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भारत में ‘मासिक धर्म अवकाश’ का अधिकार

भारत में ‘मासिक धर्म अवकाश’ का अधिकार 16 Mar 2026

संदर्भ

हाल ही में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए अनिवार्य सवैतनिक मासिक धर्म अवकाश की माँग करने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया।

पृष्ठभूमि

  • याचिका में मांग: एक जनहित याचिका (PIL) में कार्यस्थल पर स्वास्थ्य और गरिमा का समर्थन करने के लिए सभी कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए, अनिवार्य सवैतनिक मासिक धर्म अवकाश की मांग की गई थी।
  • सर्वोच्च न्यायालय का अवलोकन: न्यायालय ने इस मांग को खारिज कर दिया और कहा, कि ऐसा जनादेश कार्यस्थलों में एक “मनोवैज्ञानिक भय” उत्पन्न कर सकता है, तथा महिलाओं को पुरुष-प्रधान कार्य वातावरण में कमतर महसूस करा सकता है।
  • अनपेक्षित परिणामों के बारे में चिंता: न्यायालय ने आगाह किया, कि नियोक्ता महिला कर्मचारियों को बार-बार होने वाली मासिक छुट्टी से जोड़ सकते हैं, जिससे भेदभावपूर्ण भर्ती प्रथाओं को बढ़ावा मिल सकता है।

परोपकारी लिंगवाद का जाल (The Trap of Benevolent Sexism)

  • परोपकारी लिंगवाद का अर्थ: लैंगिक पूर्वाग्रह का एक रूप जहाँ महिलाओं के प्रति प्रतीत होने वाले सकारात्मक या सुरक्षात्मक दृष्टिकोण वास्तव में इस रूढ़ि को पुष्ट करते हैं, कि महिलाएँ पुरुषों की तुलना में कमजोर या कम सक्षम हैं।
    • अनिवार्य अवकाश के माध्यम से विशेष देखभाल या दया प्रदान करना वास्तव में भेदभाव का कारण बन सकता है, जिससे इस विचार को बल मिलता है कि महिलाएँ कमजोर हैं और पुरुषों के समान स्तर पर कार्य करने में असमर्थ हैं।
  • प्रतिभा का कम मूल्यांकन: अनिवार्य अवकाश से महिलाओं की प्रतिभा का कम मूल्यांकन हो सकता है, और उनकी उत्पादकता पर निरंतर प्रश्न उठ सकते हैं।
  • हानिकारक रूढ़ियों का सुदृढ़ीकरण: यह एक सामंती मानसिकता को मजबूत करने का जोखिम उठाता है कि पुरुष धन का सृजन करते हैं, जबकि महिलाएँ मुख्य रूप से प्रजनन के लिए हैं, जिससे संभावित रूप से महिलाओं को ‘गैर-निष्पादित परिसंपत्ति’ के रूप में लेबल किया जा सकता है।

मासिक धर्म संबंधी चिकित्सा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

  • सामान्य शारीरिक प्रक्रिया: मासिक धर्म महिला शरीर का एक प्राकृतिक जैविक कार्य है, न कि कोई बीमारी या रोग संबंधी स्थिति।
  • कलंक (Stigma) बढ़ने का जोखिम: मासिक धर्म को अनिवार्य अवकाश की आवश्यकता वाली चिकित्सा स्थिति के रूप में मानने से इससे से जुड़े सामाजिक कलंक और वर्जनाएँ मजबूत हो सकती हैं।
  • दर्द के स्तर पर साक्ष्य: जबकि लगभग 5%-15% महिलाएँ गंभीर मासिक धर्म दर्द का अनुभव करती हैं जिसके लिए आराम की आवश्यकता होती है, लगभग 45%-95% महिलाएँ कम दर्द का अनुभव करती हैं, जो एक सार्वभौमिक अनिवार्य अवकाश नीति को वैज्ञानिक तथा तार्किक रूप से संदिग्ध बनाता है।

वैश्विक और घरेलू अनुभव

  • स्पेन: पाँच दिनों के सवैतनिक अवकाश की पेशकश करने वाला पहला यूरोपीय देश, फिर भी कई महिलाएँ इससे जुड़े कलंक के कारण इसका उपयोग करने से बचती हैं।
  • जापान और दक्षिण कोरिया: जापान में, 1% से भी कम कर्मचारी उपलब्ध सवैतनिक अवकाश का उपयोग करते हैं।
    • दक्षिण कोरिया में, यह अवकाश अवैतनिक है और लगभग कभी भी उपयोग नहीं किया जाता है।
  • जाम्बिया: सवैतनिक अवकाश उपलब्ध है, लेकिन अक्सर इसका दुरुपयोग अतिरिक्त छुट्टियों के रूप में किया जाता है।
  • भारत (कर्नाटक): एक दिन की सवैतनिक अवकाश नीति में भेदभाव के भय के कारण मिश्रित अनुपालन देखा गया।
  • करियर संबंधी भय: वर्तमान में, 72% महिलाएँ पदोन्नति या महत्त्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स छूटने की चिंताओं के कारण मातृत्व अवकाश (maternity leave) लेने से डरती हैं।
    • मासिक धर्म अवकाश इन डरों को बढ़ा सकता है, और महिलाओं के नेतृत्व भूमिकाओं तक पहुँचने के अवसरों को सीमित कर सकता है।

असंगठित क्षेत्र

  • मजदूरी पर निर्भरता: अनिवार्य सवैतनिक अवकाश से असंगठित क्षेत्र (जैसे- कृषि श्रमिक और दैनिक वेतन भोगी) को लाभ नहीं होगा, क्योंकि ये महिलाएँ घर पर रहने के लिए अपनी दैनिक मजदूरी नहीं समाप्त कर सकतीं।

आगे की राह

  • सक्षम बुनियादी ढाँचे पर ध्यान: लोकलुभावन नीतियों की बजाय, कार्यस्थलों को ऐसा सहायक बुनियादी ढाँचा निर्मित करना चाहिए, जो महिलाओं को उत्पादक बने रहते हुए मासिक धर्म स्वास्थ्य का प्रबंधन करने में सक्षम बनाए।
  • समर्पित विश्राम स्थल: कार्यालय शांत विश्राम कक्ष प्रदान कर सकते हैं, जहाँ महिलाएँ कठिन मासिक धर्म के दिनों में छोटे ब्रेक ले सकें।
  • सेनेटरी उत्पादों तक पहुँच: कार्यस्थलों में गरिमापूर्ण पहुँच सुनिश्चित करने के लिए सेनेटरी उत्पाद वेंडिंग मशीनें स्थापित करना।
  • कार्यस्थल पर चिकित्सा सहायता: मासिक धर्म की परेशानी को प्रबंधित करने के लिए बुनियादी दर्द निवारक दवाएँ और स्वास्थ्य सहायता प्रदान करना।
  • लचीली कार्य व्यवस्था: ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) विकल्प या लचीले घंटे प्रदान करना, जिससे कर्मचारी यदि आवश्यक हो तो बाद में काम की भरपाई कर सकें।
  • निवारक स्वास्थ्य पहल: दीर्घकालिक महिला स्वास्थ्य में सुधार के लिए नियमित व्यायाम, स्वास्थ्य जागरूकता कार्यशालाओं और कैंसर जैसी बीमारियों की जाँच को प्रोत्साहित करना।

निष्कर्ष

कार्यस्थल पर लैंगिक समानता सुनिश्चित करने के लिए ऐसी नीतियों की आवश्यकता है, जो रूढ़ियों को मजबूत या अनजाने में उनके रोजगार के अवसरों को सीमित किए बिना महिलाओं को सशक्त बनाएँ।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न. आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए, कि क्या अनिवार्य मासिक धर्म अवकाश नीतियाँ कार्यस्थल पर समानता को बढ़ावा दे सकती हैं, या अनजाने में रोजगार में लैंगिक भेदभाव को पुष्ट कर सकती हैं।

(15 अंक, 250 शब्द)

भारत में ‘मासिक धर्म अवकाश’ का अधिकार

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