संदर्भ
भारत की ऊर्जा सुरक्षा वर्त्तमान में आयात पर अत्यधिक निर्भरता, भू-राजनीतिक संघर्षों और आंतरिक नीतिगत कमियों के कारण गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है।
निर्भरता और बाज़ार संबंधी संवेदनशीलता
- उच्च आयात निर्भरता: भारत अपनी तेल की आवश्यकता का लगभग 90% आयात करता है, जो मुख्य रूप से पश्चिम एशिया से आता है।
- आर्थिक विकास: भारत की अर्थव्यवस्था 6% से 8% की दर से बढ़ रही है, जिसके कारण तेल की मांग लगातार बढ़ रही है।
- आपूर्ति में व्यवधान: तेल आपूर्ति में एक दिन का भी व्यवधान राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा से संबंधित भू-राजनीतिक चुनौतियाँ
- पश्चिम एशिया में संघर्ष: ईरान–इज़राइल युद्ध के कारण हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद हो गया है, जो भारत की तेल और गैस आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है।
- अमेरिका का दबाव: रूस–यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदना शुरू किया। हालाँकि, अमेरिका ने भारत पर दबाव बनाने के लिए 50% टैरिफ लगाने की नीति अपनाई ताकि भारत इन खरीदों को बंद कर दे।
- ऊर्जा निर्णयों में कूटनीतिक प्रतिबंध: अंततः भारत ने अमेरिका के दबाव में सस्ते रूसी तेल की खरीद रोक दी, जो भारत की ऊर्जा कूटनीति को आकार देने वाली भू-राजनीतिक जटिलताओं को दर्शाता है।
- भविष्य की ऊर्जा व्यवस्थाओं में अनिश्चितता: हालाँकि अब अमेरिका वैश्विक आपूर्ति स्थिर करने के लिए भारत को फिर से रूसी तेल खरीदने का सुझाव दे रहा है, लेकिन भारत के पहले हटने के बाद रूस से भविष्य में मिलने वाली छूट (Discount) अनिश्चित बनी हुई है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बारे में
- भौगोलिक अवस्थिति: यह एक संकीर्ण समुद्री मार्ग है जो फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) से जोड़ता है।
- रणनीतिक महत्व: विश्व की लगभग 20% तेल आपूर्ति प्रतिदिन इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरती है।

- प्रमुख चोकपॉइंट (Major Chokepoint):
- यह वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए सबसे संकीर्ण और अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है।
- ऊर्जा सुरक्षा जोखिम (Energy Security Risk): यदि इस मार्ग में नाकेबंदी या व्यवधान होता है तो भारत के मुख्य तेल आयात मार्ग पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
- सीमावर्ती देश: यह जलडमरूमध्य उत्तर में ईरान और दक्षिण में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) तथा ओमान के बीच स्थित है।
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ऊर्जा क्षेत्र में घरेलू प्रबंधन संबंधी चुनौतियाँ
- कल्याण योजनाओं के विस्तार में आपूर्ति पक्ष की कमी: हालाँकि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के माध्यम से गरीब परिवारों तक LPG कनेक्शन का विस्तार किया गया है, लेकिन पर्याप्त आपूर्ति और भंडार सुनिश्चित करने पर पर्याप्त ध्यान न देने के कारण इसकी स्थिरता को लेकर चिंताएँ उत्पन्न हुई हैं।
- LPG आपूर्ति की उभरती समस्या: कई बाजारों में LPG की कमी की रिपोर्टें सामने आई हैं, जो ईंधन आपूर्ति प्रबंधन और वितरण प्रणाली की कमजोरियों को दर्शाती हैं।
- संचार में कमी: ईंधन की उपलब्धता के बारे में सरकारी संचार में देरी और अस्पष्टता ने अफवाहों और जमाखोरी को बढ़ावा दिया, जबकि आधिकारिक स्पष्टीकरण अपेक्षाकृत देर से आए।
- मूल्य निर्धारण की निष्पक्षता को लेकर चिंताएँ: हालाँकि सरकार वैश्विक कीमतों में वृद्धि से उपभोक्ताओं को बचाने का प्रयास करती है, लेकिन पहले अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में गिरावट का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुँचाया गया, जिससे मूल्य निर्धारण की पारदर्शिता पर सवाल उठे।
आगे की राह
- ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण: भारत को अपनी ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों को विभिन्न क्षेत्रों में विविध करना चाहिए ताकि किसी एक भू-राजनीतिक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो सके।
- रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves): आपातकालीन आपूर्ति संकट से निपटने के लिए देश को भंडारण क्षमता को मजबूत करने की आवश्यकता है।
- ऊर्जा नीति ढाँचा: सरकारी नीतियों में उपभोक्ता पहुँच के विस्तार (जैसे LPG कनेक्शन) को पर्याप्त आपूर्ति श्रृंखला और भंडारण क्षमता के साथ संतुलित करना चाहिए।
- वैकल्पिक ऊर्जा कार्यक्रम: एथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blending) जैसे कार्यक्रमों का विस्तार किया जाना चाहिए, क्योंकि वर्त्तमान प्रयास ऊर्जा सुरक्षा की व्यापक चुनौती को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
निष्कर्ष
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए ऊर्जा आयात का विविधीकरण, रणनीतिक भंडार का विस्तार और मजबूत घरेलू ऊर्जा प्रबंधन को मिलाकर एक संतुलित रणनीति अपनाना आवश्यक है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: पश्चिम एशिया में बढ़ता संकट भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताओं को पुन: गति प्रदान कर रहा है, क्योंकि भारत आयातित कच्चे तेल पर अत्यधिक निर्भर है और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का रणनीतिक महत्व है। इस क्षेत्र में आपूर्ति में व्यवधान के संभावित आर्थिक प्रभावों का मूल्यांकन कीजिए और भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए कौन-कौन से उपाय अपना सकता है, इस पर चर्चा कीजिए।
(15 अंक, 250 शब्द)
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