NSO की 80वीं रिपोर्ट और भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति बदलता दृष्टिकोण

NSO की 80वीं रिपोर्ट और भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति बदलता दृष्टिकोण 1 May 2026

संदर्भ

राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (NSO) की 80वीं रिपोर्ट – भारत के बदलते ‘स्वास्थ्य-खोज व्यवहार’ (health-seeking behavior) को समझने के लिए एक महत्त्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है।

प्रमुख अवधारणाएँ:

  • आउट ऑफ पॉकेट एक्सपेंडिचर (OOPE): यह उस प्रत्यक्ष भुगतान को संदर्भित करता है, जो एक परिवार स्वास्थ्य देखभाल के लिए करता है जो बीमा द्वारा कवर नहीं किया जाता है। उच्च OOPE “चिकित्सा गरीबी जाल” का कारण बन सकता है, जहाँ स्वास्थ्य लागत परिवारों को गरीबी में धकेल देती है।
  • PFRA: इसका अर्थ है ‘प्रति हजार बीमारी की रिपोर्ट करने वाले व्यक्ति’ (Persons per Thousand Reporting Ailment), यह एक मापक है जिसका उपयोग यह ट्रैक करने के लिए किया जाता है कि कितने लोग सक्रिय रूप से बीमारी की रिपोर्ट करते हैं।
  • छिपी हुई रुग्णता (Hidden Morbidity): ऐतिहासिक रूप से, ग्रामीण आबादी सामाजिक कलंक या सस्ती चिकित्सा के अभाव के कारण टीबी या पोलियो जैसी बीमारियों को छिपाती थी।

NSO की 80वीं रिपोर्ट – प्रमुख निष्कर्ष

  • बढ़ती बीमारियों का विरोधाभास : बीमारियों की रिपोर्ट करने वाले लोगों के प्रतिशत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में रिपोर्टिंग 6.8% से बढ़कर 12.2% और शहरी क्षेत्रों में 9.1% से बढ़कर 14.9% हो गई। इस “विरोधाभास” का तात्पर्य यह नहीं है कि अधिक लोग बीमार हो रहे हैं, बल्कि यह है कि रिपोर्टिंग बढ़ी है क्योंकि लोग मदद माँगने के लिए अधिक इच्छुक हैं।
  • स्वास्थ्य बीमा में उछाल: मुख्य रूप से आयुष्मान भारत योजना के कारण, बीमा कवरेज महत्त्वपूर्ण रूप से बढ़ गया है। ग्रामीण कवरेज 12.9% से बढ़कर 45.5% हो गया, जबकि शहरी कवरेज 8.9% से बढ़कर 31.8% हो गया।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा: सरकारी अस्पतालों में भरोसा बढ़ रहा है क्योंकि निजी स्वास्थ्य सेवाएँ  अत्यधिक महंगी होती जा रही हैं।

मातृत्व स्वास्थ्य – NSO आँकड़ें

  • संस्थागत प्रसव (Institutional Deliveries): भारत में अस्पताल आधारित जन्मों की ओर भारी बदलाव देखा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में अब 95.6% संस्थागत प्रसव हो रहे हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आँकड़ा 97.8% है।
  • ग्रामीण भारत में प्रसव कहाँ होते हैं?
    • सरकारी अस्पताल: 66.8%
    • निजी अस्पताल: 33.2%
  • शहरी प्रसव हिस्सेदारी:
    • सरकारी अस्पताल: 47%
    • निजी अस्पताल: 53%

यह बदलाव क्यों हुआ? 

प्रमुख चालक:

  • बढ़ा हुआ सार्वजनिक निवेश: गांवों में ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ (स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों) की स्थापना ने रक्तचाप और मधुमेह जैसी स्थितियों के बेहतर निदान की अनुमति दी है।
  • महामारी विज्ञान संक्रमण (Epidemiological Transition): भारत संक्रामक रोगों (जैसे- मलेरिया) से गैर-संचारी रोगों (NCDs) (जैसे- मधुमेह) की ओर स्थानांतरित हो रहा है, जिन्हें दीर्घकालिक उपचार और अधिक चिकित्सक दौरों की आवश्यकता होती है, जिससे रिपोर्टिंग उच्च होती है।
  • निःशुल्क दवाएँ: सरकारी अस्पताल अब मुफ्त में बुनियादी दवाएँ और जाँच (diagnostics) प्रदान करते हैं, जिससे अधिक लोग औपचारिक देखभाल की तलाश करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।

अंतर्संबंध – स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था, SDGs

  • अमर्त्य सेन का क्षमता दृष्टिकोण: स्वस्थ व्यक्ति “सक्षम” व्यक्ति होते हैं; एक बीमार मजदूर अर्थव्यवस्था में योगदान नहीं दे सकता।
  • SDG 3: सभी के लिए बेहतर स्वास्थ्य और कल्याण।
  • SDG 1: गरीबी की समाप्ति (OOPE को कम करना परिवारों को वापस गरीबी में जाने से रोकता है)।

विद्यमान चुनौतियाँ:

  • उच्च आउट ऑफ पॉकेट खर्च (OOPE): बीमा के बावजूद, उन्नत स्वास्थ्य देखभाल के लिए अक्सर महंगे निजी क्षेत्र के दौरे की आवश्यकता होती है।
  • क्षमता की कमी: सरकारी अस्पताल अत्यधिक भीड़भाड़ (कभी-कभी एक बिस्तर पर दो मरीज) और डॉक्टरों की भारी कमी का सामना करते हैं।
  • विखंडित शासन : स्वास्थ्य एक ‘राज्य का विषय’ है, जिससे भारी असमानताएँ उत्पन्न होती हैं; उदाहरण के लिए, केरल में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली बिहार की तुलना में अधिक उन्नत है।

आगे की राह

  • वित्तपोषण विस्तार: स्वास्थ्य व्यय GDP के 2.5% तक पहुँचना चाहिए (वर्तमान में यह 1.9% से 2.1% के बीच बदलता रहता करता है)।
  • निजी लागतों को विनियमित करें: सरकारों को निजी अस्पतालों द्वारा उपचार के लिए लिए जाने वाले शुल्क की सीमा (cap) निर्धारित करने के लिए नियम लागू करने चाहिए।
  • डिजिटल स्वास्थ्य का लाभ उठाएँ: दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचने के लिए ई-संजीवनी (टेलीकंसल्टेशन) और ABHA आईडी (डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड) जैसे उपकरणों का उपयोग करें।
  • सामुदायिक भागीदारी: जागरूकता विस्तार और स्थानीय जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए पंचायतों और आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं को शामिल करना महत्त्वपूर्ण है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: NSO की 80वीं रिपोर्ट द्वारा प्रकट स्वास्थ्य-खोज व्यवहार और बीमा कवरेज में वृद्धि के बावजूद, ‘आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च’ (OOPE) भारत की स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली के लिए एक महत्त्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है। उन कारणों का विश्लेषण कीजिए, जिनके चलते बीमा कवरेज के विस्तार के बावजूद OOPE बना हुआ है, और इस चुनौती से निपटने के लिए व्यापक उपाय सुझाइए।

(15 अंक, 250 शब्द)

Follow Us

Explore UPSC Foundation Course

Need help preparing for UPSC or State PSCs?

Connect with our experts to get free counselling & start preparing

Aiming for UPSC?

Download Our App

      
Quick Revise Now !
AVAILABLE FOR DOWNLOAD SOON
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध
Quick Revise Now !
UDAAN PRELIMS WALLAH
Comprehensive coverage with a concise format
Integration of PYQ within the booklet
Designed as per recent trends of Prelims questions
हिंदी में भी उपलब्ध

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.