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भारत में बाल्यावस्था मोटापा (Childhood Obesity in India)

भारत में बाल्यावस्था मोटापा (Childhood Obesity in India) 11 Mar 2026

संदर्भ

विश्व मोटापा एटलस (World Obesity Atlas) 2026 के अनुसार भारत में बढ़ता बाल्यावस्था मोटापा एक उभरता हुआ सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है, जिसका दीर्घकालिक प्रभाव गैर-संचारी रोगों (NCDs) और देश के जनसांख्यिकीय लाभांश (demographic dividend) पर पड़ सकता है।

भारत में बाल्यावस्था मोटापे की वर्त्तमान स्थिति

  • एक मौन महामारी: हृदय रोग और मधुमेह जैसे गैर-संचारी रोग (NCDs), जो पहले मुख्यतः वयस्कों में देखे जाते थे, अब बच्चों में भी तेजी से बढ़ रहे हैं। यह एक धीरे-धीरे बढ़ता लेकिन गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है।
  • मुख्य आँकड़े (World Obesity Atlas 2026):
    • कुल प्रभाव: भारत में लगभग 4.1 करोड़ बच्चों का बॉडी मास इंडेक्स (BMI) उच्च है।
    • आयु वर्गानुसार विवरण: लगभग 1.5 करोड़ बच्चे (उम्र 5–9 वर्ष) और 2.6 करोड़ बच्चे (उम्र 10–19 वर्ष) अधिक वजन वाले या मोटे हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय तुलना: भारत में 41 मिलियन बच्चे उच्च BMI वाले हैं, जो संयुक्त राज्य अमेरिका (27 मिलियन) से अधिक हैं, लेकिन चीन (62 मिलियन) से अभी भी कम हैं।
    • यह दर्शाता है कि मोटापा अब केवल उच्च-आय वाले देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत जैसे मध्यम-आय वाले देशों में भी तेजी से बढ़ रहा है।

स्वास्थ्य प्रभाव और भविष्य की संभावनाएँ

  • बॉडी मास इंडेक्स (BMI): बीएमआई एक माप है जो किसी व्यक्ति के वज़न और ऊँचाई से गणना की जाती है ताकि व्यक्तियों को कम वजन, सामान्य वजन, अधिक वजन, या मोटापे के रूप में वर्गीकृत किया जा सके।
  • संबंधित बीमारियाँ: बच्चों में उच्च बीएमआई का संबंध कई गैर-संचारी रोगों के जल्दी शुरू होने से लगातार बढ़ रहा है।
    • हाइपरटेंशन: कम उम्र में ही उच्च रक्तचाप।
    • हाइपरग्लाइसीमिया: रक्त में लगातार उच्च ग्लूकोज स्तर, जिससे मधुमेह का खतरा बढ़ता है।
    • उच्च कोलेस्ट्रॉल: धमनियों में अतिरिक्त वसा का जमाव।
    • MASLD (फैटी लिवर): मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टियाटोटिक लिवर डिजीज, जो पहले मुख्यतः शराब के सेवन से संबंधित थी, अब अस्वस्थ आहार के कारण 10 वर्ष के बच्चों में भी दिखाई दे रही है।
  • 2040 का अनुमान: वर्ष 2040 तक भारत में लगभग 12 करोड़ स्कूली बच्चे जीवनशैली और चयापचय संबंधी विकारों से जुड़ी किसी न किसी दीर्घकालिक बीमारी से प्रभावित हो सकते हैं।

बाल्यावस्था मोटापे के प्रमुख कारण

  • शारीरिक गतिविधि की कमी: बच्चे अब बाहरी खेलों की जगह मोबाइल गेमिंग और अधिक स्क्रीन टाइम जैसी निष्क्रिय गतिविधियों में अधिक समय बिताते हैं।
  • अस्वस्थ आहार: पैकेज्ड फूड, चिप्स और मीठे पेय पदार्थों का बढ़ता सेवन अतिरिक्त कैलोरी और खराब पोषण का कारण बनता है।
  • स्कूल कैंटीन की खराब स्थिति: कई प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों की कैंटीन में स्वस्थ भोजन विकल्पों की कमी होती है, जिससे जंक फूड की उपलब्धता और खपत बढ़ जाती है।
  • स्तनपान की कमी: शिशु अवस्था में अपर्याप्त स्तनपान बच्चों को स्तन के दूध में पाए जाने वाले आवश्यक हार्मोन और एंटीबॉडी से वंचित कर देता है, जो चयापचय को नियंत्रित करने और संतुलित विकास में मदद करते हैं।

आगे की राह 

  •  विज्ञापन पर प्रतिबंध: बच्चों को लक्षित करने वाले जंक फूड के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाया जाए, क्योंकि बच्चे दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों को समझने में सक्षम नहीं होते।
  • चीनी कर (Sugar Levy): अत्यधिक सेवन को रोकने के लिए मीठे पेय पदार्थ और सोडा पर कर आरोपित करना।
  • अनिवार्य शारीरिक गतिविधि: सभी स्कूलों में शारीरिक शिक्षा और खेल पीरियड अनिवार्य किए जाएँ।
  • कामकाजी माताओं के लिए समर्थन: ऐसी नीतियाँ लागू की जाएँ जिससे कामकाजी माताएँ कम से कम पहले छह महीनों तक स्तनपान करा सकें।
  • संस्थागत जाँच: आंगनवाड़ियों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) पर नियमित रूप से मोटापे की जाँच की जाएँ ताकि अस्वस्थ आदतों की जल्दी पहचान की जा सके और समय पर हस्तक्षेप शुरू किया जा सके।
  • स्वस्थ स्कूल भोजन वातावरण: स्कूल कैंटीन में जंक फूड की बिक्री पर प्रतिबंध लगाकर स्वस्थ भोजन विकल्पों को बढ़ावा दिया जाए।

निष्कर्ष

बाल्यावस्था मोटापे से निपटने के लिए प्रारंभिक रोकथाम और हस्तक्षेप अत्यंत आवश्यक है। इससे भारत के भविष्य के मानव संसाधन की सुरक्षा होगी और गैर-संचारी रोगों में संभावित वृद्धि को रोका जा सकेगा।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: भारत में बाल्यावस्था मोटापा एक “मौन महामारी” के रूप में उभर रहा है, जो बदलती जीवनशैली और पोषण संबंधी पैटर्न को दर्शाता है। भारत में बाल्यावस्था मोटापे की वृद्धि में योगदान देने वाले सामाजिक और व्यवहारिक कारकों का परीक्षण कीजिए तथा इसके समाज पर दीर्घकालिक प्रभावों की चर्चा कीजिए।

 (250 शब्द, 15 अंक)

भारत में बाल्यावस्था मोटापा (Childhood Obesity in India)

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