संदर्भ:
हाल ही में दिल्ली के शाहदरा, पालम और द्वारका क्षेत्रों में हुई भीषण आग की घटनाओं ने शहरी अग्नि सुरक्षा, निकासी योजना (Evacuation Planning), विद्युत अवसंरचना तथा बुनियादी सुरक्षा उपायों के पालन में गंभीर कमियों को उजागर किया है।
“सुरक्षा के भ्रम” और सुरक्षा विफलताएँ
- इलेक्ट्रॉनिक लॉक: शाहदरा अग्निकांड में बिजली कटने के कारण इलेक्ट्रॉनिक लॉक बंद हो गए, जिससे निवासी अंदर ही फँस गए।
- ताले “फेल-सेफ़ (Fail-safe)” नहीं थे और आपात स्थितियों के दौरान अपने-आप नहीं खुलते थे।
- सुरक्षा ग्रिल: चोरी रोकने के लिए लगाई गई भारी लोहे की ग्रिलों ने दमकलकर्मियों के प्रवेश और बचाव कार्यों में बाधा उत्पन्न की।
- छत तक अवरुद्ध पहुँच: बंद या अवरुद्ध छत का मार्ग होने के कारण आग के दौरान निवासी ऊपर की ओर जाकर बच निकलने में असमर्थ रहे।
मूल कारण: MCB और विद्युत संबंधी लापरवाही
- MCB का कार्य: मिनिएचर सर्किट ब्रेकर (MCB) एक ऐसा उपकरण है जो सुरक्षित सीमा से अधिक विद्युत धारा प्रवाहित होने पर स्वतः बिजली काट देता है, जिससे ओवरहीटिंग और आग लगने से बचाव होता है।
- प्रत्येक विद्युत तार को केवल सीमित मात्रा में विद्युत धारा वहन करने के लिए डिज़ाइन किया जाता है।
- जब बहुत अधिक उपकरण एक साथ जुड़े होते हैं या किसी प्रकार की खराबी उत्पन्न होती है, तो तारों में अत्यधिक विद्युत धारा प्रवाहित होने लगती है, जिससे वे गर्म हो जाते हैं।
- MCB इस ओवरलोड (अत्यधिक भार) की पहचान करता है और तारों के खतरनाक रूप से गर्म होने से पहले ही बिजली आपूर्ति को बंद करके “ट्रिप (Trip)” हो जाता है।
- असुरक्षित प्रथाएँ: कई भवनों में MCB का बार-बार ट्रिप होना एक चेतावनी संकेत के बजाय एक असुविधा के रूप में देखा जाता है।
- विद्युत भार कम करने या खराब वायरिंग की मरम्मत करने के बजाय, लोग अक्सर मौजूदा MCB को अधिक क्षमता वाले MCB से बदल देते हैं।
- उच्च-क्षमता वाले MCB के उपयोग का खतरा: अधिक क्षमता वाला MCB तब भी बिजली आपूर्ति को काटने में देरी करता है या उसे रोक देता है जब तार अधिक गर्म हो रहे होते हैं। इसके परिणामस्वरूप:
- अत्यधिक धारा कम क्षमता वाले तारों से लगातार प्रभावित होते रहते है।
- ताप के कारण तारों के आसपास की इन्सुलेशन (रक्षात्मक परत) पिघल जाती है।
- स्पार्क या शॉर्ट सर्किट होने लगते हैं।
- पास में मौजूद ज्वलनशील सामग्री, जैसे लकड़ी के पैनल, प्लास्टिक की नलिकाएँ या फर्नीचर, आग पकड़ सकते हैं।
- छिपी हुई आंतरिक आग: खराब सुरक्षा प्रणाली के कारण आग दीवारों के भीतर शुरू हो सकती है और बाद में पूरे भवन में फैल जाती है।
अवसंरचना और प्रणालीगत चुनौतियाँ
- अप्रभावी उपकरण: हाइड्रॉलिक लिफ्ट, स्प्रिंकलर और अलार्म जैसी बुनियादी अग्निशमन प्रणालियाँ अक्सर अपर्याप्त या गैर-कार्यशील बनी रहती हैं।
- अव्यवस्थित शहरी नियोजन: संकरी गलियाँ और अवैध निर्माण दमकल गाड़ियों को घटनास्थल तक शीघ्र पहुँचने से रोकते हैं।
- अवैध मिश्रित-उपयोग वाली इमारतें: आवासीय और वाणिज्यिक उपयोग के लिए मिश्रित इमारतें अक्सर उचित अग्नि सुरक्षा मंजूरी के बिना संचालित होती हैं।
ऐतिहासिक घटनाएँ तथा उनसे सीखने में विफलता
- उपहार सिनेमा अग्निकांड: दिल्ली की सबसे दुखद अग्नि दुर्घटनाओं में से एक, जिसने आपातकालीन तैयारी की विफलताओं को उजागर किया।
- सूरत कोचिंग सेंटर अग्निकांड: कई छात्रों की मृत्यु इसलिए हुई क्योंकि छत का रास्ता बंद था और वे बाहर नहीं निकल सके।
आगे की राह
- अनिवार्य भवन संहिता: राष्ट्रीय भवन संहिता (NBC) की अग्नि सुरक्षा मानकों को कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाया जाना चाहिए।
- फेल-सेफ इलेक्ट्रॉनिक लॉक: बिजली जाने या आग लगने की स्थिति में इलेक्ट्रॉनिक लॉक स्वतः खुल जाने चाहिए।
- अनिवार्य विद्युत ऑडिट: 10 वर्ष से अधिक के पुराने भवनों का प्रत्येक तीन वर्ष में अनिवार्य विद्युत सुरक्षा ऑडिट होना चाहिए।
- सामुदायिक अग्निशमन अभ्यास: रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन्स (RWAs) को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के साथ मिलकर नियमित अग्नि सुरक्षा मॉक ड्रिल आयोजित करनी चाहिए।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न: भारत में तीव्र शहरीकरण ने आवासीय परिसरों को अग्नि आपातकाल के दौरान संभावित मृत्यु-जाल (Death Traps) में परिवर्तित कर दिया है। ऐसे खतरों को बढ़ाने वाले शहरी नियोजन एवं विद्युत सुरक्षा प्रोटोकॉल की प्रणालीगत कमियों की चर्चा कीजिए। साथ ही, राष्ट्रीय भवन संहिता (National Building Code) के आधार पर आवश्यक उपाय सुझाइए।
(15 अंक, 250 शब्द)
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