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एशियाई शेरों के लिए एक अन्य आवास स्थल की आवश्यकता

Lokesh Pal July 06, 2026 05:30 4 0

संदर्भ:

भारत ने एशियाई शेरों की आबादी के संरक्षण में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, विगत शताब्दी में उनकी संख्या में अत्यधिक वृद्धि दर्ज की गई है।

  • हालाँकि, इस संरक्षण उपलब्धि के बावजूद, लगभग पूरी वन आबादी गुजरात के गिर परिदृश्य तक ही सीमित है, जो इस प्रजाति को बीमारी के प्रकोप, प्राकृतिक आपदाओं और अन्य विनाशकारी घटनाओं के प्रति संवेदनशील बनाती है।
  • संरक्षण विशेषज्ञों और सर्वोच्च न्यायालय ने एशियाई शेरों की भौगोलिक रूप से अलग दूसरी आबादी स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया है।
    • एक ही पृथक आबादी को बनाए रखने से जुड़े जोखिमों को कम करके प्रजातियों के दीर्घकालिक अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए, एक दूसरा आवास आवश्यक माना जाता है।

पृष्ठभूमि

  • ऐतिहासिक रूप से, एशियाई शेर मध्य पूर्व से लेकर उत्तरी और पश्चिमी भारत तक पाए जाते थे।
  • अत्यधिक शिकार और आवास क्षति ने बीसवीं सदी की शुरुआत के दौरान उनकी संख्या को अत्यंत कम कर दिया।
  • जूनागढ़ के नवाब द्वारा शुरू किए गए संरक्षण प्रयासों ने उन्हें विलुप्त होने से बचाने में मदद की।
  • आज, पूरी वन आबादी मुख्य रूप से गुजरात के गिर परिदृश्य में जीवित है, जिससे यह विश्व की सबसे बड़ी संरक्षण सफलता की कहानियों में से एक बन गई है।

दूसरे आवास स्थल की आवश्यकता, क्यों?

  • एकल आबादी का जोखिम: पूरी जंगली आबादी एक ही भौगोलिक क्षेत्र में केंद्रित है।
    • एक ही बीमारी का प्रकोप, जंगल की आग, चक्रवात, सूखा, या कोई अन्य प्राकृतिक आपदा पूरी प्रजाति के अस्तित्व को खतरे में डाल सकती है।
  • बीमारी के प्रति संवेदनशीलता: 2018 में, कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के प्रकोप के कारण गिर में कई एशियाई शेरों की मौत हो गई थी।
    • इस घटना ने एक ही आवास में सघन आबादी बनाए रखने के खतरे को प्रदर्शित किया।
  • निम्न आनुवंशिक विविधता: भौगोलिक रूप से विशिष्ट आबादी के भीतर निरंतर अंतःप्रजनन आनुवंशिक विविधता को कम करता है।
    • निम्न आनुवंशिक भिन्नता बीमारियों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाती है, और प्रजातियों की अनुकूलन क्षमता को कम करती है।
  • अवरोध प्रभाव (Bottleneck Effect): एक जनसंख्या अवरोध (पॉपुलेशन बॉटलनैक) तब उत्पन्न होता है, जब कोई प्रजाति बहुत छोटी आबादी के माध्यम से जीवित बचती है।
    • अवरोध के परिणामस्वरूप कम हुई आनुवंशिक विविधता, विलुप्ति के दीर्घकालिक जोखिम को बढ़ाती है।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश

  • 2013 में, सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया था, कि एशियाई शेरों के एक समूह को गिर राष्ट्रीय उद्यान से कूनो राष्ट्रीय उद्यान में स्थानांतरित किया जाना चाहिए।
  • न्यायालय ने माना, कि वन्यजीव संरक्षण राजनीतिक विचारों की बजाय पारिस्थितिक सिद्धांतों द्वारा निर्देशित होना चाहिए।
  • इसने आगे यह भी देखा, कि एशियाई शेर भारत की राष्ट्रीय विरासत हैं और उन्हें किसी एक राज्य की विशेष संपत्ति नहीं माना जा सकता है।

परियोजना में देरी क्यों हुई है?

  • गुजरात का विरोध
    • गुजरात ने राज्य से बाहर शेरों के स्थानांतरण का विरोध किया है।
    • इसका तर्क है, कि गिर ने इस प्रजाति का सफलतापूर्वक संरक्षण किया है और वह एक वैकल्पिक आवास के रूप में कूनो राष्ट्रीय उद्यान की उपयुक्तता पर प्रश्न उठाता है।
  • नीतिगत गतिरोध
    • इस मुद्दे के परिणामस्वरूप इनके मध्य एक लंबा संघर्ष उत्पन्न हो गया है:
      • वैज्ञानिक सिफारिशें,
      • न्यायिक निर्देश, और
      • राज्य स्तरीय राजनीतिक विचार।

प्रोजेक्ट लॉयन (Project Lion)

  • 2020 में शुरू किए गए प्रोजेक्ट लॉयन का उद्देश्य है:
    • एशियाई शेरों के लिए अतिरिक्त उपयुक्त आवासों की पहचान करना।
    • आवास प्रबंधन को मजबूत करना
    • रोग निगरानी में सुधार
    • दीर्घकालिक संरक्षण योजनाओं का विस्तार

बरदा वन्यजीव अभयारण्य, एक पूर्ण समाधान क्यों नहीं है?

  • गुजरात ने बरदा वन्यजीव अभयारण्य को एक वैकल्पिक आवास के रूप में प्रस्तावित किया था।
  • हालाँकि, विशेषज्ञों का तर्क है कि बरदा – गिर के बहुत करीब स्थित है।
  • परिणामस्वरूप, एक बीमारी का प्रकोप या प्राकृतिक आपदा दोनों आबादी को एक साथ प्रभावित कर सकती है, जिससे जोखिम विविधीकरण का उद्देश्य विफल हो जाता है।

अवधारणा : मेटापॉपुलेशन (Metapopulation)

  • एक मेटापॉपुलेशन एक ही प्रजाति की भौगोलिक रूप से पृथक आबादी का एक नेटवर्क है, जो आपस में सीमित संपर्क बनाए रखते हुए अलग-अलग आवासों में रहते हैं।
  • लाभ
    • विलुप्ति के जोखिम को कम करता है।
    • स्थानीय आपदाओं के कारण होने वाले पूर्ण नुकसान को रोकता है।
    • दीर्घकालिक आनुवंशिक विविधता में सुधार करता है।
    • पारिस्थितिक लचीलेपन को बढ़ाता है।
    • स्थानीय आबादी में गिरावट के बाद प्रजातियों की बहाली की सुविधा प्रदान करता है।

महत्त्व

  • एशियाई शेर का दीर्घकालिक अस्तित्व सुनिश्चित करता है।
  • भारत के जैव विविधता संरक्षण प्रयासों को मजबूत करता है।
  • पारिस्थितिकी तंत्र के लचीलेपन को बढ़ाता है।
  • विज्ञान आधारित वन्यजीव प्रबंधन के महत्त्व को दर्शाता है।
  • वैश्विक जैव विविधता संरक्षण ढाँचे के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं का समर्थन करता है।

चुनौतियाँ

  • अंतर-राज्यीय स्थानांतरण के प्रति राजनीतिक प्रतिरोध
  • संभावित स्थानांतरण क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष
  • आवास की तैयारी और शिकार की उपलब्धता
  • रोग निगरानी और पशु चिकित्सा प्रबंधन
  • क्षेत्रीय हितों के साथ संरक्षण प्राथमिकताओं को संतुलित करना।

आगे की राह

  • सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों को समयबद्ध तरीके से लागू करना।
  • गिर परिदृश्य से बाहर एक वैज्ञानिक रूप से चयनित दूसरी स्वतंत्र आबादी विकसित करना।
  • रोग निगरानी और वन्यजीव स्वास्थ्य निगरानी को मजबूत करना।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के मध्य सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना।
  • दीर्घकालिक प्रजाति अनुकूलन के लिए मेटापॉपुलेशन-आधारित संरक्षण रणनीति अपनाना।
  • मानव-वन्यजीव संघर्षों को कम करने के लिए सामुदायिक भागीदारी और मुआवजा तंत्र का विस्तार करना।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न. “भारत में एशियाई शेर का संरक्षण एक उल्लेखनीय सफलता की कहानी है, फिर भी यह पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील है।” एशियाई शेरों के लिए भौगोलिक रूप से पृथक आबादी की आवश्यकता का विश्लेषण कीजिए तथा इसके कार्यान्वयन में विद्यमान प्रशासनिक बाधाओं पर चर्चा कीजिए।

(15 अंक, 250 शब्द)

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