संदर्भ
सरकार ने अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के सबसे दक्षिणी भाग ग्रेट निकोबार द्वीप में ₹91,000 करोड़ की एक विशाल अवसंरचना परियोजना का प्रस्ताव रखा है। इस परियोजना का उद्देश्य द्वीप को एक रणनीतिक एवं आर्थिक केंद्र (हब) में परिवर्तित करना है।
ग्रेट निकोबार द्वीप का पारिस्थितिक महत्व
- उष्णकटिबंधीय वर्षावन: ग्रेट निकोबार में ऐसे प्राकृतिक उष्णकटिबंधीय वर्षावन हैं जो बड़े पैमाने पर मानवीय हस्तक्षेप से अछूते रहे हैं। ये जैव विविधता संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
- दुर्लभ प्रवाल भित्तियाँ: द्वीप में विशिष्ट एवं दुर्लभ प्रवाल भित्ति पारितंत्र पाए जाते हैं, जो विविध समुद्री जीवों को आश्रय प्रदान करते हैं तथा पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखते हैं।
- अद्वितीय जैव विविधता: ग्रेट निकोबार समृद्ध जैव विविधता का घर है, जहाँ अनेक दुर्लभ वनस्पति एवं जीव-जन्तु की प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
- स्थानिक प्रजातियाँ: द्वीप पर कई ऐसी प्रजातियाँ पाई जाती हैं जो केवल इसी भौगोलिक क्षेत्र में मिलती हैं और विश्व के किसी अन्य भाग में नहीं।
- निकोबार मेगापोड: यह एक दुर्लभ स्थानिक पक्षी प्रजाति है, जो केवल निकोबार क्षेत्र में पाई जाती है। इसके आवास के विनाश से इसके स्थायी विलुप्त होने का खतरा उत्पन्न हो सकता है।
- लेदरबैक कछुआ: ग्रेट निकोबार की गलाथिया खाड़ी लेदरबैक कछुओं का महत्वपूर्ण प्रजनन एवं अंडे देने का स्थल है।
ग्रेट निकोबार परियोजना के चार प्रमुख घटक
- अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह: परियोजना के अंतर्गत गलाथिया खाड़ी में एक अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह का विकास किया जाएगा।
- ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह वह सुविधा है जहाँ बड़े जहाज अपना माल उतारते हैं और उसे आगे परिवहन हेतु छोटे जहाजों में स्थानांतरित किया जाता है।
- महत्व:
- भारत की विदेशी ट्रांसशिपमेंट बंदरगाहों पर निर्भरता कम होगी।
- वैश्विक समुद्री व्यापार में भारत की भूमिका सुदृढ़ होगी।
- मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित होने से इसे महत्वपूर्ण रणनीतिक एवं आर्थिक लाभ प्राप्त होगा।
- अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा:
- परियोजना के अंतर्गत एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण किया जाएगा, जिसका उपयोग नागरिक तथा सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकेगा।
- यह निम्नलिखित उद्देश्यों की पूर्ति करेगा:
- नागरिक उद्देश्यों के लिए, जैसे यात्री परिवहन एवं वाणिज्यिक संपर्क को बढ़ावा देना।
- सैन्य उद्देश्यों के लिए, रक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करना।
- द्वीप की भौगोलिक स्थिति के कारण यह हवाई अड्डा रणनीतिक सुरक्षा और रक्षा दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
- विद्युत अवसंरचना: परियोजना के अंतर्गत गैस-आधारित एवं सौर-आधारित विद्युत उत्पादन सुविधाओं की स्थापना का प्रस्ताव शामिल है।
- ये विद्युत उत्पादन सुविधाएँ निम्नलिखित के लिए ऊर्जा सहायता प्रदान करेंगी:
- नई अवसंरचना परियोजना
- प्रस्तावित टाउनशिप
- दीर्घकालिक आर्थिक गतिविधि
- नई टाउनशिप का विकास:
- परियोजना के समर्थन हेतु एक नियोजित नई टाउनशिप विकसित की जाएगी।
- यह निम्नलिखित के लिए आवास एवं सुविधाएँ प्रदान करेगी:
- निर्माण एवं संचालन कार्यों में लगे श्रमिक
- सरकारी अधिकारी एवं प्रशासक
- नई अवसंरचना से जुड़ी सहायक जनसंख्या
ग्रेट निकोबार परियोजना से संबंधित चिंताएँ
पर्यावरणीय प्रभाव:
- परियोजना के लिए प्राथमिक वनों के बड़े हिस्से को हटाने और उनके उपयोग परिवर्तन की आवश्यकता होगी।
- प्राथमिक वन: ऐसे वन जो सदियों से मानवीय गतिविधियों से लगभग अछूते रहे हैं तथा अपनी प्राकृतिक पारिस्थितिक प्रक्रियाओं को बनाए रखते हैं।
प्रमुख चिंताएँ:
- जैव विविधता की हानि: बड़े पैमाने पर वन कटाई से द्वीप की समृद्ध जैव विविधता को खतरा हो सकता है।
- स्थानिक प्रजातियों का विनाश: केवल ग्रेट निकोबार में पाई जाने वाली प्रजातियाँ आवास विनाश के कारण विलुप्ति के जोखिम का सामना कर सकती हैं।
- अपरिवर्तनीय पारिस्थितिक क्षति: विशेषकर उष्णकटिबंधीय वर्षावनों जैसे प्राकृतिक पारितंत्रों के नष्ट होने के बाद उनकी पुनर्स्थापना लगभग असंभव हो सकती है।
प्रतिपूरक वनरोपण से जुड़ी समस्याएँ
- सरकार का तर्क है कि परियोजना के लिए काटे गए वृक्षों की भरपाई प्रतिपूरक वनीकरण के माध्यम से की जाएगी।
- हालाँकि, किसी अन्य क्षेत्र में वृक्षारोपण करना उष्णकटिबंधीय वर्षावन पारितंत्र के पारिस्थितिक महत्व और मूल्य की भरपाई नहीं कर सकता।
- निकोबार मेगापोड और लेदरबैक कछुए जैसी प्रजातियों के आवासों का पुनर्निर्माण आसानी से नहीं किया जा सकता, क्योंकि वे विशिष्ट भौगोलिक एवं पारिस्थितिक परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।
रणनीतिक टैग विवाद
- राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इसके महत्व को देखते हुए इस परियोजना को “रणनीतिक” श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।
चिंताएँ
- राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए पर्यावरण एवं परियोजना से संबंधित जानकारी तक पहुँच को सीमित कर दिया गया है।
- आलोचकों का तर्क है कि ‘रणनीतिक’ टैग का उपयोग पारदर्शिता तथा सार्वजनिक जवाबदेही को कम कर सकता है।
- सार्वजनिक निवेश बोर्ड (PIB) ने कथित रूप से प्रश्न उठाया कि क्या बंदरगाह का वास्तव में कोई रणनीतिक उद्देश्य है या यह मुख्यतः एक वाणिज्यिक परियोजना है।
मुख्य मुद्दा
यह बहस निम्नलिखित के बीच संतुलन स्थापित करने से संबंधित है:
- राष्ट्रीय सुरक्षा हित
- पर्यावरणीय पारदर्शिता
- सार्वजनिक जवाबदेही
व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF)
- व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF): यह सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली एक वित्तीय सहायता व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण किंतु आर्थिक रूप से कम लाभकारी या वित्तीय रूप से चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाना है।
समस्याएँ
- परियोजना को स्वीकृति तो मिल गई, लेकिन व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) के तहत सरकारी वित्तीय सहायता को कथित रूप से मंजूरी नहीं दी गई।
प्रमुख प्रश्न
- यदि परियोजना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, तो सरकारी वित्तीय सहायता क्यों नहीं दी जा रही?
- यदि यह केवल एक वाणिज्यिक परियोजना है, तो इसे राष्ट्रीय सुरक्षा पहल के रूप में क्यों प्रस्तुत किया जा रहा है?
मूल संघर्ष
यह मुद्दा निम्नलिखित के बीच तनाव को दर्शाता है:
- आर्थिक उद्देश्य
- रणनीतिक उद्देश्य
जनजातीय अधिकार
- ग्रेट निकोबार दो प्रमुख स्वदेशी समुदायों का निवास स्थान है:
- शोम्पेन (Shompen)
- ग्रेट निकोबारी (Great Nicobarese)
- शोम्पेन समुदाय को विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूह (PVTG) के रूप में मान्यता प्राप्त है।
प्रमुख चिंताएँ
- परियोजना के प्रभावों संबंधी पूर्ण जानकारी का अभाव।
- विस्थापन एवं पारंपरिक आवासों के नुकसान की आशंका।
- पारंपरिक जीवनशैली एवं सांस्कृतिक पहचान पर खतरा।
- बड़े पैमाने पर विकास के कारण पैतृक भूमि की हानि।
जनजातियों द्वारा उठाए गए मुख्य मुद्दे
- परियोजना का पैमाना: द्वीप संभवतः इतने बड़े पैमाने के विकास को वहन या समाहित करने में सक्षम नहीं है।
- पारदर्शिता का अभाव: पर्यावरणीय स्वीकृतियों तथा निर्णय-निर्माण प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंताएँ व्यक्त की जा रही हैं।
- कार्यान्वयन की गति: पर्याप्त परामर्श एवं हितधारकों की सहभागिता के बिना परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
आगे की राह
- पारदर्शिता सुनिश्चित करना: जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए परियोजना से संबंधित विशेषज्ञ समितियों के निष्कर्षों एवं सिफारिशों को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
- सूचित निर्णय-निर्माण एवं जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए परियोजना से संबंधित संपूर्ण जानकारी संसद, नागरिकों तथा स्थानीय समुदायों के साथ साझा की जानी चाहिए।
- व्यापक लागत-लाभ विश्लेषण का संचालन: परियोजना के समग्र प्रभाव का आकलन करने के लिए एक विस्तृत लागत-लाभ का विश्लेषण किया जाना चाहिए।
- इसमें निम्नलिखित को शामिल किया जाना चाहिए:
- परियोजना से प्राप्त होने वाले आर्थिक लाभ
- पारिस्थितिक क्षति से उत्पन्न पर्यावरणीय लागत
- सरकार द्वारा वहन की जाने वाली छिपी सब्सिडियाँ एवं वित्तीय प्रभाव
- भूमि अधिग्रहण की लागत एवं उससे जुड़े सामाजिक प्रभाव
- दीर्घकालिक पारिस्थितिक परिणाम
- सतत विकास को बढ़ावा देना:
- परियोजना को सतत विकास के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए, जिसमें विभिन्न उद्देश्यों के बीच संतुलन स्थापित किया जाए।
- विकास योजना में निम्नलिखित के बीच सामंजस्य सुनिश्चित किया जाना चाहिए:
- रणनीतिक सुरक्षा आवश्यकताएँ
- आर्थिक विकास एवं अवसंरचना निर्माण
- पर्यावरण संरक्षण एवं जैव विविधता संरक्षण
- जनजातीय अधिकार एवं सामाजिक न्याय।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न: ग्रेट निकोबार विकास परियोजना रणनीतिक राष्ट्रीय हितों और पारिस्थितिक संरक्षण के बीच विद्यमान पारंपरिक दुविधा को उजागर करती है। परियोजना से जुड़े आर्थिक व्यवहार्यता तथा पर्यावरणीय लागतों का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।
(15 अंक, 250 शब्द)
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