Q. उन संरचनात्मक बाधाओं का विश्लेषण कीजिए जो भारतीय महिला उद्यमियों को अपने व्यवसायों को स्थानीय से वैश्विक स्तर तक विस्तार देने से रोकती हैं। ऋण अंतराल (Credit Gap) को पाटने के उपाय सुझाइए। (10 अंक, 150 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • संरचनात्मक बाधाओं की चर्चा कीजिए।
  • ऋण अंतराल (क्रेडिट गैप) को पाटने के उपाय सुझाइए।

उत्तर

भारत में महिला उद्यमिता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, किंतु स्थानीय स्तर की सफलता से वैश्विक विस्तार तक पहुँच अभी भी सीमित है। वित्त, नेटवर्क और नीतिगत पारिस्थितिकी तंत्र में मौजूद संरचनात्मक बाधाएँ, प्रारंभिक स्तर पर बढ़ती भागीदारी के बावजूद, उनके विकास की संभावनाओं को बाधित करती हैं।

संरचनात्मक बाधाएँ

  • ऋण संबंधी बाधाएँ: विकास-स्तर की पूँजी तक सीमित पहुँच सूक्ष्म स्तर से आगे विस्तार को बाधित करती है।
    • उदाहरण: मास्टरकार्ड महिला उद्यमिता सूचकांक में भारत का स्थान काफी नीचे (57/65) है।
  • नेटवर्क की कमी: वैश्विक संपर्कों की कमी बाजार तक पहुँच और साझेदारियों को सीमित करती है।
  • नीतिगत बहिष्करण: औद्योगिक नीतियों में कम प्रतिनिधित्व संस्थागत समर्थन को कमजोर करता है।
    • उदाहरण: निर्यात और नवाचार आधारित क्षेत्रों में महिलाओं की सीमित भागीदारी।
  • नियामकीय जटिलता: अनुपालन का बोझ विस्तार और निर्यात को हतोत्साहित करता है।
    • उदाहरण: अंतरराष्ट्रीय मानकों और डिजिटल व्यापार नियमों को पूरा करने में महिला उद्यमियों को कठिनाई होती है।
  • क्षेत्रीय संकेंद्रण: कम पैमाने वाले क्षेत्रों में अधिक भागीदारी से विकास की संभावनाएँ सीमित रहती हैं।
    • उदाहरण: किनारा कैपिटल रिपोर्ट के अनुसार, महिलाएँ मुख्यतः सूक्ष्म और सेवा क्षेत्रों में केंद्रित हैं, न कि पूँजी-प्रधान क्षेत्रों में।

ऋण अंतराल (क्रेडिट गैप) को पाटने के उपाय

  • लक्षित ऋण व्यवस्था: महिला-नेतृत्व वाले सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSMEs) के लिए विकास-स्तर की विशेष वित्तीय सहायता प्रदान की जाए।
    • उदाहरण: स्टैंड-अप इंडिया योजना का विस्तार कर बड़े ऋण उपलब्ध कराना।
  • विनिर्माण पर जोर: संपत्ति-आधारित क्षेत्रों, विशेषकर विनिर्माण, को बढ़ावा देकर ऋण-योग्यता में सुधार किया जाए।
  • क्रेडिट गारंटी: सरकारी गारंटी के माध्यम से ऋणदाताओं के जोखिम को कम किया जाए।
    • उदाहरण: सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट को महिला उद्यमियों के लिए सुदृढ़ करना।
  • संस्थागत मंच: निवेशकों और वैश्विक खरीद प्रणालियों तक पहुँच सुनिश्चित की जाए।
    • उदाहरण: वुमन्नोवेटर (Womennovator) जैसे प्लेटफॉर्म अंतरराष्ट्रीय सहयोग और फंडिंग नेटवर्क को बढ़ावा देते हैं।
  • वित्तीय साक्षरता: वित्तीय विकल्पों और अनुपालन के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए।
    • उदाहरण: प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ऋण उपलब्ध कराने के साथ उद्यमिता जागरूकता को भी प्रोत्साहित करती है।

निष्कर्ष

संरचनात्मक बाधाओं को दूर करने के लिए वित्त, नीतिगत समावेशन और वैश्विक एकीकरण को समन्वित रूप से मजबूत करना आवश्यक है। लक्षित और पारिस्थितिकी-आधारित हस्तक्षेपों के माध्यम से ऋण अंतर को पाटकर महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को समावेशी और सतत् वैश्विक विकास के प्रमुख प्रेरक में बदला जा सकता है।

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