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भूले जाने का अधिकार : गोपनीयता तथा न्याय व्यवस्था के बीच संतुलन

भूले जाने का अधिकार : गोपनीयता तथा न्याय व्यवस्था के बीच संतुलन 4 Jun 2026

संदर्भ: 

डिजिटल युग में ‘भूल जाने का अधिकार’ (RTBF) को लेकर बहस ने विशेष महत्त्व प्राप्त किया है, विशेषकर न्यायालयों के अभिलेखों की ऑनलाइन उपलब्धता से संबंधित हालिया न्यायिक टिप्पणियों के बाद।

भूले जाने के अधिकार का अर्थ

  • यह किसी व्यक्ति का वह अधिकार है जिसके तहत वह डिजिटल मंचों से अपनी पुरानी, अप्रासंगिक या उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने वाली व्यक्तिगत जानकारी को हटाने या उसकी पहुँच सीमित करने की मांग कर सकता है।

मूल संवैधानिक द्वंद्व 

  • ओपन जस्टिस:  न्यायिक कार्यवाहियाँ जनता के लिए सुलभ और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि न्यायपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित हो तथा न्यायालयों के प्रति जनविश्वास बना रहे।
  • सूचनात्मक गोपनीयता:  व्यक्तियों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी पर नियंत्रण रखने का अधिकार होना चाहिए, विशेषकर तब जब उसके प्रकटीकरण से उन्हें असंगत या अत्यधिक हानि पहुँचने की आशंका हो।

संवैधानिक आधार 

निजता का अधिकार:

  • सर्वोच्च न्यायालय ने जस्टिस के.एस. पुट्टास्वामी वाद  में निजता को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत एक मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता प्रदान की थी।

डिजिटल युग से संबंधित चुनौतियाँ 

  • स्थायी डिजिटल स्मृति:  भौतिक अभिलेखों के विपरीत, डिजिटल रिकॉर्ड लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं तथा उन्हें अनिश्चित काल तक आसानी से खोजा और प्राप्त किया जा सकता है।
  • सर्च इंजन प्रवर्धन:  सर्च इंजन प्रायः किसी जानकारी के केवल आंशिक या खंडित अंशों को प्रदर्शित करते हैं, जिससे उसका पूर्ण कानूनी या तथ्यात्मक संदर्भ सामने नहीं आ पाता।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं डेटा समेकन:  कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) किसी व्यक्ति के डिजिटल पदचिह्न को तीव्र गति से संकलित, एकीकृत और विश्लेषित कर सकती है, जिससे उसकी व्यक्तिगत जानकारी का व्यापक प्रोफाइल तैयार किया जा सकता है।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य

  • यूरोपीय संघ का दृष्टिकोण:  ‘गूगल स्पेन वाद’ के ऐतिहासिक निर्णय में डेटा संरक्षण के सिद्धांतों के अंतर्गत भूल जाने के अधिकार को मान्यता प्रदान की गई।
  • GDPR फ़्रेमवर्क:  जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (GDPR) कुछ परिस्थितियों में व्यक्तिगत डेटा को हटाने की सुविधा प्रदान करता है, साथ ही जनहित, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सूचना के अधिकार के साथ संतुलन बनाए रखने का प्रयास करता है।

न्यायालयों द्वारा रेखांकित प्रमुख मुद्दे

  • रिकॉर्ड अद्यतन करना पर्याप्त नहीं:  केवल न्यायालयी अभिलेखों को अद्यतन कर देना समस्या का पूर्ण समाधान नहीं है, क्योंकि पुरानी या अप्रासंगिक जानकारी सर्च इंजनों पर अब भी आसानी से दिखाई और खोजी जा सकती है, जिससे व्यक्ति की प्रतिष्ठा और निजता प्रभावित हो सकती है।
  • नाम-आधारित खोज संबंधी चिंताएँ:  केवल किसी व्यक्ति के नाम से खोज करने पर उसके संपूर्ण वाद-विवाद  इतिहास का आसानी से उपलब्ध हो जाना उसकी प्रतिष्ठा, सामाजिक छवि तथा शिक्षा, रोजगार और अन्य अवसरों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
  • तृतीय-पक्ष प्रतिकृति:  आधिकारिक अभिलेखों में संशोधन या सुधार किए जाने के बाद भी समाचार पोर्टल, कानूनी डेटाबेस और अन्य तृतीय-पक्ष मंच अक्सर उस जानकारी की प्रतिलिपियाँ सुरक्षित रखते हैं।

प्रतिवाद 

  • ओपन जस्टिस  के लिए चुनौती:  न्यायालयी अभिलेख सार्वजनिक दस्तावेज़ होते हैं और राज्य के आधिकारिक ऐतिहासिक अभिलेखों का हिस्सा बनते हैं। इनके हटाए जाने या पहुँच सीमित किए जाने से न्यायिक पारदर्शिता, जवाबदेही तथा खुले न्याय के सिद्धांत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
  • अपूर्ण जानकारी की समस्या:  वास्तविक समस्या अक्सर जानकारी की सार्वजनिक उपलब्धता नहीं, बल्कि तथ्यों की अपूर्ण, खंडित या संदर्भ-विहीन प्रस्तुति होती है, जिससे गलत धारणाएँ निर्मित हो सकती हैं और व्यक्ति की प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है।

आगे की राह 

  • संदर्भ-संपन्न खोज परिणाम:  सर्च इंजनों को मूल आरोपों के साथ-साथ बरी होने, मामले के अंतिम परिणाम तथा नवीनतम कानूनी घटनाक्रमों को भी प्रमुखता से प्रदर्शित करना चाहिए।
  • अभिलेखों का नियमित समन्वयन:  न्यायालयों, सर्च इंजनों और कानूनी भंडारों को अभिलेखों का समय-समय पर समन्वयन करना चाहिए, ताकि उपलब्ध जानकारी की शुद्धता, अद्यतनता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।
  • संतुलित नियामकीय ढाँचा:  ऐसी स्पष्ट कानूनी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए जो निजता के अधिकार, पारदर्शिता और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन स्थापित कर सके।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न:  डिजिटल युग में ‘भूले जाने का अधिकार’ और ‘ओपन जस्टिस व्यवस्था के सिद्धांत’ के बीच प्रत्यक्ष टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इसमें निहित जटिलताओं का परीक्षण कीजिए तथा इन दोनों मौलिक मूल्यों के बीच संतुलन स्थापित करने हेतु आगे की राह सुझाइए।

(15 अंक, 250 शब्द)

भूले जाने का अधिकार : गोपनीयता तथा न्याय व्यवस्था के बीच संतुलन

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