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सुधार/रिफॉर्म्स 3.0 – भारत की विकास दर की ओर

सुधार/रिफॉर्म्स 3.0 – भारत की विकास दर की ओर 30 Jun 2026

संदर्भ:

भारत के आर्थिक सुधारों के अगले चरण को एक AI-संचालित राष्ट्र के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जिसमें निरंतर उच्च आर्थिक विकास, तकनीकी नेतृत्व तथा राष्ट्रीय परिवर्तन प्राप्त करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीकी का लाभ उठाया जा सके।

सुधार/रिफॉर्म्स 3.0 के बारे में :

  • AI-नेतृत्व आधारित विकास : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को 1991 के आर्थिक उदारीकरण के समान एक परिवर्तनकारी अवसर के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो 8% और उससे अधिक की “भारत की विकास अथवा संवृद्धि दर” को प्राप्त करने में सक्षम है।
  • लीपफ्रॉगिंग मॉडल : भारत ने पहले आधार, UPI और जियो के माध्यम से पारंपरिक विकास मार्गों को पीछे छोड़ते हुए बड़े पैमाने पर डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) के निर्माण की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।
  • रणनीतिक अवसर : भारत का AI संक्रमण एक और “व्हाट्सएप मोमेंट” (WhatsApp moment) का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ समय पर किए गए सुधार अर्थव्यवस्था को मौलिक रूप से नया आकार दे सकते हैं।

भारत की डिजिटल सफलता का परिदृश्य :

  • आधार (Aadhar): भारत ने विश्व की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली बनाई, जिसमें 1.38 बिलियन से अधिक लोग शामिल हैं।
  • UPI क्रांति : यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) वार्षिक रूप से लगभग 250 बिलियन के ट्रांजेक्शन को पूर्ण करता है, जो वैश्विक रीयल-टाइम डिजिटल भुगतान का लगभग 50% है।
  • किफायती डेटा : रिलायंस जियो ने मोबाइल डेटा लागत को नाटकीय रूप से कम कर दिया, जिससे इंटरनेट पहुँच सस्ती हो गई और डिजिटल समावेशन संभव हुआ।
  • प्रतिकृति मॉडल: भारत को ओपन मॉडल (open models), विविधीकृत कंप्यूटिंग अवसंरचना तथा कम लागत वाले AI टोकन के माध्यम से AI के लिए, आधार-UPI-जियो मॉडल को दुहराना चाहिए।

AI निवेश की आवश्यकता:

  • कम आरएंडडी (R&D) व्यय: भारत अनुसंधान और विकास (R&D) पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का केवल 0.65% व्यय करता है, जो चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, दक्षिण कोरिया और इज़राइल जैसे देशों से अत्यंत कम है।
  • संज्ञान (Cognition) आधारित सब्सिडी : भारत को कैलोरी, रसायनों और कार्बन को सब्सिडी देने से धीरे-धीरे AI-संचालित ज्ञान सृजन को सब्सिडी देने की ओर बढ़ना चाहिए।
  • किफायती निवेश: अग्रणी विश्वविद्यालयों, आरएंडडी संस्थानों और स्कूलों को निःशुल्क AI टोकन प्रदान करने पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का केवल 0.06% व्यय आएगा।
  • मानव पूँजी: निःशुल्क AI पहुँच वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को AI को एक दैनिक उत्पादकता भागीदार बनाकर बदल सकती है।

निःशुल्क AI टोकन का प्रस्ताव :

  • संस्थागत पहुँच : मुफ्त AI टोकन शुरू में शीर्ष 100 राष्ट्रीय आरएंडडी संस्थानों, 100 विश्वविद्यालयों और 5,000 स्कूलों को प्रदान किए जाने चाहिए।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी : भारत को पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौतों के माध्यम से AI निष्कर्ष क्षमता को सुरक्षित करने के लिए AWS, Google और Microsoft के साथ सहयोग करना चाहिए।
  • क्रॉस-सब्सिडीजेशन : उद्यम उपयोगकर्ता शैक्षिक तथा अनुसंधान संस्थानों के लिए मुफ्त AI पहुँच को वित्तपोषित कर सकते हैं।
  • विनियामक सक्षमता : दूरसंचार क्रांति की भाँति, सरकार को AI उपयोग को सीधे सब्सिडी देने की  बजाय आवश्यक नियम बनाने चाहिए।

संप्रभु AI अवसंरचना :

  • घरेलू होस्टिंग: भारत को पूरी तरह से विदेशी एपीआई (APIs) पर निर्भर रहने की बजाय संप्रभु अवसंरचना पर बिग लॉर्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) का प्रयोग करना चाहिए।
  • हाइब्रिड रणनीति : भारत को सर्वम (Sarvam) जैसे स्वदेशी मॉडलों को लामा (Llama), कवेन (Qwen), डीपसीक (DeepSeek) और किमी (Kimi) जैसे ओपन-सोर्स मॉडल्स के साथ जोड़ना चाहिए।
  • रणनीतिक क्षमता: AI अवसंरचना को अंतरिक्ष और परमाणु कार्यक्रमों के समान एक राष्ट्रीय रणनीतिक परिसंपत्ति के रूप में माना जाना चाहिए।
  • ओपन-सोर्स के लाभ : ओपन मॉडल डिजिटल संप्रभुता में सुधार, लागत में कमी, भारतीय भाषा अनुकूलन को सक्षम करते हैं तथा पारदर्शिता बढ़ाते हैं।

राष्ट्रीय AI क्षमता का निर्माण :

  • परिचालन क्षमता : LLMs की मेजबानी के लिए उच्च उपलब्धता, निम्न विलंबता, सुरक्षा, ऊर्जा दक्षता और डेटा प्रवसन में विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।
  • राष्ट्रीय अवसंरचना : भारत को केवल विदेशी AI प्लेटफॉर्म्स का उपभोग करने की बजाय राष्ट्रीय स्तर पर AI सेवाओं के संचालन में विशेषज्ञता विकसित करनी चाहिए।
  • डेटा संप्रभुता: संप्रभु होस्टिंग राष्ट्रीय सुरक्षा, सरकारी अनुप्रयोगों और दीर्घकालिक तकनीकी स्वतंत्रता को सुदृढ़ करती है।

विविधीकृत कंप्यूट हार्डवेयर:

  • विक्रेता विविधीकरण: भारत को बहु-विक्रेता हार्डवेयर इकोसिस्टम अपनाकर एनवीडिया (NVIDIA) पर अत्यधिक निर्भरता से बचना चाहिए।
  • संतुलित वास्तुकला:
    • AWS ट्रेेनियम (AWS Trainium) और AMD का उपयोग करके 40%
    • Google TPUs का उपयोग करके 30%
    • NVIDIA GPUs का उपयोग करके 30%
  • रणनीतिक स्वतंत्रता: विविधीकरण विक्रेता लॉक-इन को कम करता है, लागत में कमी और प्रौद्योगिकी लचीलेपन में सुधार करता है।

राष्ट्रीय AI टोकन नीति :

  • नीतिगत फ्रेमवर्क: भारत को अगले 24 महीनों में कार्यान्वयन के साथ एक राष्ट्रीय AI टोकन नीति की घोषणा करनी चाहिए।
  • पायलट चरण: प्रारंभिक रोलआउट में शीर्ष 20 IITs, IISc, चयनित विश्वविद्यालय और 500 AI स्टार्टअप शामिल होने चाहिए।
  • स्कूली शिक्षा : AI साक्षरता का धीरे-धीरे कई राज्यों के 5,000 स्कूलों में विस्तार किया जाना चाहिए।
  • इंडिक AI (Indic AI): भारत को संप्रभु इंडिक AI बेंचमार्क का विकास, और सभी 22 अनुसूचित भाषाओं में AI परिनियोजन का समर्थन करना चाहिए।

अपेक्षित परिणाम:

  • नवाचार इकोसिस्टम: AI पहुँच 10,000 से अधिक AI-नेटिव स्टार्टअप के विकास को प्रोत्साहित कर सकती है।
  • क्षेत्रीय परिवर्तन : फाइन-ट्यून्ड AI मॉडल स्वास्थ्य सेवा, कृषि, न्यायपालिका और शिक्षा में सुधार कर सकते हैं।
  • आर्थिक विकास: बड़े पैमाने पर AI को अपनाना उत्पादकता, नवाचार और दीर्घकालिक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) विकास में महत्त्वपूर्ण सुधार कर सकता है।
  • वैश्विक नेतृत्व : भारत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को AI अवसंरचना के साथ जोड़कर AI अनुप्रयोगों में एक वैश्विक अग्रणी के रूप में उभर सकता है।

संबंधित चुनौतियाँ:

  • आरएंडडी निवेश : प्रमुख नवाचार अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत अनुसंधान और विकास में कम निवेश करना जारी रखता है।
  • अवसंरचना लागत : संप्रभु AI अवसंरचना के निर्माण के लिए कंप्यूट, डेटा सेंटर्स और ऊर्जा में महत्त्वपूर्ण निवेश की आवश्यकता होती है।
  • विक्रेता निर्भरता : विदेशी AI हार्डवेयर और क्लाउड प्रदाताओं पर अत्यधिक निर्भरता तकनीकी संप्रभुता को कमजोर कर सकती है।
  • कार्यान्वयन की जटिलता: सरकार, उद्योग, शिक्षाविदों और प्रौद्योगिकी कंपनियों के बीच समन्वय के लिए प्रभावी संस्थागत तंत्र की आवश्यकता होती है।

आगे की राह 

  • राष्ट्रीय AI मिशन : स्पष्ट कार्यान्वयन उपलब्धि के साथ, एक व्यापक राष्ट्रीय AI टोकन नीति शुरू करना।
  • आरएंडडी व्यय में वृद्धि : अनुसंधान, AI और नवाचार में सार्वजनिक तथा निजी निवेश को महत्त्वपूर्ण रूप से बढ़ाना।
  • ओपन मॉडल को बढ़ावा देना : ओपन-सोर्स AI, संप्रभु होस्टिंग और भारतीय भाषा AI इकोसिस्टम को प्रोत्साहित करना।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी को मजबूत करना: AI अवसंरचना विकास के लिए हाइपरस्केलर्स, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग करना।
  • स्वदेशी क्षमता का विकास: AI हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, मॉडल परिनियोजन तथा AI शासन में घरेलू विशेषज्ञता का निर्माण करना।

निष्कर्ष

सुधार 3.0 को सतत उच्च आर्थिक विकास और तकनीकी नेतृत्व प्राप्त करने के लिए, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, संप्रभु AI क्षमता, ओपन मॉडल, रणनीतिक निवेश और संस्थागत सुधारों को मिलाकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता को भारत के विकास के अगले स्तंभ के रूप में स्थापित करना चाहिए।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न. परीक्षण कीजिए, कि भारत किस प्रकार उभरती प्रौद्योगिकियों की ओर सब्सिडी को पुनर्निर्देशित करके अपने नवचार एवं विकास (R&D) बजट का कुशलतापूर्वक उपयोग कर सकता है|

(10 अंक, 150 शब्द)

सुधार/रिफॉर्म्स 3.0 – भारत की विकास दर की ओर

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