संदर्भ
- हाल ही में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) की प्लेसमेंट समितियों ने कैंपस भर्ती प्रक्रिया में प्रमुख सुधार करते हुए छात्रों को भर्तीकर्ताओं को प्रस्तुत किए जाने वाले बायोडाटा में अपनी जेईई (JEE) रैंक का उल्लेख करने से प्रतिबंधित कर दिया है।
- इसके अतिरिक्त, समितियों ने असाधारण उच्चतम वेतन पैकेज को प्रमुखता देने के बजाय मध्यिका वेतन पैकेज को प्रमुखता से प्रदर्शित करने का निर्णय लिया है।
- इसका मुख्य उद्देश्य निष्पक्ष, कौशल-आधारित भर्ती को बढ़ावा देना तथा छात्रों के मध्य अनावश्यक प्रतिस्पर्धा और मनोवैज्ञानिक दबाव को कम करना है।
पृष्ठभूमि
- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) में प्रवेश जेईई एडवांस्ड (JEE Advanced) (बी.टेक. के लिए) तथा गेट (GATE) (एम.टेक. के लिए) जैसी प्रतिस्पर्धी प्रवेश परीक्षाओं के आधार पर दिया जाता है।
- परंपरागत रूप से, अनेक छात्र अपने प्लेसमेंट बायोडाटा (Resume) में अपनी जेईई रैंक का उल्लेख करते थे।
- भले ही छात्र आईआईटी में चार वर्षों का कठोर शैक्षणिक, व्यावहारिक तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके होते थे, फिर भी अनेक भर्तीकर्ता (Recruiters) इन प्रवेश परीक्षा अंकों/रैंकों का उपयोग प्रारंभिक चयन प्रक्रिया के प्रमुख आधार के रूप में करते थे।
प्रमुख प्लेसमेंट सुधार
- जेईई रैंक का उल्लेख करने पर प्रतिबंध
- कैंपस प्लेसमेंट में भाग लेने वाले छात्रों को अब अपने बायोडाटा में जेईई (JEE) रैंक का उल्लेख करने की अनुमति नहीं होगी।
- अपेक्षा की जाती है कि भर्तीकर्ता (Recruiters) उम्मीदवारों का मूल्यांकन उनकी प्रवेश परीक्षा के प्रदर्शन के बजाय कॉलेज के दौरान प्राप्त शैक्षणिक, व्यावहारिक एवं अन्य उपलब्धियों के आधार पर करेंगे।
- मध्यिका वेतन पैकेज पर अधिक जोर
- आईआईटी अब कुछ असाधारण उच्च वेतन पैकेज को प्रमुखता से प्रदर्शित करने के बजाय मध्यिका वेतन पैकेज को अधिक महत्त्व देंगे।
- इसका प्रमुख उद्देश्य प्लेसमेंट परिणामों की अधिक रीअलिस्टिक तस्वीर प्रस्तुत करना तथा छात्रों एवं अभिभावकों की अवास्तविक अपेक्षाओं को कम करना है।
सुधारों के पीछे प्रमुख तर्क
- प्रवेश-स्तरीय योग्यता से अर्जित दक्षता की ओर बदलाव
- किसी भी छात्र की जेईई (JEE) रैंक केवल एक प्रवेश परीक्षा में उसके प्रदर्शन को दर्शाती है, जबकि आईआईटी में चार वर्षों की उच्च शिक्षा उसके तकनीकी ज्ञान, अनुसंधान क्षमता, टीमवर्क, संचार कौशल तथा व्यावहारिक समस्या-समाधान क्षमता का विकास करती है।
- इसलिए भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों का मूल्यांकन उनकी पूर्व प्रवेश परीक्षा के प्रदर्शन के बजाय उनकी वर्तमान दक्षता के आधार पर किया जाना चाहिए।
- समग्र मूल्यांकन को प्रोत्साहन
- नियोक्ताओं (Employers) को उम्मीदवारों का मूल्यांकन निम्नलिखित आधारों पर करना चाहिए:
- शैक्षणिक प्रदर्शन (CGPA)
- तकनीकी साक्षात्कार
- कोडिंग मूल्यांकन
- प्रोजेक्ट कार्य
- इंटर्नशिप
- डिज़ाइन संबंधी चुनौतियाँ
- केस स्टडी
- संचार एवं व्यवहार संबंधी कौशल इत्यादि
- उक्त सभी मानदंड कार्यस्थल के लिए उम्मीदवार की समग्र तैयारी का अधिक व्यापक और यथार्थवादी तरीके से आकलन प्रदर्शित करते हैं।
सुधारों के लाभ
- विश्वविद्यालयों के प्रदर्शन पर आधारित योग्यता को बढ़ावा
- छात्रों का मूल्यांकन वर्षों पहले दी गई एक प्रवेश परीक्षा के आधार पर नहीं, बल्कि शिक्षा के दौरान अर्जित ज्ञान, कौशल एवं दक्षताओं के आधार पर किया जाएगा।
- इससे पूरे विश्वविद्यालयी जीवन में निरंतर सीखने की भावना को प्रोत्साहन मिलेगा।
- छिपे हुए सामाजिक पूर्वाग्रह में कमी
- जेईई रैंक से अप्रत्यक्ष रूप से छात्र की प्रवेश श्रेणी (सामान्य या आरक्षित) का अनुमान लगाया जा सकता है।
- रैंक का उल्लेख समाप्त करने से भर्ती प्रक्रिया में अवचेतन पूर्वाग्रह कम होगा तथा सभी उम्मीदवारों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।
- प्रथम पीढ़ी के शिक्षार्थियों को लाभ
- आईआईटी के अनेक छात्र ग्रामीण क्षेत्रों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से आते हैं या अपने परिवार में कॉलेज जाने वाले प्रथम पीढ़ी के विद्यार्थी होते हैं।
- यद्यपि उन्होंने अलग-अलग परिस्थितियों एवं मार्गों से प्रवेश प्राप्त किया हो, फिर भी कॉलेज के दौरान वे अपनी क्षमताओं में उल्लेखनीय सुधार करते हैं।
- इसलिए भर्ती प्रक्रिया में प्रारंभिक शैक्षिक असमानताओं के बजाय छात्रों की प्रगति और उपलब्धियों को महत्त्व दिया जाना चाहिए।
- मनोवैज्ञानिक दबाव में कमी
- प्रवेश परीक्षा की रैंक के आधार पर लगातार तुलना किए जाने से छात्रों में अनावश्यक तनाव एवं चिंता उत्पन्न होती है तथा उनके आत्मविश्वास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
- ये सुधार छात्रों को पुराने परीक्षा परिणामों के बजाय निरंतर आत्म-विकास पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करते हैं।
- प्लेसमेंट संबंधी अधिक यथार्थवादी जानकारी
- मध्यिका वेतन पर जोर देने से कुछ असाधारण उच्च वेतन पैकेजों के कारण उत्पन्न होने वाली भ्रामक धारणाओं से बचा जा सकेगा।
- इससे छात्रों और अभिभावकों को रोजगार एवं प्लेसमेंट परिणामों की अधिक सटीक और वास्तविक समझ प्राप्त होगी।
पूर्व व्यवस्था की चुनौतियाँ
- प्रवेश परीक्षा के अंकों/रैंक पर अधिक निर्भरता: छात्रों की क्षमता के अनेक बेहतर संकेतक उपलब्ध होने के बावजूद, नियोक्ता अक्सर जेईई (JEE) रैंक को असंगत रूप से अधिक महत्त्व देते थे।
- सामाजिक असमानताओं को बढ़ावा: रैंक-आधारित भर्ती प्रणाली से पहले से मौजूद शैक्षिक एवं सामाजिक असमानताओं के और अधिक मजबूत होने का खतरा बना रहता था।
- कौशल विकास की उपेक्षा: पूर्व व्यवस्था में कॉलेज के दौरान अर्जित इंटर्नशिप, अनुसंधान, नवाचार, नेतृत्व क्षमता तथा व्यावहारिक अनुभव जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को अपेक्षित महत्त्व नहीं दिया जाता था।
- अवास्तविक वेतन अपेक्षाएँ: कुछ रिकॉर्ड-तोड़ उच्च वेतन पैकेजों पर अत्यधिक सार्वजनिक ध्यान केंद्रित होने के कारण अभ्यर्थियों एवं अभिभावकों के मध्य प्लेसमेंट को लेकर अवास्तविक अपेक्षाएँ विकसित हो जाती थीं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के साथ सामंजस्य
ये सुधार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उस दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करते हैं, जो निम्नलिखित सिद्धांतों का समर्थन करता है:
- समग्र शिक्षा : शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि से नहीं, बल्कि सर्वांगीण व्यक्तित्व का विकास करना होना चाहिए।
- आलोचनात्मक चिंतन : शैक्षणिक संस्थानों को ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना चाहिए जो विश्लेषणात्मक तर्क एवं स्वतंत्र चिंतन में सक्षम हों।
- सृजनात्मकता एवं नवाचार : उच्च शिक्षा में रटने के स्थान पर नवाचार, समस्या-समाधान तथा उद्यमिता को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
- नैतिक निर्णय-निर्माण:विद्यार्थियों में नैतिक विवेक, नेतृत्व क्षमता तथा उत्तरदायी नागरिकता का विकास किया जाना चाहिए।
- दक्षता-आधारित मूल्यांकन: मूल्यांकन प्रणाली को केवल रटकर याद करने तक सीमित न रखकर ज्ञान के अनुप्रयोग, कौशल तथा वास्तविक जीवन की दक्षताओं के आकलन पर आधारित बनाया जाना चाहिए।
आगे की राह
- सभी संस्थानों में कौशल-आधारित भर्ती को अपनाया जाए: विश्वविद्यालयों एवं नियोक्ताओं को प्रवेश परीक्षा के अंकों/रैंक पर निर्भर रहने के बजाय दक्षता-आधारित भर्ती को प्राथमिकता देनी चाहिए।
- समग्र मूल्यांकन के मानकीकृत ढाँचे विकसित किए जाएँ: शैक्षणिक संस्थानों को ऐसी पारदर्शी मूल्यांकन प्रणाली विकसित करनी चाहिए, जिसमें प्रोजेक्ट, इंटर्नशिप, अनुसंधान कार्य तथा व्यावसायिक कौशल को समुचित महत्व दिया जाए।
- उद्योग–शिक्षा संस्थान सहयोग को सुदृढ़ बनाया जाए: उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच अधिक सहयोग स्थापित किया जाना चाहिए, ताकि पाठ्यक्रमों को बदलती हुई श्रम बाज़ार की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जा सके।
- करियर मार्गदर्शन को बेहतर बनाया जाए: विद्यार्थियों को व्यवस्थित करियर परामर्श उपलब्ध कराया जाना चाहिए, जिससे वे समझ सकें कि दीर्घकालिक व्यावसायिक सफलता केवल प्रवेश परीक्षा की रैंक पर नहीं, बल्कि कौशल, दक्षता एवं निरंतर सीखने पर निर्भर करती है।
- निष्पक्ष एवं समावेशी भर्ती को बढ़ावा दिया जाए: भर्तीकर्ताओं को ऐसी भर्ती प्रक्रियाएँ अपनानी चाहिए जो पूर्वाग्रह को न्यूनतम करें तथा समान अवसर, विविधता और योग्यता-आधारित व्यवस्था को प्रोत्साहित करें।
निष्कर्ष
- निष्कर्षतः आईआईटी प्लेसमेंट सुधार परीक्षा-केंद्रित मूल्यांकन से दक्षता-आधारित भर्ती प्रक्रिया की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करते हैं। जेईई (JEE) रैंक पर निर्भरता को हतोत्साहित करते हुए तथा कौशल, व्यावहारिक अधिगम और समग्र विकास पर बल देकर ये सुधार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप उच्च शिक्षा को अधिक प्रासंगिक और परिणामोन्मुख बनाते हैं।
- यदि इन सुधारों को भारत के अन्य विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों में भी व्यापक रूप से अपनाया जाता है, तो यह अधिक समावेशी, न्यायसंगत और भविष्य के लिए तैयार उच्च शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। साथ ही, इससे यह सुनिश्चित होगा कि भर्ती प्रक्रिया उम्मीदवारों की वास्तविक क्षमता, कौशल और उपलब्धियों पर आधारित हो, न कि केवल वर्षों पूर्व की प्रवेश परीक्षा के प्रदर्शन पर।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न :
प्रश्न: भारत में प्रवेश परीक्षा के अंक/रैंक को अक्सर योग्यता का स्थायी मापदंड माना जाता है। चर्चा कीजिए कि व्यावसायिक भर्ती प्रक्रियाओं से इन प्रवेश-स्तरीय मापदंडों को हटाने से किस प्रकार सामाजिक समानता को बढ़ावा मिल सकता है तथा छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोवैज्ञानिक कल्याण में सुधार हो सकता है।
(15 अंक, 250 शब्द)
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