संदर्भ
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की पाठ्यपुस्तक में न्यायिक भ्रष्टाचार के संदर्भों पर असंतोष व्यक्त किया।
पृष्ठभूमि
- न्यायिक भ्रष्टाचार के संदर्भों पर आपत्ति: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा प्रकाशित कक्षा 8 की एक पाठ्यपुस्तक में न्यायिक भ्रष्टाचार पर चर्चा किए जाने पर असंतोष व्यक्त किया।
- लेखकों के विरुद्ध निर्देश: न्यायालय ने आदेश दिया कि इस पाठ्यपुस्तक के लेखकों को भविष्य में किसी भी स्कूल पाठ्यक्रम या पाठ्यपुस्तक की तैयारी में स्थायी रूप से भाग लेने से प्रतिबंधित किया जाए।
- विषय विशेषज्ञता (Domain Expertise): न्यायालय ने सुझाव दिया कि भविष्य में न्यायपालिका से संबंधित विषय-वस्तु लिखते समय विषय विशेषज्ञों, जैसे वरिष्ठ न्यायाधीशों, की भागीदारी सुनिश्चित की जाए ताकि विषय-वस्तु की यथार्थता बनी रहे।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की आलोचना
- अनुपातहीन कार्रवाई का आरोप: आलोचकों ने इस आदेश को “न्याय का दुरुपयोग” बताया और कहा कि यह एक व्यापक कदम है जो पाठ्यपुस्तक लेखकों को अनुचित रूप से निशाना बनाता है।
- पाठ्यपुस्तक निर्माण प्रक्रिया पर प्रश्न: इस निर्णय को पाठ्यपुस्तक तैयारी में शामिल व्यापक शैक्षिक प्रक्रिया को कमजोर करने वाला माना जाता है।
मुख्य मुद्दा – शिक्षा में निष्पक्षता
- पक्षपात पर चयनात्मक चिंता: आलोचकों का तर्क है कि न्यायालय ने केवल वहाँ हस्तक्षेप किया जहाँ न्यायपालिका की छवि प्रभावित थी, जबकि NCERT पाठ्यक्रम में वस्तुनिष्ठता से जुड़े व्यापक मुद्दों को अनदेखा किया गया।
- असमान मानकों की धारणा: चयनात्मक हस्तक्षेप से यह धारणा बन सकती है कि न्यायिक कार्रवाई शक्तिशाली संस्थानों की रक्षा के लिए है, न कि शिक्षा की समग्र गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए।
- जनविश्वास पर प्रभाव: असंगत प्रतिक्रियाएँ नागरिकों के बीच न्यायपालिका और स्कूल पाठ्यक्रम दोनों की विश्वसनीयता पर विश्वास को कमजोर कर सकती हैं।
निष्पक्षता से संबंधित कथित उदाहरण
- विज्ञान की पाठ्यपुस्तकें: कुछ पाठ्यपुस्तकों में वैज्ञानिक विषयों के साथ धार्मिक अनुष्ठानों को जोड़ा गया है, जैसे सौर ऊर्जा के अध्याय में “अर्घ्यम(Arghyam)” (सूर्य को जल अर्पित करना) की व्याख्या।
- भूगोल की पाठ्यपुस्तकें: कक्षा 7 की भूगोल की किताब में भारतीय भूभाग को साक्ष्य-आधारित वैज्ञानिक विवरणों के बजाय “पवित्र स्त्रीत्व की उपस्थिति (sacred feminine presence)” के रूप में वर्णित किया गया है।
- इतिहास की पाठ्यपुस्तकें: कक्षा 8 के इतिहास (भाग-1) में मध्यकालीन मुस्लिम शासकों को एकसमान रूप से अत्याचारी दिखाया गया है, जबकि हिंदू शासकों को केवल वीरतापूर्ण रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे इतिहास के जटिल और संतुलित दृष्टिकोण की उपेक्षा होती है।
कोठारी आयोग (1964-66) का मानक – आदर्श/उपयुक्त पाठ्यपुस्तक के सिद्धांत
- आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देना: पाठ्यपुस्तकों को छात्रों में जिज्ञासा और प्रश्न पूछने की भावना विकसित करनी चाहिए।
- संवैधानिक मूल्यों को प्रोत्साहित करना: शिक्षा को न्याय, समानता, शांति और सामाजिक सद्भाव जैसे मूल्यों को विकसित करना चाहिए।
- शैक्षणिक सत्यनिष्ठा बनाए रखना: भाषा और उद्देश्य स्पष्ट तथा निष्पक्ष होने चाहिए, तथा विचारधारात्मक पक्षपात के बजाय कौशल और विशेषज्ञता पर ध्यान देना चाहिए।
निष्कर्ष
पाठ्यक्रम से जुड़े मामलों में चयनात्मक न्यायिक हस्तक्षेप संस्थागत आत्म-सुरक्षा जैसा प्रतीत हो सकता है। शैक्षणिक स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों का सम्मान करते हुए संतुलित निगरानी आवश्यक है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: हाल ही में, सर्वोच्च न्यायालय ने NCERT पाठ्यपुस्तक में न्यायिक भ्रष्टाचार के संदर्भों को लेकर चिंता व्यक्त की। शैक्षणिक सामग्री में न्यायिक हस्तक्षेप से जुड़े संवैधानिक मुद्दों का विश्लेषण करें और इसके शैक्षिक स्वतंत्रता और संस्थागत स्वायत्तता पर पड़ने वाले प्रभावों की समीक्षा करें।
(15 अंक, 250 शब्द)
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