बांग्लादेश की सत्ता तथा भारत-विरोधी दृष्टिकोण

बांग्लादेश की सत्ता तथा भारत-विरोधी दृष्टिकोण 8 Apr 2026

संदर्भ:

बांग्लादेश के विदेश मंत्री की दिल्ली यात्रा (फरवरी 2026) के बाद से, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सरकार द्वारा पहली उच्च स्तरीय पहुँच का प्रतीक है।

  • सत्ता में आने के मात्र 50 दिनों के भीतर, यह 18 महीने के राजनयिक गतिरोध को समाप्त करने तथा द्विपक्षीय स्थिरता को पुनः स्थापित करने का प्रयास करता है।

पृष्ठभूमि – ठहराव से सक्रियता तक

  • अंतरिम शून्यता: शेख हसीना सरकार के पतन के बाद, मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम अवधि में द्विपक्षीय संबंधों में महत्वपूर्ण गिरावट देखी गई, जिसकी पहचान वीजा प्रतिबंधों, बाधित कनेक्टिविटी परियोजनाओं और राजनयिक प्रयासों से थी।
  • वास्तविक कार्य/रणनीति: इस बदलाव से पूर्व ‘बैकचैनल’ कूटनीति प्रारंभ हुई थी, जिसमें मार्च 2026 में बांग्लादेश के खुफिया प्रमुख (DGFI) और भारत के RAW/सैन्य खुफिया विभाग के बीच बैठक हुई, जिसके बाद भारत के उच्चायुक्त ने सकारात्मक दृष्टिकोण का संकेत दिया।
  • 2026 का बदलाव: BNP सरकार की चुनावी जीत ने संबंधों को केवल दिखावे के भारत-विरोधी दृष्टिकोण से हटाकर, आपसी सम्मान और गरिमा पर केंद्रित एक व्यावहारिक, हित-आधारित साझेदारी में बदल दिया है।

द्विपक्षीय उद्देश्यों के प्रमुख स्तंभ:

  • ऊर्जा सुरक्षा: बांग्लादेश पश्चिम एशियाई अस्थिरता के कारण गंभीर विद्युत संकट का सामना कर रहा है। ढाका के औद्योगिक अस्तित्व के लिए भारत से बिजली आपूर्ति और LNG पारगमन पर सहयोग महत्त्वपूर्ण है।
  • जल कूटनीति:
    • गंगा जल संधि: 30 वर्षों से कार्यरत यह संधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है, जिसके लिए तत्काल नवीनीकरण वार्ता की आवश्यकता है।
    • तीस्ता समझौता: 14 वर्षों से लंबित मुद्दा; इसका समाधान बांग्लादेश के लिए एक घरेलू राजनीतिक आवश्यकता बना हुआ है।
  • व्यापार और कनेक्टिविटी: व्यापार बाधाओं का सामान्यीकरण और वीजा सेवाओं की बहाली उन लाखों विद्यार्थियों, मरीजों और व्यापारियों के लिए आवश्यक है, जो भारतीय बुनियादी ढाँचे पर निर्भर हैं।
  • सीमा प्रबंधन: 4,156 किमी. लंबी सीमा साझा करते हुए, दोनों देश आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तस्करी, घुसपैठ और चरमपंथी आंदोलनों को रोकने का प्रयास करते हैं।

रणनीतिक महत्त्व और समुद्री सहयोग:

  • हिंद महासागर का ढाँचा: दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में प्रमुख हितधारक हैं। हिंद महासागर सम्मेलन में जुड़ाव ब्लू इकोनॉमी, समुद्री सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता में साझा हितों को उजागर करता है।
  • आर्थिक गणना: भारत बांग्लादेश का सबसे बड़ा क्षेत्रीय व्यापारिक भागीदार है। बांग्लादेश के ‘अल्पविकसित देश’ (LDC) का दर्जा छोड़ने और निर्यात-आधारित विकास को बनाए रखने के लक्ष्य के लिए, स्थिर संबंध महत्त्वपूर्ण हैं।

सुरक्षा चुनौतियाँ और चरमपंथ:

  • अल्पसंख्यक सुरक्षा: बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हालिया हमलों ने सांप्रदायिक सद्भाव और मानवाधिकारों के संबंध में चिंताएँ बढ़ा दी हैं।
  • आतंकवाद विरोधी: सीमा पार कट्टरपंथी इस्लामी संगठन दोनों देशों की लोकतांत्रिक परियोजनाओं के लिए खतरा उत्पन्न करते हैं।
  • शत्रु एजेंट: भारत ने बांग्लादेश को आगाह किया है, कि चरमपंथी नेटवर्क को सहन करने से पाकिस्तान की ISI जैसे शत्रु एजेंटों को अपनी पकड़ मजबूत करने के अवसर प्राप्त होते हैं।

विद्यमान चुनौतियाँ:

  • घरेलू राजनीति: भारतीय विधानसभा चुनाव और बांग्लादेश का आंतरिक दबाव, अक्सर द्विपक्षीय संबंधों के तापमान को निर्धारित करते हैं, जिससे अप्रवसन और संप्रभुता जैसे मुद्दे संवेदनशील बन जाते हैं।
  • संघीय बाधाएँ: तीस्ता समझौता घरेलू आम सहमति बनाने, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल सरकार को शामिल करने के मामले में अटका हुआ है।
  • विश्वास की कमी: वर्षों से संचित अविश्वास के कारण संस्थागत आत्मविश्वास के चरण-दर-चरण पुनर्निर्माण की आवश्यकता है।

आगे की राह

  • खुफिया जानकारी साझा करने का संस्थागतकरण: DGFI और RAW के बीच हालिया जुड़ाव आतंकवाद-विरोधी सहयोग का एक नियमित प्रतिरूप बनना चाहिए।
  • समयबद्ध संधि नवीनीकरण: किसी नए राजनयिक संकट से बचने के लिए, दिसंबर की समय-सीमा से पूर्व गंगा नदी संधि को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
  • कनेक्टिविटी और जन-संपर्क: कनेक्टिविटी परियोजनाओं को पुनः शुरू करना, और वीजा का मुक्त प्रवाह सुनिश्चित करना भारत-विरोधी भावना को कम करने के सबसे प्रभावी उपकरण हैं।
  • लोकलुभावनवाद पर कूटनीति: दोनों सरकारों को रणनीतिक हितों को घरेलू चुनावी चक्रों की अस्थिरता से सुरक्षित रखना चाहिए।

निष्कर्ष

BNP सरकार के पहले 50 दिन एक व्यावहारिक प्रयास का सुझाव देते हैं, जहाँ बांग्लादेश की स्थिरता भारत के साथ उसके संबंधों से अविभाज्य है। हालाँकि नवीन प्रयास वर्षों के अविश्वास को समाप्त नहीं कर सकतें, लेकिन ऊर्जा और जल कूटनीति के माध्यम से गति स्थापित करना इन बाधित संबंधओं को भविष्योन्मुखी साझेदारी में बदल सकता है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न. बांग्लादेश की स्थिरता भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के सुरक्षा प्रतिमान से जटिल रूप से जुड़ी हुई है। बांग्लादेश में हालिया राजनीतिक परिवर्तनों और सीमा पार सुरक्षा चुनौतियों के आलोक में इस कथन का विश्लेषण कीजिए।

(15 अंक, 250 शब्द)

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