भारत–म्यांमार संबंध

भारत–म्यांमार संबंध 10 Jun 2026

संदर्भ:

म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग ने वर्ष 2026 में भारत का दौरा किया। उन्होंने सबसे पहले बोधगया का भ्रमण किया, जो सांस्कृतिक कूटनीति तथा भारत-म्यांमार की साझा बौद्ध विरासत को रेखांकित करता है।

भारत के लिए म्यांमार क्यों महत्वपूर्ण है?

  • सामरिक स्थिति: म्यांमार दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए भारत का प्रवेश-द्वार है और एक्ट ईस्ट नीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसकी भारत के साथ 1,643 किमी लंबी सीमा लगती है, जो अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम राज्यों से जुड़ती है।
  • चीन कारक: म्यांमार पर पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बाद चीन ने निवेश, हथियारों की आपूर्ति और कूटनीतिक समर्थन के माध्यम से अपना प्रभाव बढ़ाया। इसलिए भारत अपने पड़ोसी देश में चीन के पूर्ण प्रभुत्व को रोकने का प्रयास करता है।

भारत का दृष्टिकोण: यथार्थवादी राजनीति 

  • व्यावहारिक विदेश नीति: भारत यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाता है, जो इस सिद्धांत पर आधारित है कि देशों के स्थायी मित्र नहीं, बल्कि स्थायी हित होते हैं। इसलिए भारत राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए सत्ता में मौजूद सरकार के साथ संवाद और सहयोग बनाए रखता है।
  • सामरिक आवश्यकता: म्यांमार के साथ भारत की सहभागिता सैन्य शासन के समर्थन का संकेत नहीं है, बल्कि सुरक्षा, संपर्क और क्षेत्रीय हितों के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता को दर्शाती है।

कनेक्टिविटी परियोजनाएँ

  • कलादान बहु-माध्यम पारगमन परियोजना (Kaladan Multi-Modal Transit Project): यह परियोजना कोलकाता → सित्तवे बंदरगाह → पालेटवा → मिजोरम को समुद्री, नदी और सड़क मार्गों के माध्यम से जोड़ती है, जिससे पूर्वोत्तर भारत के साथ संपर्क बेहतर होता है। हालाँकि, इसे गृहयुद्ध/आंतरिक संघर्ष, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों तथा भूमि अधिग्रहण संबंधी समस्याओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
  • भारत–म्यांमार–थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग (India–Myanmar–Thailand Trilateral Highway): यह राजमार्ग भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने का लक्ष्य रखता है, जिससे व्यापार विस्तार और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा मिलता है। हालाँकि, म्यांमार में आंतरिक संघर्षों के कारण इसकी प्रगति प्रभावित हो रही है।

म्यांमार यात्रा के परिणाम

  • आर्थिक सहयोग: द्विपक्षीय व्यापार लगभग 1.95 बिलियन डॉलर है, तथा अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए स्थानीय मुद्रा में व्यापार को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।
  • रणनीतिक सहयोग: भारत और म्यांमार ने महत्वपूर्ण खनिजों तथा सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा की, जिससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को और मजबूत किया जा सके।
  • साइबर सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: म्यांमार स्थित ऑनलाइन धोखाधड़ी केंद्रों द्वारा भारतीय नागरिकों को निशाना बनाए जाने की घटनाएँ एक बढ़ती हुई सुरक्षा चुनौती के रूप में उभरी हैं।
  • सांस्कृतिक संबंध: मेकांग-गंगा सहयोग के अंतर्गत छात्रवृत्तियों के विस्तार का उद्देश्य दोनों क्षेत्रों के बीच जन-जन संपर्क को मजबूत करना है।

निष्कर्ष

  • संतुलित म्यांमार नीति: भारत की म्यांमार नीति व्यावहारिकता और रणनीतिक यथार्थवाद को दर्शाती है, जिसमें लोकतांत्रिक चिंताओं, राष्ट्रीय सुरक्षा, चीन के प्रभाव और क्षेत्रीय संपर्क के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: “म्यांमार की सैन्य सरकार के साथ भारत की व्यावहारिक सहभागिता नैतिक विकल्प के बजाय एक भू-राजनीतिक आवश्यकता है।” भारत की एक्ट ईस्ट नीति और उसकी रणनीतिक मजबूरियों के आलोक में इस कथन पर चर्चा कीजिए।

 (10 अंक, 150 शब्द)

भारत–म्यांमार संबंध

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