भारत में सुरक्षा कवच के बिना कार्यबल और श्रमिक दिवस

भारत में सुरक्षा कवच के बिना कार्यबल और श्रमिक दिवस 1 May 2026

संदर्भ

प्रत्येक वर्ष 1 मई को, विश्व उचित मजदूरी, सुरक्षित कार्यशील परिस्थितियों और काम पर गरिमा जैसे अधिकारों के लिए श्रमिकों के ऐतिहासिक संघर्षों को सम्मान देने के लिए ‘अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस’ मनाता है।

प्रमुख अवधारणा

  • निर्वाह मजदूरी -> न्यूनतम मजदूरी
    • निर्वाह मजदूरी : यह एक श्रमिक के लिए गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए आवश्यक मजदूरी को संदर्भित करता है, जिसमें उच्च किराया, एलपीजी सिलेंडर और शिक्षा जैसी आधुनिक लागतें शामिल हैं।
    • न्यूनतम मजदूरी: यह सरकार द्वारा निर्धारित वैधानिक आधार मूल्य या भुगतान का न्यूनतम स्तर है। विशेषज्ञों का तर्क है कि दिल्ली-एनसीआर जैसे क्षेत्रों में वर्तमान न्यूनतम मजदूरी निर्वाह मजदूरी के मानकों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है।

मई दिवस – एक निदान, उत्सव नहीं 

मई दिवस क्या है?

मई दिवस 1 मई, 1886 को शिकागो, अमेरिका में श्रमिकों द्वारा एक विशाल विरोध प्रदर्शन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। श्रमिक सुरक्षित कामकाजी परिस्थितियों और प्रति दिन काम की 8 घंटे की सीमा की माँग कर रहे थे।

हालिया घटनाएँ: हाल की दो घटनाओं ने श्रम बल के निरंतर संघर्षों को रेखांकित किया है:

  1. नोएडा गारमेंट हड़ताल (10 अप्रैल, 2026)
  2. छत्तीसगढ़ में वेदांता बॉयलर ब्लास्ट

किसी भी श्रम कानून की दो कसौटियाँ? किसी भी श्रम कानून का मूल्यांकन दो मूलभूत प्रश्नों के आधार पर किया जाना चाहिए:

  1. क्या श्रमिक गरिमायुक्त जीवन जीने के लिए पर्याप्त आय अर्जित कर रहा है?
  2. क्या श्रमिक को सुरक्षित कार्यशील परिस्थितियाँ प्रदान की गई हैं?

केस स्टडी I: नोएडा गारमेंट हड़ताल

  • घटना: 
    • होजरी और परिधान (garment) क्षेत्र के हजारों श्रमिक विरोध में सड़कों पर उतर आए, जिससे पत्थरबाजी की घटनाएँ हुईं और भारी सुरक्षा कार्रवाई की गई।
  • कारण – हरियाणा बनाम उत्तर प्रदेश
    • हड़ताल मजदूरी में असमानता के कारण हुई थी; पड़ोसी राज्य हरियाणा ने अपनी न्यूनतम मजदूरी बढ़ा दी थी, जबकि उत्तर प्रदेश (UP) ने नहीं। श्रमिकों ने माँग की, कि उनकी न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर ₹20,000 प्रति माह की जाए।
  • परिणाम: उत्तर प्रदेश सरकार ने 1,200 से अधिक रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों को तैनात किया। अंततः, सरकार को अकुशल श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर ₹13,690 और कुशल श्रमिकों के लिए ₹16,868 करने के लिए बाध्य होना पड़ा।

वेदांता बॉयलर ब्लास्ट

  • त्रासदी: छत्तीसगढ़ में वेदांता संयंत्र में एक भीषण बॉयलर विस्फोट तब हुआ, जब श्रमिक दोपहर का भोजन कर रहे थे, जिसके परिणामस्वरूप 20 से अधिक श्रमिकों की मौत हो गई।
  • मूल कारण:
    • रखरखाव का अभाव: कंपनी बॉयलर पर नियमित सुरक्षा जाँच करने में विफल रही।
    • श्रम बल का अनौपचारिकीकरण : अधिकांश पीड़ित प्रत्यक्ष कर्मचारियों की बजाय अनुबंध श्रमिक थे। कंपनियाँ अक्सर कठोर श्रम नियमों और विनियमों से बचने के लिए इस “अनौपचारिकीकरण” रणनीति का उपयोग करती हैं।

4 नई श्रम संहिताएँ

सरकार ने पिछले कानूनों (जैसे- कारखाना अधिनियम, 1948) को चार नई संहिताओं में समेकित किया है: मजदूरी पर संहिता (Code on Wages), औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता, और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य तथा कार्यस्थिति संहिता

जहाँ सरकार इसे समेकन के रूप में देखती है, वहीं आलोचकों का मानना है कि यह कई तरह से श्रमिक सुरक्षा को कमजोर करता है:

  • हायर एंड फायर नीति : पहले, 100 से अधिक श्रमिकों वाले कारखानों को कर्मचारियों को निकालने के लिए सरकारी अनुमति की आवश्यकता होती थी। नए कोड ने इस सीमा को बढ़ाकर 300 श्रमिक कर दिया है, जिससे नियोक्ताओं को बिना किसी निरीक्षण के कर्मचारियों को निकालने की अधिक स्वतंत्रता मिल गई है।
  • कारखाने की परिभाषा बदली गई: ‘कारखाना’ क्या है, इसके मानदंड संकुचित कर दिए गए हैं।
    • बिजली का उपयोग करने वाली इकाइयों के लिए, श्रमिक सीमा 10 से बढ़ाकर 20 कर दी गई।
    • बिजली का उपयोग न करने वाली इकाइयों के लिए, सीमा 20 से बढ़ाकर 40 कर दी गई।
    • संदर्भ: इस बदलाव का अर्थ है, कि हजारों छोटी कपड़ा, धातु और होजरी इकाइयाँ अब कानूनी रूप से कारखानों के रूप में वर्गीकृत नहीं हैं, जिससे उन्हें विभिन्न सुरक्षा और श्रम नियमों से छूट मिल गई है।
  • स्व-प्रमाणन और निरीक्षण: “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” को बेहतर बनाने के लिए, सरकार ने ‘इंस्पेक्टर राज’ को स्व-प्रमाणन मॉडल से बदल दिया। कारखाना मालिक अब अपने स्वयं के अनुपालन को प्रमाणित करते हैं, जबकि निरीक्षक केवल “सुविधा प्रदाता” बनकर रह गए हैं।
  • हड़ताल पर प्रतिबंध: ‘फ्लैश स्ट्राइक’ (तत्काल विरोध) अब प्रतिबंधित हैं। श्रमिकों को हड़ताल करने के लिए 60 दिन पहले नोटिस देना होगा। इसके अतिरिक्त, यदि 50% से अधिक श्रमिक एक साथ “सामूहिक अवकाश” लेते हैं, तो इसे कानूनी रूप से हड़ताल माना जाता है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: “श्रम कानूनों का हालिया चार संहिताओं (codes) में समेकन मौलिक श्रमिक सुरक्षा और सुरक्षा प्रोटोकॉल की कीमत पर ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को प्राथमिकता देता प्रतीत होता है।” हाल के औद्योगिक विरोधों और दुर्घटनाओं के आलोक में इस कथन का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।

(15 अंक, 250 शब्द)

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