संदर्भ:
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की 2026 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में तालिबान द्वारा पोपी (अफीम) की खेती पर लगाए गए प्रतिबंध के बाद, म्याँमार अफगानिस्तान को पीछे छोड़ते हुए विश्व में अवैध अफीम का सबसे बड़ा स्रोत बन गया है।
वैश्विक अफीम केंद्र के रूप में म्याँमार के विकास के कारण
- तालिबान का अफीम प्रतिबंध: अप्रैल 2022 में अफीम पोपी की खेती पर तालिबान के प्रतिबंध के कारण अफगानिस्तान के अफीम उत्पादन में अनुमानित 93% की कमी आई, जिससे वैश्विक आपूर्ति में एक शून्य (अंतराल) उत्पन्न हो गया।
- पोपी की कृषि का विस्तार : म्याँमार में अवैध पोपी की खेती 2021 से 2023 के बीच लगभग 56% बढ़ी, जो लगभग 45,200 हेक्टेयर तक पहुँच गई।
- राजनीतिक अस्थिरता : 2021 के सैन्य तख्तापलट (military coup) और उसके बाद के गृहयुद्ध (civil conflict) ने राज्य के नियंत्रण को कमजोर कर दिया, जिससे अवैध मादक पदार्थों के उत्पादन तथा तस्करी नेटवर्क को विकास का अवसर मिला।
- जातीय सशस्त्र संगठन : मादक पदार्थों का उत्पादन मुख्य रूप से शान राज्य (Shan State) में केंद्रित है, जहाँ कई जातीय सशस्त्र समूह मादक पदार्थों की तस्करी के माध्यम से अपनी गतिविधियों का वित्तपोषण करते हैं।
- गोल्डन ट्रायंगल का पुनः विकास: गोल्डन ट्रायंगल अफीम, हेरोइन और सिंथेटिक दवाओं, विशेष रूप से मेथाम्फेटामाइन (याबा) के उत्पादन के लिए विश्व के सबसे बड़े केंद्रों में से एक के रूप में पुनः उभरा है।
वैश्विक उत्पादन
- म्याँमार: म्याँमार वर्तमान में तालिबान के प्रतिबंध के बाद अफगानिस्तान की जगह लेते हुए अवैध अफीम का विश्व का सबसे बड़ा स्रोत है।
- अफगानिस्तान: हालाँकि उत्पादन में तेजी से गिरावट आई है, लेकिन प्रतिबंध से पहले के बड़े अफीम स्टॉक (stockpiles) के कारण गोल्डन क्रेसेंट अभी भी एक महत्त्वपूर्ण तस्करी गलियारा बना हुआ है।
- प्रमुख अवैध उत्पादन क्षेत्र
- गोल्डन ट्रायंगल: म्याँमार, लाओस और थाईलैंड
- गोल्डन क्रेसेंट: अफगानिस्तान, पाकिस्तान और ईरान
- भारत की स्थिति : गोल्डन ट्रायंगल और गोल्डन क्रेसेंट के बीच अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण, भारत अवैध नशीले पदार्थों के लिए एक प्रमुख पारगमन (transit) और गंतव्य देश के रूप में उभरा है।
भारत की आंतरिक सुरक्षा पर प्रभाव
- पूर्वी सीमा गलियारा: राष्ट्रीय राजमार्ग-102 के माध्यम से जुड़ा मणिपुर गलियारा भारत में हेरोइन और मेथाम्फेटामाइन की तस्करी का मुख्य भूमि मार्ग बन गया है।
- मिजोरम मार्ग : मादक पदार्थ चम्फाई (मिजोरम) के रास्ते भी प्रवेश करते हैं, और इसके बाद असम तथा भारत के आंतरिक हिस्सों की ओर बढ़ते हैं।
- छिद्रित सीमा: बिना बाड़ वाली सीमाएँ, कठिन भूभाग और सीमापार के जातीय संबंध नशीले पदार्थों की अवैध आवाजाही को सुगम बनाते हैं।
- फ्री मूवमेंट रिजीम – FMR: FMR के तहत सीमावर्ती समुदायों की आवाजाही का तस्करी नेटवर्क द्वारा तेजी से दुरुपयोग किया गया है।
- ड्रोन-आधारित तस्करी: पंजाब सीमा पर मानव रहित हवाई वाहनों (UAVs) के माध्यम से सीमापार मादक पदार्थों की तस्करी में अत्यधिक वृद्धि हुई है।
- समुद्री तस्करी: ड्रग सिंडिकेट गुजरात और महाराष्ट्र के तटों के माध्यम से नशीले पदार्थों के परिवहन के लिए मछली पकड़ने वाले जहाजों और छोटी तटीय नावों का तेजी से उपयोग कर रहे हैं।
- राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा: नशीली दवाओं की तस्करी संगठित अपराध, टेरर फंडिंग, मनी लॉन्ड्रिंग, सीमा पार उग्रवाद तथा नशीली दवाओं की लत को बढ़ावा देती है, जिससे एक बहुआयामी आंतरिक सुरक्षा चुनौती उत्पन्न होती है।
प्रमुख क्षेत्र, मार्ग तथा अवधारणाएँ
- गोल्डन ट्रायंगल: म्याँमार, लाओस और थाईलैंड का त्रि-जंक्शन
- महत्त्व: अफीम, हेरोइन और मेथाम्फेटामाइन (याबा) के उत्पादन के लिए विश्व के सबसे बड़े केंद्रों में से एक।
- गोल्डन क्रेसेंट: स्थान – अफगानिस्तान, पाकिस्तान और ईरान।
- महत्त्व: पारंपरिक रूप से विश्व का सबसे बड़ा अफीम उत्पादक क्षेत्र और एक महत्त्वपूर्ण वैश्विक तस्करी गलियारा।
- याबा (Yaba): संरचना – एक सिंथेटिक दवा जिसमें मेथाम्फेटामाइन और कैफीन होता है।
- उत्पत्ति: गोल्डन ट्रायंगल में व्यापक रूप से निर्मित।
- एम्फ़ैटेमिन-टाइप स्टिमुलेंट्स – एटीएस: सिंथेटिक मनोप्रभावी (psychoactive) पदार्थ, जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करते हैं।
- उदाहरण: मेथाम्फेटामाइन, एम्फ़ैटेमिन और एमडीएमए (एक्स्टसी)।
- फ्री मूवमेंट रिजीम – FMR : मान्यता प्राप्त सीमावर्ती जनजातियों को निर्दिष्ट उद्देश्यों के लिए बिना वीजा के भारत-म्याँमार सीमा पार करने की अनुमति देता है।
- वर्तमान स्थिति: बढ़ती राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के कारण समीक्षा के अधीन है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न. विश्व के दो सबसे बड़े अवैध अफीम उत्पादक राज्यों से निकटता ने भारत की आंतरिक सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। नशीली दवाओं की तस्करी तथा अन्य अवैध गतिविधियों जैसे कि हथियारों की तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी के बीच संबंधों को स्पष्ट कीजिए। इसके खिलाफ कौन-से जवाबी उपाय किए जा सकते हैं, व्याख्या कीजिए?
(15 अंक, 250 शब्द)
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