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संघवाद और उच्च शिक्षा

संघवाद और उच्च शिक्षा 11 Jun 2026

संदर्भ:

वर्ष 1976 में 42वें संविधान संशोधन द्वारा शिक्षा को राज्य सूची से समवर्ती सूची में स्थानांतरित कर दिया गया था।

  • अनुच्छेद 254 के तहत, यदि इस विषय पर केंद्र और राज्य के कानूनों के बीच कोई टकराव होता है, तो केंद्रीय कानून को प्राथमिकता दी जाती है, जो आधुनिक संघवाद में तनाव का एक प्रमुख कारण बन गया है।

संवैधानिक पृष्ठभूमि

  • मूल रूप से, शिक्षा को संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत राज्य सूची में शामिल किया गया था, जिसका अर्थ था कि केवल राज्य सरकारें ही शिक्षा से संबंधित कानून निर्मित कर सकती थीं।
  • 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 के माध्यम से शिक्षा को समवर्ती सूची में स्थानांतरित कर दिया गया था।
  • इसका अर्थ है कि अब केंद्र और राज्य दोनों सरकारें शिक्षा से संबंधित कानून निर्मित कर सकते हैं।

विवाद का समाधान

  • समवर्ती सूची के किसी विषय पर केंद्र और राज्य के कानूनों में टकराव की स्थिति में, अनुच्छेद 254 के तहत केंद्रीय कानून को प्राथमिकता प्रदान की जाती है।

उच्च शिक्षा एक संघीय मुद्दा क्यों बन गई?

  • पहले केंद्र-राज्य विवाद मुख्य रूप से जल बंटवारे और कराधान जैसे मुद्दों से संबंधित होते थे।
  • हालाँकि, पाठ्यक्रम निर्माण, नियामक संस्थाओं, भाषा नीति और विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े बढ़ते विवादों के कारण उच्च शिक्षा अब एक संघीय मुद्दे के रूप में उभरी है।

प्रमुख विवाद:

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020: इसमें चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रमों, बहुविषयक विश्वविद्यालयों तथा शैक्षणिक लचीलापन की शुरुआत की गई। हालाँकि, त्रिभाषा सूत्र का तमिलनाडु जैसे राज्यों द्वारा विरोध किया गया, क्योंकि उन्हें क्षेत्रीय भाषाई पहचान और राज्य की स्वायत्तता को लेकर चिंता थी।
  • राज्यपाल बनाम राज्य सरकार: राज्य विश्वविद्यालयों में राज्यपालों के कुलाधिपति के रूप में कार्य करने से टकराव उत्पन्न हुआ है। राज्य सरकारें कुलपतियों की नियुक्ति पर नियंत्रण की मांग कर रही हैं, जबकि राज्यपाल इसे अपने संवैधानिक अधिकारों के अंतर्गत मानते हैं। यह विवाद केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक में देखा गया है।
  • केंद्र का वित्तीय नियंत्रण: UGC जैसी संस्थाओं के माध्यम से केंद्र सरकार कुछ शर्तों के साथ वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिसे राज्य उच्च शिक्षा में अपनी स्वायत्तता में कमी के रूप में देखते हैं। इसके उदाहरणों में ‘इंस्टीट्यूशंस ऑफ़ एमिनेंस’ और ‘अनुसंधान नेशनल रिसर्च फ़ाउंडेशन’ (NRF) शामिल हैं।
  • नई नियामक संस्थाएँ: प्रस्तावित विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 का उद्देश्य मौजूदा नियामक ढाँचे को प्रतिस्थापित करना है। राज्यों को आशंका है कि इससे शिक्षा प्रशासन का और अधिक केंद्रीकरण हो सकता है।
  • अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC): यह NEP 2020 के अंतर्गत एक डिजिटल क्रेडिट भंडारण प्रणाली है, जो क्रेडिट हस्तांतरण और शैक्षणिक लचीलापन को सक्षम बनाती है। हालाँकि, राज्य अत्यधिक केंद्रीय निगरानी और अपनी स्वायत्तता में कमी को लेकर चिंता व्यक्त करते हैं।

प्रमुख अवधारणाएँ

  • रणनीतिक अनुकूलन: 
    •  राज्य राष्ट्रीय शिक्षा नीतियों को पूरी तरह अस्वीकार नहीं करते; बल्कि वे उन्हें अपनी राजनीतिक, सामाजिक और क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुसार अपनाते, संशोधित करते या लागू करते हैं।
  • वार्तात्मक संघवाद:
    •  यह केंद्र और राज्यों के बीच परामर्श, सहयोग और सहमति के माध्यम से शासन के परिणाम प्राप्त करने की प्रक्रिया को संदर्भित करता है, न कि एकतरफा निर्णय लेने को।
  • उदाहरण: भारत में विदेशी विश्वविद्यालय
    • विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए नीतियाँ और नियम बनाने का कार्य केंद्र सरकार करती है।
    • हालाँकि, इसके कार्यान्वयन के लिए राज्यों का सहयोग आवश्यक होता है क्योंकि निम्नलिखित कार्य राज्यों के नियंत्रण में होते हैं:
      • भूमि उपलब्धता
      • बिजली आपूर्ति
      • स्थानीय अनुमतियाँ तथा आधारभूत संरचना

इस प्रकार, उच्च शिक्षा में सफल सुधारों के लिए केंद्र और राज्य दोनों सरकारों की सहयोगात्मक भागीदारी आवश्यक है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: उच्च शिक्षा भारतीय संघवाद में एक नए विवादास्पद क्षेत्र के रूप में उभरी है। हालिया शैक्षिक सुधारों तथा राज्यों की प्रतिक्रियाओं के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।

 (15 अंक, 250 शब्द)

संघवाद और उच्च शिक्षा

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