संदर्भ
तीव्र शहरीकरण, प्रदूषण और कमजोर शासन ने झीलों के व्यापक क्षरण को जन्म दिया है, जिससे जल सुरक्षा, जैव विविधता और सतत विकास के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।
झीलों का वैश्विक महत्त्व :
- सतह क्षेत्र बनाम जल आपूर्ति: जबकि झीलें पृथ्वी के केवल 4% भूमि क्षेत्र को कवर करती हैं, वे अविश्वसनीय रूप से महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि वे विश्व के स्वच्छ सतही जल का 90% हिस्सा प्रदान करती हैं।
- व्यापक प्रभाव: झीलों का लुप्त होना केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह समाज और अर्थव्यवस्था के पतन का कारण भी बनता है।
झील क्या है?
- झील भूमि से घिरा हुआ ठहरे हुए जल का एक बड़ा अंतर्देशीय निकाय है, जो या तो स्वच्छ या लवणीय हो सकता है और सीधे महासागर का भाग नहीं होता है।
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झीलों का महत्त्व
- भूजल पुनर्भरण : झीलें ‘स्पंज; के रूप में कार्य करती हैं। वर्षा का पानी उनमें इकट्ठा होता है और अंततः भूजल को पुनर्भरण करने के लिए नीचे रिसता है, जिसका उपयोग विभिन्न क्षेत्रों द्वारा किया जाता है।
- बाढ़ नियंत्रण : वे बाढ़ के खिलाफ एक बफर के रूप में कार्य करती हैं। स्रोतों के अनुसार, बंगलूरू और चेन्नई जैसे शहरों को भारी बाढ़ का सामना इसलिए करना पड़ा, क्योंकि उनके प्राकृतिक जल निकायों को नष्ट कर दिया गया था।
- जैव विविधता हॉटस्पॉट : चिल्का झील जैसी झीलें पक्षियों और जलीय जीवन की विभिन्न प्रजातियों के लिए महत्त्वपूर्ण आवास क्षेत्र के रूप में कार्य करती हैं।
- आजीविका और अर्थव्यवस्था: वे मछली पकड़ने वाले समुदायों और पर्यटन पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं का समर्थन करती हैं, जैसे कि कश्मीर में डल झील।
- सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्य: कई झीलें परंपराओं और अनुष्ठानों से जुड़ी हुई हैं, जैसे- अजमेर के पास पुष्कर झील।
झीलों की लुप्ति के प्राथमिक कारण
- प्रदूषण और सुपोषण: कृषि क्षेत्रों से बहने वाला पानी अपने साथ उर्वरक (पोषक तत्त्व) झीलों में ले जाता है। यह शैवाल प्रस्फुटन (अत्यधिक शैवाल विकास) को बढ़ाता है, जो पानी की सतह को ढक देते हैं, ऑक्सीजन को बाधित तथा जलीय जीवन का नष्ट करते हैं।
- अतिक्रमण और शहरीकरण: रियल एस्टेट डेवलपर्स अक्सर “लेक व्यू अपार्टमेंट्स” बनाने के लिए झीलों को सुखा देते हैं, जिससे वे उसी प्राकृतिक परिसंपत्ति को नष्ट कर देते हैं जिसका वे विपणन कर रहे हैं।
- अवैध खनन: झील के तल के भीतर रेत खनन उनकी प्राकृतिक जल धारण क्षमता को नष्ट कर देता है।
झीलों के संरक्षण के लिए विधिक और शासन संबंधी ढाँचा
- क्षेत्राधिकार: भारत में, जल एक राज्य का विषय है, जिसका अर्थ है कि उनकी सुरक्षा के लिए मुख्य रूप से राज्य सरकारें उत्तरदायी हैं।
- मौजूदा नियम: शासन ‘आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017’ और ‘पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986’ द्वारा निर्देशित होता है।
- विनियामक खामियाँ: वर्तमान नियम केवल अधिसूचित आर्द्रभूमि या रामसर स्थलों पर लागू होते हैं, जिससे अक्सर वन क्षेत्रों के भीतर स्थित झीलें बाहर रह जाती हैं।
- लोक न्यास सिद्धांत: ‘स्वच्छ एसोसिएशन बनाम महाराष्ट्र राज्य (2025)’ मामले में इसकी पुष्टि करते हुए कहा गया है, कि सरकार जल निकायों की केवल एक ट्रस्टी है, जबकि वास्तविक मालिक नागरिक हैं। यह सिद्धांत कृत्रिम झीलों पर भी लागू होता है।
लोक न्यास सिद्धांत (पब्लिक ट्रस्ट डॉक्ट्रिन) के बारे में
लोक न्यास सिद्धांत एक विधिक सिद्धांत, है जो यह मानता है कि जल निकाय, वन और वायु जैसे कुछ प्राकृतिक संसाधन राज्य द्वारा जनता के लिए विश्वास (trust) में रखे जाते हैं, जिन्हें निजी स्वामित्व या शोषण की बजाय सभी नागरिकों के लाभ के लिए संरक्षित और उपयोग किया जाना चाहिए। |
आगे की राह
- राष्ट्रीय शीर्ष निकाय: स्रोत ने झीलों के लिए एक उच्च-स्तरीय निकाय बनाने का सुझाव दिया है, जो राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के समान हो।
- व्यापक कानून: झील संरक्षण के लिए एक समान, व्यापक कानून की आवश्यकता है, जिसका पालन सभी राज्यों को करना चाहिए।
- वैज्ञानिक निगरानी: अवैध अतिक्रमण को वास्तविक समय में पहचानने और रोकने के लिए ड्रोन और वैज्ञानिक मानचित्रण जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग करना।
- जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD): एक ऐसी नीति लागू करना, जहाँ उद्योगों और कारखानों को झीलों में अनुपचारित अपशिष्ट छोड़ने से कठोरता से प्रतिबंधित किया जाए।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न: “शहरी झीलों का लुप्त होना केवल एक पारिस्थितिक संकट नहीं, बल्कि एंथ्रोपोसीन युग में पर्यावरणीय शासन की एक गंभीर विफलता है।” ‘लोक न्यास सिद्धांत’ पर सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय के आलोक में इस कथन का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।
(15 अंक, 250 शब्द)
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