मध्यम वर्ग की यात्रा

मध्यम वर्ग की यात्रा 6 Jun 2026

संदर्भ:

हाल ही में केंद्र सरकार ने एक विश्लेषणात्मक समीक्षा जारी की, जिसमें पिछले 12 वर्षों के दौरान भारत के मध्यम वर्ग में हुए संरचनात्मक परिवर्तन को रेखांकित किया गया है।

  • लक्षित नीतिगत सुधारों के प्रभाव से, यह वर्ग सावधानीपूर्वक खर्च करने वाले उपभोक्ताओं से बदलकर राष्ट्रीय उपभोग, उद्यमिता तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने वाली केंद्रीय शक्ति के रूप में उभरकर सामने आया है।

मध्यम वर्ग के परिवर्तन की परिभाषा एवं स्वरूप

  • आय मानदंड : विश्व बैंक के FY26 देश आय-वर्गीकरण के अनुसार, अर्थव्यवस्थाओं को प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI) के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया जाता है।
    • निम्न आय : ≤ 1,135 डॉलर
    • निम्न-मध्यम आय: 1,136–4,495 डॉलर
    • उच्च-मध्यम आय: 4,496–13,935 डॉलर
    • उच्च आय: > 13,935 डॉलर
  • जनसांख्यिकीय विस्तार: भारत का मध्यम वर्ग वर्ष 1995 से 2021 के बीच प्रतिवर्ष औसतन 6.3% की स्थिर दर से बढ़ा है और वर्तमान में यह देश की कुल जनसंख्या का लगभग 31% हिस्सा है। वर्ष 2011 से 2019 के बीच प्रति व्यक्ति GDP में 53% की वृद्धि के समर्थन से, आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) का अनुमान है कि वर्ष 2030 से 2035 के बीच भारत कुल मध्यम वर्गीय आबादी के मामले में चीन को पीछे छोड़ देगा।
  • उपभोक्ता शहर” परिघटना: विश्व आर्थिक मंच ( WEF) के अनुमानों के अनुसार, शहरी उपभोक्ता वृद्धि का 93% हिस्सा अब पारंपरिक टियर-1 महानगरों—जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और चेन्नई—से हटकर लगभग 500 उभरते हुए “उपभोक्ता शहरों” की ओर स्थानांतरित हो रहा है।
  • खर्च करने की क्षमता में वृद्धि: अनुमान है कि वर्ष 2036 तक मध्यम एवं समृद्ध वर्ग देश के कुल घरेलू उपभोग व्यय का 93% हिस्सा नियंत्रित करेंगे, जबकि यह हिस्सा वर्ष 2026 में 80% था। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2035 तक प्रमुख जनसांख्यिकीय समूहों—जैसे जनरेशन एक्स (Gen X), मिलेनियल्स और जनरेशन जेड (Gen Z)—के 20% से अधिक लोग प्रतिदिन 45 डॉलर या उससे अधिक खर्च करेंगे।

वित्तीय सुरक्षा और राजकोषीय सुधार

  • प्रत्यक्ष कर व्यवस्था में व्यापक सुधार: पुरानी कर व्यवस्था के व्यापक पुनर्गठन का परिणाम आयकर अधिनियम, 2025 के अधिनियमन के रूप में सामने आया, जो अप्रैल 2026 से प्रभावी हुआ। नई कर व्यवस्था के तहत कर-मुक्त आय सीमा वर्ष 2014 में ₹2.5 लाख से बढ़कर प्रतिवर्ष ₹12 लाख (मानक कटौती के माध्यम से वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए ₹12.75 लाख) हो गई है, जिससे लोगों की उपभोज्य आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

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  • अप्रत्यक्ष करों का एकीकरण: वर्ष 2017 में लागू होने के बाद से वस्तु एवं सेवा कर (GST) के अंतर्गत करदाताओं की संख्या 66.5 लाख से बढ़कर अप्रैल 2026 तक 1.64 करोड़ हो गई है। दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं पर कर दरों के युक्तिकरण ने मध्यम वर्ग के घरेलू उपभोग की टोकरी की लागत को संरचनात्मक रूप से कम किया है।

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  • सेवानिवृत्ति सुरक्षा को सुदृढ़ बनाना: अप्रैल 2025 में एकीकृत पेंशन योजना (UPS) के शुभारंभ ने केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को महंगाई से संबद्ध सुनिश्चित पेंशन प्रदान की है। इस योजना के तहत 10 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद न्यूनतम ₹10,000 प्रति माह पेंशन की गारंटी दी गई है, साथ ही इसमें महंगाई राहत तथा पारिवारिक पेंशन संबंधी सुरक्षा प्रावधान भी शामिल हैं।
  • बीमा और ऋण पहुँच का विस्तार: बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) की “2047 तक सभी के लिए बीमा” रूपरेखा से प्रेरित होकर, वित्त वर्ष 2024-25 में बीमा और पेंशन कोषों में संस्थागत बचत घरेलू वित्तीय परिसंपत्तियों का 29.6% तक पहुँच गई। इस प्रगति को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) में 26.88 करोड़, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) में 57.11 करोड़ तथा आयुष्मान भारत के अंतर्गत 43.52 करोड़ स्वास्थ्य कार्डों के व्यापक नामांकन से बल मिला है।
  • मौद्रिक संचरण और ब्याज दरों में नरमी: RBI की उदार मौद्रिक नीति के अनुरूप, जिसके तहत वर्ष 2026 तक रेपो दर घटाकर 5.25% कर दी गई, वर्ष 2015 से 2025 के बीच वाणिज्यिक उधारी की लागत में उल्लेखनीय कमी आई है।:
    • गृह ऋण : ब्याज दरें 9.5%–10.5% के उच्च स्तर से घटकर 7.35%–8.75% तक आ गई हैं।
    • शिक्षा ऋण: ब्याज दरों को युक्तिसंगत बनाते हुए 14.25% से घटाकर 9.4% कर दिया गया है।
    • व्यक्तिगत ऋण: ब्याज दरें 14.25% से घटकर 12.5% तक आ गई हैं।

शहरी अवसंरचना एवं स्थानिक संपर्कता

  • किफायती आवास पारिस्थितिकी तंत्र: सितंबर 2024 में शुरू की गई प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी (PMAY-U) 2.0 के तहत 1 करोड़ अतिरिक्त शहरी आवासों के निर्माण के लक्ष्य हेतु ₹8.76 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। साथ ही, स्वामी फंड (SWAMIH Fund) ने ₹49,500 करोड़ की पूँजी उपलब्ध कराकर 58,000 से अधिक रुकी हुई आवासीय इकाइयों को पूरा करने में सहायता की है। उल्लेखनीय है कि इसकी कुल क्षमता का 44% भाग विशेष रूप से निम्न एवं मध्यम आय वर्ग (LIG/MIG) के आवासों के लिए समर्पित है।

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  • जन-तीव्र परिवहन प्रणाली का विस्तार: भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क बन चुका है। मेट्रो ट्रैक निर्माण की गति, जो वर्ष 2014 से पहले मात्र 0.68 किमी प्रति माह थी, वर्ष 2026 में बढ़कर लगभग 6 किमी प्रति माह हो गई है। वर्तमान में 26 शहरों में मेट्रो सेवाएँ संचालित हो रही हैं, जिनकी दैनिक यात्री संख्या लगभग 1.15 करोड़ तक पहुँच गई है। इस विस्तार को मेक इन इंडिया पहल के अंतर्गत देश में निर्मित 2,100 से अधिक मेट्रो कोचों का समर्थन प्राप्त है।
  • रेलवे का आधुनिकीकरण: वित्त वर्ष 2025-26 में रेलवे के लिए पूंजीगत आवंटन बढ़कर ₹2.78 लाख करोड़ हो गया। सुरक्षा उन्नयन के तहत कवच (Kavach) स्वदेशी टक्कर-रोधी प्रणाली को लागू किया जा रहा है। 130 किमी प्रति घंटा से अधिक गति का समर्थन करने वाले रेल मार्गों का विस्तार बढ़कर 23,713 किमी तक पहुँच गया है। साथ ही, वंदे भारत स्लीपर और अमृत भारत ट्रेनों के माध्यम से अंतर-शहरी यात्रा को अधिक आधुनिक, तेज़ और सुविधाजनक बनाया गया है।

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  • नागरिक उड्डयन का लोकतंत्रीकरण: उड़ान (UDAN) योजना के अंतर्गत परिचालित हवाई अड्डों की संख्या वर्ष 2014 के 74 से बढ़कर वर्ष 2026 में 165 हो गई है। इसके साथ ही, डिजी यात्रा जैसी बायोमेट्रिक आधारित सुविधा के माध्यम से 38 हवाई अड्डों पर 9.3 करोड़ से अधिक यात्रियों को निर्बाध और संपर्क-रहित यात्रा अनुभव प्रदान किया गया है। वहीं, किफायती उड़ान यात्री कैफ़े की स्थापना ने हवाई यात्रा से जुड़े खर्चों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मूलभूत सुविधाएँ एवं पर्यावरणीय स्वच्छता

  • जल जीवन मिशन: घरेलू नल जल कनेक्शनों की संख्या में 390% से अधिक की वृद्धि हुई है। यह संख्या वर्ष 2019 में 3.23 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2026 में 15.85 करोड़ तक पहुँच गई है, जिससे करोड़ों परिवारों को सुरक्षित एवं नियमित पेयजल उपलब्ध हुआ है।
  • अपशिष्ट प्रबंधन: स्वच्छ भारत मिशन–शहरी (SBM-U) 2.0 के अंतर्गत शहरी ठोस अपशिष्ट के प्रसंस्करण की क्षमता वर्ष 2014 में नगण्य स्तर से बढ़कर वर्ष 2026 में 97% तक पहुँच गई है। इसके साथ ही, अटल मिशन फॉर रीजुवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (AMRUT) 2.0 के तहत शहरी क्षेत्रों में सीवेज उपचार क्षमता में 6,649 MLD (मिलियन लीटर प्रतिदिन) की वृद्धि की गई है, जिससे शहरी स्वच्छता और पर्यावरणीय गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
  • विद्युत आपूर्ति की विश्वसनीयता: सौभाग्य योजना जैसी सार्वभौमिक विद्युतीकरण पहलों के परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय ऊर्जा कमी घटकर मात्र 0.03% रह गई है। इसके फलस्वरूप शहरी क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता बढ़कर औसतन 23.4 घंटे प्रतिदिन हो गई है तथा प्रति व्यक्ति विद्युत खपत में 52.6% की वृद्धि होकर यह 1,460 किलोवाट-घंटे (kWh) तक पहुँच गई है।

स्वास्थ्य सेवा एवं मानव पूंजी उन्नयन

  • स्वयं के खर्च से होने वाले स्वास्थ्य व्यय (OOPE) में कमी: प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) के पुनर्गठन के तहत देशभर में 18,000 से अधिक जनऔषधि केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से आवश्यक दवाएँ बाज़ार मूल्य की तुलना में 50% से 80% तक कम कीमतों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे परिवारों को कुल मिलाकर लगभग ₹40,000 करोड़ की बचत हुई है।

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  • प्राथमिक स्वास्थ्य अवसंरचना: 1,85,555 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (AAMs) की स्थापना के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विस्तार किया गया है। इन केंद्रों पर अब तक 540 करोड़ से अधिक संचयी लाभार्थी आगमन दर्ज किए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप देश में स्वयं के खर्च से होने वाला स्वास्थ्य व्यय 60.6% से घटकर 39.4% रह गया है तथा सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) सूचकांक बढ़कर 63 तक पहुँच गया है।
  • महामारी विज्ञान संबंधी सुरक्षा तंत्र: सुदृढ़ संस्थागत व्यवस्थाओं के परिणामस्वरूप तपेदिक (TB) की घटनाओं में वर्ष 2015 से वर्ष 2024 के बीच 21% की कमी आई है, जबकि उपचार कवरेज बढ़कर 92% तक पहुँच गया है। वहीं, मलेरिया उन्मूलन हेतु राष्ट्रीय रणनीतिक योजना के अंतर्गत अपनाई गई गहन “जांच करो, उपचार करो, निगरानी रखो” रणनीति के कारण मलेरिया के मामलों और मृत्यु दर में 80% की कमी दर्ज की गई है। इसके परिणामस्वरूप भारत WHO के उच्च-भार वाले देशों के समूह से बाहर निकलने में सफल रहा है।
  • तृतीयक कैंसर उपचार अवसंरचना: तृतीयक कैंसर देखभाल केंद्र सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण योजना के माध्यम से देश में कैंसर उपचार अवसंरचना को व्यापक रूप से विकसित किया गया है। इसके अंतर्गत 20 राज्य कैंसर संस्थान (SCIs), 19 तृतीयक कैंसर देखभाल केंद्र (TCCCs) तथा 439 जिला कैंसर देखभाल कॉर्नर ( DCCCs) संचालित किए जा चुके हैं।

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  • निवारक आहार विनियमन: भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा वर्ष 2018 में शुरू किए गए “ईट राइट इंडिया” अभियान के अंतर्गत खाद्य सुरक्षा से संबंधित अग्रिम हस्तक्षेपों को लागू किया गया है। इसके तहत देशभर में 179 स्वच्छ स्ट्रीट फूड हब तथा 406 ईट राइट रेलवे स्टेशन प्रमाणित किए गए हैं, जिससे सुरक्षित, स्वच्छ और पोषणयुक्त खाद्य उपभोग को बढ़ावा मिला है।

शिक्षा, कौशल विकास एवं जमीनी स्तर की उद्यमिता

  • शैक्षणिक एकीकरण: समग्र शिक्षा कार्यक्रम के वर्ष 2018 से क्रियान्वयन ने देश के 14.71 लाख विद्यालयों में बिखरी हुई प्रशासनिक व्यवस्थाओं को एकीकृत किया है। इससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अंतर्गत अनिवार्य रूप से निर्धारित कौशल-उन्मुख पाठ्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने हेतु आवश्यक आधारभूत शैक्षणिक एवं संस्थागत अवसंरचना का निर्माण हुआ है।

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  • उच्च स्तरीय शैक्षणिक संस्थानों का विस्तार: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) की संख्या 16 से बढ़कर 23 हो गई है, जिससे छात्र नामांकन क्षमता दोगुनी होकर 1.35 लाख तक पहुँच गई है। साथ ही, चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य अवसंरचना का भी व्यापक विस्तार हुआ है। देश में 2,045 चिकित्सा महाविद्यालय तथा 23 संचालित या स्वीकृत अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य क्षेत्र में मानव संसाधन को सुदृढ़ बनाने के लिए 157 नए नर्सिंग कॉलेजों की स्थापना को भी समर्थन प्रदान किया गया है।
  • उच्च शिक्षा हेतु ऋण का लोकतंत्रीकरण: विद्या लक्ष्मी योजना, वर्ष 2024 के अंतर्गत 860 प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बिना संपार्श्विक और डिजिटल शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इसके साथ ही, ₹8 लाख से कम वार्षिक आय वाले परिवारों के विद्यार्थियों को 3% ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाती है, जिससे उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ और वहनीय बनाया जा सके।
  • घरेलू उच्च शिक्षा का अंतर्राष्ट्रीयकरण: UGC के संशोधित निर्देशों के आधार पर, प्रमुख वैश्विक संस्थानों (जैसे डीकिन यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ़ वोलोंगोंग, यूनिवर्सिटी ऑफ़ साउथेम्प्टन) ने GIFT सिटी और टियर-1 हब में अपने कैंपस शुरू किए हैं, जिससे विदेशी मुद्रा के बाहर जाने (आउटफ़्लो) को कम करने में मदद मिली है।
  • जमीनी स्तर पर पूँजी निर्माण: स्व-रोजगार को प्रोत्साहित करने तथा सूक्ष्म उद्यमों के जोखिम को कम करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के अंतर्गत ऋण सीमा बढ़ाकर ₹20 लाख कर दी गई है। वर्ष 2026 की शुरुआत तक इस योजना के तहत 57 करोड़ से अधिक संपार्श्विक-मुक्त ऋण वितरित किए जा चुके हैं, जिनका कुल मूल्य ₹40.07 लाख करोड़ से अधिक है। 

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: भारत का मध्यम वर्ग भविष्य की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख इंजन है, किंतु ‘मिसिंग मिडिल’ (Missing Middle) की समस्या के कारण यह वित्तीय रूप से असुरक्षित बना हुआ है। इस कथन का विश्लेषण कीजिए तथा मध्यम वर्ग को एक सुदृढ़ आर्थिक शक्ति में परिवर्तित करने के उपाय सुझाइए।

 (15 अंक, 250 शब्द)

मध्यम वर्ग की यात्रा

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