंटिव मोशन) के उदाहरण हैं।
- स्वतंत्र प्रकृति: यह अपने आप में पूर्ण होता है और किसी अन्य विचाराधीन कार्य से जुड़ा नहीं होता है।
- जब इसे स्वीकार किया जाता है, तो यह किसी विशिष्ट विषय पर सदन की औपचारिक राय या इच्छा को दर्शाता है।
- स्वीकृति की अनिवार्यता: लोकसभा की कार्य संचालन नियमावली के अंतर्गत, ऐसा प्रस्ताव केवल अध्यक्ष की स्वीकृति से ही स्वीकार किया जा सकता है।
- अध्यक्ष का विवेकाधिकार: अध्यक्ष को नोटिस को स्वीकार या अस्वीकार करने तथा यह निर्णय लेने का पूर्ण विवेकाधिकार होता है कि इसे किस प्रकार प्रस्तुत किया जाएगा।
- यदि इसे स्वीकार कर लिया जाता है, तो इस पर सदन में चर्चा की जा सकती है और इसे मतदान के लिए रखा जा सकता है।
- विशेष स्वरूप: दैनिक बहस में शामिल सामान्य हस्तक्षेपों के विपरीत, मूल प्रस्ताव (सब्सटैंटिव मोशन) सदन को उठाए गए मुद्दे पर सीधे विचार करने और उस पर औपचारिक रूप से अपना मत व्यक्त करने के लिए बाध्य करता है।
- चर्चा की शर्त: उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों के आचरण पर केवल विधिवत शब्दों में तैयार किए गए मूल प्रस्ताव (सब्सटैंटिव मोशन) के माध्यम से ही चर्चा की जा सकती है।
- द्वितीयक समर्थन की शर्त: उपसभापति के चुनाव हेतु प्रस्ताव और राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को छोड़कर, किसी भी मूल प्रस्ताव (सब्सटैंटिव मोशन) के लिए समर्थन आवश्यक नहीं होता है।
- नोटिस और प्रस्ताव प्रस्तुत करना: मूल प्रस्ताव (सब्सटैंटिव मोशन) के लिए पहले नोटिस देना आवश्यक होता है।
- प्रस्ताव प्रस्तुत करने का अधिकार: यह प्रस्ताव केवल वही सदस्य प्रस्तुत कर सकता है जिसने इसका नोटिस दिया हो।
- यदि कोई प्रस्ताव किसी मंत्री के नाम पर हो, तो उसे कोई अन्य मंत्री भी प्रस्तुत कर सकता है। ऐसे मामले में प्रस्ताव प्रस्तुत करने वाले मंत्री को यह स्पष्ट करना होता है कि वह इसे दूसरे मंत्री की ओर से प्रस्तुत कर रहा है।
पूर्व उदाहरण
| वर्ष एवं मामला |
लोकसभा द्वारा की गई कार्रवाई |
| 2005 – कैश-फॉर-क्वेरी घोटाला (10 सांसद) |
जाँच समिति (पवन कुमार बंसल की अध्यक्षता में); सदन ने प्रस्ताव अपनाया और सभी 10 सदस्यों को निष्कासित कर दिया। |
| 2006 – MPLADS अनुचित आचरण (4 सांसद) |
समान प्रक्रियात्मक चरणों के बाद MPLADS योजना से संबंधित मामले में सदस्यों को फटकार लगाई गई और निलंबित किया गया। |
| 2008 – बाबूभाई के. कटारा मामला |
समिति ने गंभीर कदाचार पाया; सदस्य को निष्कासित करने हेतु सदन ने प्रस्ताव पारित किया। |
| 2007 – राजेश कुमार माँझी (हवाई यात्रा का दुरुपयोग) |
समिति की रिपोर्ट के आधार पर 30 बैठकों के लिए निलंबन और आधिकारिक यात्रा विशेषाधिकारों पर प्रतिबंध लगाया गया। |
प्रस्ताव (Motion) क्या है?
संसदीय शब्दों में, प्रस्ताव सदन के किसी सदस्य द्वारा किया गया एक आधिकारिक सुझाव होता है, जिसके माध्यम से वह सदन से किसी विशेष कार्रवाई करने, किसी आदेश को लागू करने, या किसी विशेष मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त करने का अनुरोध करता है।
- इसे इस प्रकार तैयार किया जाता है कि सदन इसे एक निर्णय के रूप में स्वीकार कर सके।
प्रस्ताव के प्रकार
1. प्रतिस्थापन प्रस्ताव (Substitute Motion)
- इसे मूल प्रस्ताव के स्थान पर प्रस्तुत किया जाता है।
- यदि इसे स्वीकार कर लिया जाए, तो यह मूल प्रस्ताव को पूरी तरह से प्रतिस्थापित कर देता है।
- यह मूल प्रस्ताव के समान विषय से संबंधित होना चाहिए।
2. सहायक प्रस्ताव (Subsidiary Motion)
ये किसी अन्य प्रस्ताव पर निर्भर होते हैं या उससे संबंधित होते हैं और इन्हें आगे निम्नलिखित प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:
- अनुषंगी प्रस्ताव (Ancillary Motions)
- इन्हें किसी अन्य प्रस्ताव के निपटान में सहायता के लिए सामान्य कार्यवाही के दौरान प्रस्तुत किया जाता है।
- उदाहरण: किसी विधेयक को चयन समिति को भेजने का प्रस्ताव।
- अधिरोहण प्रस्ताव (Superseding Motions)
- इन्हें किसी अन्य प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उसे स्थगित करने या बाधित करने के लिए प्रस्तुत किया जाता है।
- उदाहरण: बहस स्थगित करने का प्रस्ताव।
- संशोधन प्रस्ताव (Amendment Motions)
- ये मूल प्रस्ताव में संशोधन, परिवर्तन या सुधार करने के लिए लाए जाते हैं, बिना उसे पूरी तरह से बदले।
महत्त्वपूर्ण विशेष प्रस्ताव
1. अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion)
- मंत्रिपरिषद के प्रति विश्वास की कमी को दर्शाता है।
- केवल लोकसभा में
2. निंदा प्रस्ताव (Censure Motion)
- सरकार की किसी विशेष नीति या कार्य की अस्वीकृति व्यक्त करता है।
3. स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion)
- सामान्य कार्यवाही को स्थगित करके अत्यंत महत्त्वपूर्ण सार्वजनिक विषय पर चर्चा के लिए लाया जाता है।
4. ध्यानाकर्षण प्रस्ताव (Calling Attention Motion)
- किसी सदस्य को किसी मंत्री का ध्यान किसी तात्कालिक विषय की ओर आकर्षित करने में सक्षम बनाता है।
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