प्रश्न की मुख्य माँग
- रणनीतिक शक्ति के उपकरण के रूप में चोकपॉइंट को समझाइए।
- हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की विस्तार रणनीति का वर्णन कीजिए।
- भारत के रणनीतिक उपाय को सुझाइए।
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उत्तर
हॉर्मुज और मलक्का जैसे भौगोलिक चोकपॉइंट्स वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं, किंतु उनका महत्त्व केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। ये भू-राजनीतिक शक्ति संतुलन को भी प्रभावित करते हैं, विशेषकर हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती उपस्थिति के संदर्भ में।
रणनीतिक शक्ति के उपकरण के रूप में चोकपॉइंट्स
- ऊर्जा नियंत्रण: चोकपॉइंट्स वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और सामरिक दबाव का प्रमुख साधन हैं।
- उदाहरण: हॉर्मुज जलडमरूमध्य से लगभग 25% वैश्विक तेल और भारत के 50% से अधिक एलएनजी आयात गुजरते हैं।
- व्यापारिक प्रभुत्व: इन मार्गों पर नियंत्रण वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं और व्यापार की दक्षता को प्रभावित करता है।
- उदाहरण: मलक्का जलडमरूमध्य से लगभग 30% वैश्विक व्यापार और पूर्वी एशिया के लिए 80% तेल आपूर्ति होती है।
- भूराजनीतिक दबाव: इन मार्गों में व्यवधान रणनीतिक हथियार के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
- उदाहरण: ईरान से जुड़े युद्ध के खतरों ने आपूर्ति बाधित कर भारत के लिए लागत बढ़ा दी।
- सुरक्षा महत्त्व: नौसैनिक उपस्थिति प्रमुख समुद्री मार्गों पर प्रभाव सुनिश्चित करती है।
- उदाहरण: हिंद महासागर में प्रतिवर्ष लगभग 1,00,000 जहाजों का आवागमन इसे अत्यंत रणनीतिक बनाता है।
- सीमित विकल्प: वैकल्पिक मार्गों की कमी से संकट के समय संवेदनशीलता बढ़ जाती है।
- उदाहरण: हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने पर खाड़ी देशों के निर्यात के लिए कोई व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध नहीं है।
हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की विस्तार रणनीति
- मलक्का पर निर्भरता: चीन की मलक्का पर अत्यधिक निर्भरता के कारण वह समुद्री मार्गों को सुरक्षित करने और उनसे बचने के प्रयास कर रहा है।
- उदाहरण: चीन के लगभग 80% तेल आयात मलक्का जलडमरूमध्य से गुजरता है।
- बंदरगाहों का विस्तार: बंदरगाहों का विकास उसकी रणनीतिक और लॉजिस्टिक पहुँच को बढ़ाता है।
- उदाहरण: हिंद महासागर क्षेत्र में चीन समर्थित बंदरगाह परियोजनाएँ (स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स रणनीति)।
- नौसैनिक उपस्थिति: समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा के लिए हिंद महासागर में उसकी नौसैनिक तैनाती बढ़ रही है।
- उदाहरण: पीएलए नौसैनिक जहाज नियमित रूप से एस्कॉर्ट और निगरानी मिशनों के लिए तैनात रहते हैं।
- व्यापारिक गलियारे: वैकल्पिक भूमि-समुद्र मार्गों का विकास चोकपॉइंट्स पर निर्भरता को कम करता है।
- उदाहरण: चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा, शिनजियांग को ग्वादर बंदरगाह से जोड़ता है, जिससे मलक्का को दरकिनार किया जा सकता है।
- रणनीतिक प्रतिस्पर्द्धा: चीन की विस्तारित उपस्थिति भारत के साथ रणनीतिक प्रतिस्पर्द्धा को तीव्र करती है।
- उदाहरण: मलक्का के निकट अंडमान सागर क्षेत्र में चीन की सक्रियता भारत की समुद्री बढ़त को प्रभावित करती है।
भारत के रणनीतिक उपाय
- मार्ग विविधीकरण: संवेदनशील चोकपॉइंट्स पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक मार्ग विकसित किए जा रहे हैं।
- उदाहरण: भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) लाल सागर मार्ग को बायपास करने का प्रयास है।
- ऊर्जा सुरक्षा: ऊर्जा भंडारण और आयात स्रोतों का विविधीकरण किया जा रहा है।
- उदाहरण: लगभग 5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता वाले रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार।
- नौसैनिक क्षमता सुदृढ़ीकरण: हिंद महासागर क्षेत्र में प्रमुख चोकपॉइंट्स के निकट नौसैनिक तैनाती बढ़ाई जा रही है।
- उदाहरण: मलक्का जलडमरूमध्य के आस-पास भारतीय नौसेना की सक्रिय उपस्थिति।
- क्षेत्रीय साझेदारी: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को मजबूत किया जा रहा है।
- उदाहरण: स्थिर और मुक्त इंडो-पैसिफिक के लिए महासागर (MAHASAGAR) दृष्टिकोण।
- घरेलू क्षमता निर्माण: ऊर्जा और उर्वरकों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
- उदाहरण: नवीकरणीय ऊर्जा और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देकर आयात निर्भरता कम करना।
निष्कर्ष
चोकपॉइंट्स, वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित करने वाले निर्णायक भू-राजनीतिक साधन हैं। भारत के लिए आवश्यक है कि वह विविधीकरण, साझेदारी और क्षमता निर्माण के माध्यम से अपने समुद्री हितों की सक्रिय रूप से सुरक्षा करे, ताकि उभरती चुनौतियों का सामना करते हुए बदलते इंडो-पैसिफिक परिदृश्य में रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित की जा सके।
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