संदर्भ
मार्च 2026 में पश्चिम एशिया युद्ध ने भारत में एलपीजी (LPG) की भारी कमी उत्पन्न कर दी। हालाँकि ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ में शिपिंग व्यवधान इसका तात्कालिक कारण था, लेकिन इस संकट ने भारत के प्रमुख स्वच्छ ऊर्जा कल्याण मॉडल में संरचनात्मक खामियों को उजागर कर दिया है।
सफलता तथा संवेदनशीलता
- प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY): एक दशक पुराने इस कार्यक्रम ने बीपीएल (BPL) परिवारों को 10.33 करोड़ कनेक्शन प्रदान किए, जिससे राष्ट्रीय कवरेज दुगुना हो गया तथा महिलाओं के दैनिक समय की महत्त्वपूर्ण बचत हुई।
- मिट्टी के तेल का प्रयोग: एलपीजी ने पुरानी सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के मिट्टी के तेल की जगह ले ली। हालाँकि मिट्टी के तेल की प्रणाली में ‘रिसाव’ था, लेकिन वह राज्य-नियंत्रित आपूर्ति थी। इसके विपरीत, एलपीजी बाजार पर निर्भर वस्तु है।
- आयात पर निर्भरता: भारत अपनी एलपीजी का 60% आयात करता है, जिसमें से 90% आयात संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।
ऊर्जा कल्याण में संरचनात्मक अंतराल
- बफर स्टॉक की कमी: कच्चे तेल (9.5 दिनों का रिजर्व) के विपरीत, भारत के पास कोई विशिष्ट सामरिक एलपीजी बफर नहीं है। राज्य के कल्याणकारी लक्ष्य वर्तमान में निर्बाध वैश्विक प्रवाह पर निर्भर हैं।
- संप्रभु गारंटी बनाम बाजार की वास्तविकता: हालाँकि यह योजना सरकारी ब्रांडिंग के साथ चलती है, लेकिन भौतिक बुनियादी ढाँचा और आपूर्ति शृंखला निजी/बाजार-संचालित बनी हुई है, जिससे वैश्विक संघर्षों के दौरान राज्य के पास बहुत कम नियंत्रण रह जाता है।
- ‘रिफिल’ की चुनौती: संकट से पूर्व भी, उच्च लागत का अर्थ था – 25% लाभार्थियों ने एक या कोई रिफिल नहीं लिया। बढ़ती कीमतों और अनिवार्य बुकिंग अंतराल (ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 45 दिन) ने गरीबों को वापस बायोमास (लकड़ी/उपले) की ओर जाने पर बाध्य कर दिया है।
सामाजिक और लैंगिक प्रभाव
- जातिगत असमानताएँ: स्थानीय पदानुक्रम को दर्शाने वाले वितरक नेटवर्क के कारण अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (SC/ST) परिवारों के लिए पहुँच 10% से 30% कम है।
- लैंगिक भार: हालाँकि महिलाएँ औपचारिक लाभार्थी हैं, लेकिन वैश्विक आपूर्ति पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है। जब एलपीजी विफल हो जाती है, तो बायोमास इकट्ठा करने के कठोर प्रयास विशेष रूप से महिलाओं पर वापस आ जाते हैं, जिससे वर्षों की ‘मुक्ति’ निष्फल हो जाती है।
प्रस्तावित नीतिगत हस्तक्षेप
- सामरिक भंडार: दो महीने का सामरिक एलपीजी बफर बनाना।
- विविध मार्ग: आयात का एक वैधानिक न्यूनतम भाग होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर के मार्गों से संचालित करना।
- विकेंद्रीकृत विकल्प: स्थानीय बैकअप प्रदान करने के लिए, निष्क्रिय संयंत्रों हेतु सब्सिडी के साथ गोबरधन (GOBARdhan) योजना को पुनर्जीवित करना।
- पाइप्ड गैस (PNG): सिलेंडरों पर दबाव कम करने के लिए, शहरों में पाइप्ड गैस के कार्यों में तेजी लाना।
निष्कर्ष
एक संधारणीय कल्याणकारी प्रणाली में विकल्प होना आवश्यक है। संकट प्रोटोकॉल या भौतिक बफर के बिना संवेदनशील वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं पर बना परिवर्तन एक वास्तविक ‘संप्रभु गारंटी’ नहीं माना जा सकता है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न. हाल के एलपीजी संकट ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसी योजनाओं के तहत कवरेज विस्तार के बावजूद कल्याणकारी वितरण में संरचनात्मक कमियों को उजागर किया है। संवेदनशील आबादी के लिए प्रभावी पहुँच और लचीलापन सुनिश्चित करने में, कल्याणकारी योजनाओं की सीमाओं का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
(15 अंक, 250 शब्द)
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