संदर्भ
भारत 2026 की जनगणना की तैयारी कर रहा है, जिसमें आगामी परिसीमन प्रक्रिया ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर चिंताओं को पुनः जीवित कर दिया है। जिन राज्यों ने परिवार नियोजन को सफलतापूर्वक लागू किया, उन्हें उच्च जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों के कारण संसद में अपना प्रतिनिधित्व समाप्त होने का भय है।
संवैधानिक जनादेश और ‘फ्रीज’ या ‘स्थिरता’
- अनुच्छेद 81: यह आवश्यक है, कि एक राज्य की जनसंख्या और लोकसभा में उसकी सीटों की संख्या के बीच का अनुपात “जहाँ तक व्यावहारिक हो, सभी राज्यों के लिए समान हो।”
- 1971 का आधार : प्रारंभ में, जनसंख्या वृद्धि समान थी। हालाँकि 1971 के बाद विकास दर में व्यापक भिन्नता उत्पन्न हुई।
- 84वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2002: अपनी जनसंख्या को नियंत्रित करने वाले राज्यों की रक्षा के लिए, सरकार ने 2026 के बाद पहली जनगणना होने तक सीटों की संख्या को ‘फ्रीज’ (स्थिर) कर दिया।
- उद्देश्य: यह फ्रीज एक ‘प्रेरक उपाय’ था, ताकि राज्य राजनीतिक शक्ति खोने के भय के बिना जनसंख्या स्थिरीकरण की दिशा में कार्य कर सकें।
प्रजनन क्षमता में भिन्नता (2005-2021)
चर्चा कुल प्रजनन दर (TFR)—एक महिला से पैदा होने वाले बच्चों की औसत संख्या—पर केंद्रित है। जनसंख्या को स्थिर करने के लिए 2.1 का TFR ‘प्रतिस्थापन स्तर’ आवश्यक है।
- शीघ्र उपलब्धि प्राप्त करने वाले राज्य: 2005 तक, 9 राज्य (तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक सहित) पहले ही 2.1 के स्तर पर पहुँच चुके थे, या उससे नीचे आ गए थे।
- देरी से उपलब्धि प्राप्त करने वाले राज्य: 2021 तक, 5 राज्यों (बिहार, उत्त प्रदेश, झारखंड, मेघालय और मणिपुर) को छोड़कर अधिकांश प्रमुख राज्य इस लक्ष्य तक पहुँच गए।
- अंतर: राष्ट्रीय प्रगति के बावजूद, औसत प्रजनन दर से ऊपर वाले राज्यों में जन्म दर अभी भी शीघ्र उपलब्धि प्राप्त करने वालों की तुलना में लगभग 45% अधिक है।
प्रस्तावित समाधान – ‘जनसांख्यिकीय प्रदर्शन’ (DemPer) मॉडल
- मौजूदा सीटों की रक्षा: वर्तमान 543 सीटों को अछूता रहना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी राज्य अपना प्रभाव का वर्तमान स्तर न खोए।
- प्रदर्शन-आधारित नई सीटें: “DemPer” सिद्धांत केवल विस्तार के बाद बनाई गई अतिरिक्त सीटों पर लागू होना चाहिए।
- नई सीटों के लिए वेटेज़ प्रणाली:
- 10% वेटेज़: “शीघ्र उपलब्धि हासिल करने वालों” (जिन्होंने 2005 से पहले 2.1 TFR का लक्ष्य हासिल किया) को दिया जाना चाहिए।
- 90% वेटेज़: 2005 से 2021 के बीच TFR में गिरावट की दर को महत्त्व दिया जाना चाहिए, उन राज्यों को पुरस्कृत करते हुए जिन्होंने सुधार के लिए सबसे अधिक प्रयास किए।
संघवाद और शासन को बनाए रखना
- निष्पक्ष उपलब्धि बनाम अनुचित आँकड़ें: लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है, कि लोकतंत्र केवल एक “संख्या का खेल” न बन जाए, जो सुशासन को दंडित करता है।
- विस्तार को सीमित करना: संसदीय चर्चा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए, लोकसभा का कुल आकार 700 सीटों से अधिक नहीं होना चाहिए।
- राष्ट्रीय एकता: यह ‘उत्तर बनाम दक्षिण’ का मुद्दा नहीं है। पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों ने भी जनसंख्या नियंत्रण को प्राथमिकता दी, तथा उन्हें भी प्रतिनिधित्व खोने का समान भय है।
निष्कर्ष
परिसीमन में प्रदर्शन-लिंक्ड मानदंडों को लागू करने से क्षेत्रीय असहमति कम होगी, तथा राज्यों के सामाजिक विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने संबंधी प्रोत्साहन सुरक्षित रहेंगे। जनसंख्या-आधारित प्रतिनिधित्व को क्षेत्रीय विकास के साथ संतुलित करना, सहकारी संघवाद के अस्तित्व के लिए आवश्यक है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न. “2026 की जनगणना के बाद आगामी परिसीमन अभ्यास में भारत में केंद्र-राज्य संबंधों तथा संघीय संतुलन को पुनः आकार देने की क्षमता है|” 84वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के आलोक में इस कथन पर चर्चा कीजिए, चुनौतियों का परीक्षण करते हुए आगे की राह सुझाइए।
(15 अंक, 250 शब्द)
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