संदर्भ:
भारत हीट वेव्स (लू), जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते जल तनाव (water stress) का सामना कर रहा है।
उदाहरण: ठाणे
- ठाणे एक महत्त्वपूर्ण दैनिक जल तनाव का सामना कर रहा है, जो शहरी जल की कमी की बढ़ती चुनौती को उजागर करता है।
- उपचारित अपशिष्ट जल का प्रभावी पुनरुपयोग इस घाटे को व्यापक सीमा तक कम कर सकता है, तथा स्वच्छ जल के संसाधनों पर निर्भरता को कम कर सकता है।
जल उपलब्धता के संकेतक
| प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता |
स्थिति |
| 1700 m³ से अधिक |
कोई चिंता नहीं |
| 1700 m³ से कम |
जल तनाव |
| 1000 m³ से कम |
जल की कमी |
2050 तक, भारत में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता घटकर जल-कमी (water-scarcity) की सीमा के करीब पहुँचने की उम्मीद है।
चक्रीय जल अर्थव्यवस्था के बारे में:
- चक्रीय जल अर्थव्यवस्था जल प्रबंधन के लिए एक सतत दृष्टिकोण है, जो कम करने (Reduce), पुनरुपयोग (Reuse), और पुनर्चक्रण (Recycle) के सिद्धांतों पर बल देता है।
- पारंपरिक “उपयोग करो और फेंक दो” मॉडल का प्रयोग करने की बजाय, यह विभिन्न उद्देश्यों के लिए अपशिष्ट जल के उपचार और पुनरुपयोग को बढ़ावा देता है, जिससे पानी की बर्बादी कम होती है, स्वच्छ जल के संसाधनों पर दबाव घटता है, तथा दीर्घकालिक जल सुरक्षा बढ़ती है।
उपचारित अपशिष्ट जल के उपयोग:
उपचारित जल का उपयोग किया जा सकता है:
- कृषि में
- भू-निर्माण में
- सार्वजनिक पार्कों में
- निर्माण कार्यों में
- सार्वजनिक शौचालयों में
- कपड़ा उद्योगों में
- झील पुनरुद्धार में
- जल निकायों में
ये सभी गैर-पेय उपयोगों के उदाहरण हैं।
चक्रीय जल अर्थव्यवस्था के लाभ
- आर्थिक लाभ:
- यह अपशिष्ट जल उपचार और पुनरुपयोग के क्षेत्र में ₹3 लाख करोड़ का संभावित बाजार तैयार करता है।
- यह उपचार संयंत्रों, पुनर्चक्रण अवसंरचना और जल-प्रबंधन प्रौद्योगिकियों में महत्त्वपूर्ण निजी निवेश को आकर्षित करता है।
- रोजगार सृजन:
- जल-पुनरुपयोग बुनियादी ढाँचे के विस्तार से 2047 तक लगभग 1 लाख रोजगार का सृजन हो सकता है।
- ये रोजगार के अवसर संयंत्र निर्माण, संचालन, रखरखाव, इंजीनियरिंग और पर्यावरण सेवाओं में उत्पन्न होंगे।
- कम हुआ जल तनाव:
- उपचारित अपशिष्ट जल का पुनरुपयोग नदियों, जलाशयों और भूजल स्रोतों पर दबाव को कम करता है।
- यह पीने और अन्य आवश्यक उपयोगों के लिए अधिक स्वच्छ जल उपलब्ध कराकर जल सुरक्षा में सुधार करने में मदद करता है।
प्रमुख सिफारिशें
- शहर-विशिष्ट पुनरुपयोग योजनाएं: शहरों को अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के आधार पर अनुकूलित जल-पुनरुपयोग रणनीतियों को अपनाना चाहिए, जैसे- चेन्नई में जल निकायों की रक्षा करना, ठाणे में निर्माण माँग को पूरा करना तथा सूरत में औद्योगिक आवश्यकताओं का समर्थन करना।
- हाइब्रिड वित्तपोषण को बढ़ावा देना: हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM) के उपयोग का विस्तार करें, जहाँ सरकार प्रारंभिक वित्तपोषण प्रदान करती है, निजी क्षेत्र शेष राशि का निवेश करता है, और दोनों परियोजना के जोखिमों को साझा करते हैं।
- सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STPs) में सुधार: खराब रखरखाव, कर्मचारियों की कमी, अपर्याप्त बुनियादी ढांचे और बिजली आपूर्ति की बाधाओं जैसे मुद्दों का समाधान करके एसटीपी (STPs) के प्रदर्शन को मजबूत करें।
- शून्य तरल निर्वहन (ZLD) अपनाना: उद्योगों को अपशिष्ट जल का आंतरिक रूप से उपचार करना चाहिए तथा सार्वजनिक सीवेज नेटवर्क और जल निकायों में जहरीले अपशिष्टों के बहाव को रोकना चाहिए।
- राष्ट्रीय चक्रीय जल मिशन शुरू करना: सतत जल प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए विकेन्द्रीकृत उपचार संयंत्रों को बढ़ावा दें, समर्पित जल-पुनरुपयोग एजेंसियों की स्थापना, जल संरक्षण जागरूकता विस्तार तथा पानी को एक मूल्यवान आर्थिक संसाधन के रूप में मान्यता दें।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
प्रश्न. रेखीय से चक्रीय जल अर्थव्यवस्था में संक्रमण न केवल एक पारिस्थितिक आवश्यकता है, बल्कि भारत के लिए एक बहुत बड़ा आर्थिक अवसर भी है। शहरी अपशिष्ट जल के उपचार में आने वाली चुनौतियों की चर्चा कीजिए और उन्हें दूर करने के उपाय सुझाइए।
(15 अंक, 250 शब्द)
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