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प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) – 10 वर्ष पूर्ण

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) – 10 वर्ष पूर्ण 11 Jun 2026

संदर्भ:

9 जून 2026 को स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के 10 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक अभियान शुरू किया।

  • इस योजना की शुरुआत वर्ष 2016 में मातृ स्वास्थ्य में सुधार और मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए की गई थी।

महत्वपूर्ण शब्दावली

  • मातृ मृत्यु अनुपात (MMR): गर्भावस्था, प्रसव या प्रसव के बाद की अवधि में प्रति 1 लाख जीवित जन्मों पर होने वाली मातृ मृत्यु की संख्या को मातृ मृत्यु अनुपात कहा जाता है।
    • भारत का MMR पहले 130 प्रति 1 लाख जीवित जन्म था, जो घटकर वर्तमान में 87 प्रति 1 लाख जीवित जन्म हो गया है।
    • सतत विकास लक्ष्य (SDG) 2030 का उद्देश्य मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) को प्रति 1 लाख जीवित जन्मों पर 70 से कम करना है।
  • पूर्व-प्रसव देखभाल (ANC): गर्भावस्था के दौरान प्रसव से पहले दी जाने वाली चिकित्सा जाँच और देखभाल।
  • संस्थागत प्रसव: घर के बजाय अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में होने वाला प्रसव।
  • आउट-ऑफ-पॉकेट व्यय (OOPE):
    • रोगी द्वारा अपनी जेब से किया गया प्रत्यक्ष स्वास्थ्य खर्च।
    • बीमा द्वारा कवर किए गए खर्चों को OOPE में शामिल नहीं किया जाता है।

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) की सफलता के प्रमुख कारण

  • प्रत्येक माह की 9 तारीख रणनीति: इस रणनीति के तहत प्रत्येक माह की 9 तारीख को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भवती महिलाओं को निःशुल्क प्रसवपूर्व जाँच प्रदान की जाती है। यह पहल मुख्य रूप से गर्भावस्था की द्वितीय और तृतीय तिमाही की महिलाओं पर केंद्रित है। एक निश्चित तिथि निर्धारित होने से जागरूकता, उपस्थिति तथा गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी (ट्रैकिंग) में सुधार हुआ है।
  • समग्र देखभाल पैकेज (एकल-खिड़की प्रणाली): पहले गर्भवती महिलाओं को परामर्श, जाँच, दवाइयों और अन्य सेवाओं के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाना पड़ता था। PMSMA ने एकल-खिड़की प्रणाली की शुरुआत की, जिसके अंतर्गत महिलाओं को एक ही स्थान पर सभी आवश्यक सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं, जिनमें शामिल हैं:
    • डॉक्टर परामर्श
    • रक्त एवं मूत्र जाँच
    • अल्ट्रासाउंड जाँच
    • निःशुल्क दवाएं
    • परामर्श सेवाएं
    • प्रसव तैयारी मार्गदर्शन
  • निजी चिकित्सकों की भागीदारी: निजी स्वास्थ्य विशेषज्ञों को शामिल करने के लिए सरकार ने “आई प्लेज फॉर 9 (I Pledge for 9)” अभियान शुरू किया। इस पहल के अंतर्गत निजी विशेषज्ञ प्रत्येक वर्ष कम-से-कम 12 दिनों तक सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क सेवाएँ प्रदान करते हैं। इससे विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने में सहायता मिली तथा मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की आपूर्ति और गुणवत्ता को सुदृढ़ किया गया।

नवाचार: उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान

गर्भावस्था के दौरान लगभग 25 जोखिम कारकों की जाँच की जाती है:

  • एनीमिया
  • गर्भकालीन मधुमेह
  • गर्भावस्था प्रेरित उच्च रक्तचाप

महिलाओं की पहचान रंग-कोडित स्टिकरों के माध्यम से की जाती है

स्टिकर अर्थ
हरा सामान्य गर्भावस्था
लाल उच्च जोखिम गर्भावस्था
नीला उच्च रक्तचाप संबंधित गर्भावस्था
पीला पूर्व-विद्यमान बीमारी वाली गर्भावस्था

लाभ

  • स्वास्थ्यकर्मी उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की तुरंत पहचान कर सकते हैं।
  • उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की विशेष एवं सतत निगरानी सुनिश्चित की जाती है।

विस्तारित PMSMA (2022)

  • विस्तारित प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान को वर्ष 2022 में शुरू किया गया था, ताकि मासिक जाँचों के बीच के अंतर को कम किया जा सके तथा उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जा सके।

विस्तारित PMSMA के तीन स्तंभ

 समर्पित फॉलो-अप ट्रैकिंग

  • उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष प्रसवपूर्व देखभाल योजना सुनिश्चित की जाती है।
  • इन महिलाओं को प्रसव तक अधिकतम चार अतिरिक्त प्रसवपूर्व देखभाल (ANC) सत्र प्रदान किए जाते हैं।
  • इससे निरंतर निगरानी और समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप सुनिश्चित होता है।

नाम-आधारित सूचीकरण

  • उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण सरकारी पोर्टलों और अभिलेखों के माध्यम से किया जाता है।
  • इससे प्रत्येक लाभार्थी की निगरानी करने में सहायता मिलती है तथा यह सुनिश्चित होता है कि कोई भी महिला स्वास्थ्य सेवा प्रणाली से वंचित न रह जाए।

वित्तीय प्रोत्साहन

  • उच्च जोखिम वाली माताओं को यात्रा एवं अन्य संबंधित खर्चों में सहायता हेतु प्रत्येक अतिरिक्त अनुवर्ती (फॉलो-अप) पर ₹100 प्रदान किए जाते हैं (अधिकतम तीन बार)।
  • उच्च जोखिम वाली माताओं की निगरानी एवं सहायता के लिए आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।
  • यदि प्रसव के बाद 45 दिनों तक माता और शिशु दोनों स्वस्थ रहते हैं, तो आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं को अतिरिक्त ₹500 का प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किया जाता है।

सहायक योजनाएँ

  • जननी सुरक्षा योजना (JSY): यह योजना संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने तथा महिलाओं को स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव कराने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु नकद प्रोत्साहन प्रदान करती है।
    • इस योजना से लगभग 11.96 करोड़ महिलाओं को लाभ प्राप्त हुआ है।
  • जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK): इस योजना का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं पर वित्तीय बोझ को कम करना है। इसके तहत मातृत्व एवं नवजात शिशु देखभाल से संबंधित निःशुल्क सेवाएँ प्रदान की जाती हैं, जिनमें शामिल हैं:
    • मुफ्त दवाएं
    • मुफ्त जाँच
    • मुफ्त भोजन
    • मुफ्त परिवहन
  • SUMAN (सुरक्षित मातृत्व आश्वासन):
    • यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी महिला को मातृत्व संबंधी सेवाओं से वंचित न किया जाए।
    • यह सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क तथा सम्मानजनक मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गारंटी प्रदान करता है।
  • प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY):
    • गर्भावस्था के दौरान होने वाली आय की हानि की भरपाई के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
    • यह महिलाओं, विशेषकर कमजोर एवं वंचित वर्गों की महिलाओं को पर्याप्त विश्राम करने तथा संस्थागत स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित करती है।
  • LaQshya पहल: यह प्रसव कक्षों (Labour Rooms) तथा मातृत्व ऑपरेशन थिएटरों की गुणवत्ता में सुधार पर केंद्रित है।
  • इसका उद्देश्य सुनिश्चित करना है:
    • सुरक्षित प्रसव;
    • संक्रमण की बेहतर रोकथाम;
    • माताओं एवं नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य परिणामों में सुधार।

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) तथा संबद्ध मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रमुख उपलब्धियाँ

  • लगभग 7.5 करोड़ महिलाओं को निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल (ANC) सेवाएँ प्राप्त हुई हैं।
  • भारत का मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) प्रति 1 लाख जीवित जन्मों पर 130 मृत्यु से घटकर 87 मृत्यु तक आ गया है।
  • उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की प्रारंभिक अवस्था में पहचान की जा रही है, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु को कम करने में सहायता मिल रही है।
  • मातृ स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार निम्नलिखित माध्यमों से किया गया है:
    • आयुष्मान आरोग्य मंदिर
    • जिला अस्पताल
    • प्रथम रेफरल इकाइयाँ (FRUs)

चुनौतियाँ

  • क्षेत्रीय असमानता:
    • विभिन्न राज्यों में मातृ स्वास्थ्य के परिणामों में काफी असमानता देखने को मिलती है।
    • केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने बेहतर स्वास्थ्य अवसंरचना तथा स्वास्थ्य सेवाओं तक व्यापक पहुँच के कारण कम मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) प्राप्त किया है।
    • वहीं उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और असम जैसे राज्य अब भी उच्च मातृ मृत्यु दर से संबंधित गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
  • विशेषज्ञों की कमी: ग्रामीण स्वास्थ्य संस्थानों में प्रायः प्रशिक्षित विशेषज्ञों की कमी होती है, जिनमें शामिल हैं:
    • स्त्री रोग विशेषज्ञ
    • बाल रोग विशेषज्ञ
    • एनेस्थेटिस्ट
  • मासिक जाँचों की सीमा: यद्यपि मासिक प्रसवपूर्व जाँचों से निगरानी में सुधार होता है, फिर भी दो निर्धारित जाँचों के बीच जटिलताएँ विकसित हो सकती हैं।
    • उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं के लिए अधिक बार और निरंतर निगरानी की आवश्यकता होती है।
  • अंतिम छोर तक संपर्क की समस्या: दूरस्थ क्षेत्रों में एम्बुलेंस सेवाओं में देरी तथा अपर्याप्त परिवहन सुविधाएँ आपातकालीन मातृ स्वास्थ्य सेवाओं तक समय पर पहुँच को प्रभावित करती हैं।
    • अस्पताल तक पहुँचने में होने वाली देरी मातृ मृत्यु के जोखिम को बढ़ा सकती है।
  • कम जागरूकता: सामाजिक परंपराएँ, भ्रांतियाँ तथा जागरूकता की कमी के कारण गर्भवती महिलाएँ अक्सर समय पर स्वास्थ्य सेवाएँ प्राप्त करने में विलंब करती हैं।
    • इससे समय पर पंजीकरण तथा प्रसवपूर्व देखभाल (ANC) में विलंब होता है।

आगे की राह

  • गर्भवती महिलाओं, विशेषकर उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की वास्तविक समय निगरानी के लिए डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म को मजबूत किया जाए।
  • निरंतर निगरानी तथा स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए क्लाउड-आधारित स्वास्थ्य रिकॉर्ड विकसित किए जाएँ।
  • आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं को सामुदायिक स्तर पर जोखिम कारकों की पहचान करने तथा समय पर रेफरल सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षित किया जाए।
  • ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञों की उपलब्धता बढ़ाई जाए तथा आपातकालीन प्रसूति देखभाल को मजबूत किया जाए।
  • मातृ आपात स्थितियों में तेज परिवहन के लिए GPS-सक्षम एम्बुलेंस नेटवर्क विकसित किए जाएँ।
  • रोकथाम योग्य मातृ मृत्यु को कम करने के लिए जागरूकता अभियानों तथा सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दिया जाए।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: मानक प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) से विस्तारित प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (E-PMSMA) की ओर संक्रमण मातृ स्वास्थ्य में स्थिर एवं आवधिक निगरानी से निरंतर जोखिम प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। भारत की सतत विकास लक्ष्य (SDG) प्राप्ति की प्रगति के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।

 (15 अंक, 250 शब्द)

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) – 10 वर्ष पूर्ण

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