Q. भारत की उपनिवेशवाद मुक्ति प्रक्रिया के संदर्भ में वर्ष 1946 के रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह के कारणों, प्रसार और महत्व पर चर्चा कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • वर्ष 1946 के रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह के कारणों की चर्चा कीजिए।
  • विद्रोह के प्रसार का उल्लेख कीजिए।
  • भारत की उपनिवेशवाद-उन्मूलन प्रक्रिया में उसका महत्त्व बताइए।

उत्तर

वर्ष 1946 का रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह एक अल्पकालिक किंतु प्रभावशाली सशस्त्र उभार था, जो बंबई में प्रारंभ होकर विभिन्न नौसैनिक प्रतिष्ठानों तक प्रसारित हो गया। बढ़ते सांप्रदायिक तनावों के बीच घटित यह घटना, द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात् भारत की स्वतंत्रता की अंतिम यात्रा के दौरान उभरती औपनिवेशिक-विरोधी उग्रता का एक महत्त्वपूर्ण चरण सिद्ध हुई।

वर्ष 1946 के रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह के कारण

  • नस्लीय भेदभाव: भारतीय नाविकों (ratings) को ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा भेदभावपूर्ण व्यवहार का सामना करना पड़ता था।
    • उदाहरण: बंबई स्थित HMIS तलवार में असमान व्यवहार और नस्लीय अपमान।
  • दुर्बल सेवा परिस्थितियाँ: खाद्य गुणवत्ता, वेतन तथा आवासीय परिस्थितियों ने असंतुलन और असंतोष को जन्म दिया।
  • युद्धोत्तर राजनीतिक उग्रता: द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद विश्वभर में उभरी औपनिवेशिक-विरोधी धाराओं ने सशस्त्र बलों को भी प्रभावित किया।
    • उदाहरण: भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) के बंदियों की रिहाई की माँग।
  • राष्ट्रवादी भावना: नौसैनिकों ने अपनी सेवा-संबंधी शिकायतों को व्यापक स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ दिया।
  • राजनीतिक वार्ताओं का विघटन: शिमला सम्मेलन की विफलता के बाद बढ़ते सांप्रदायिक तनावों ने अस्थिरता को और तीव्र किया।
    • उदाहरण: कैबिनेट मिशन योजना से पूर्व उभरते राजनीतिक तनाव।

विद्रोह का प्रसार

  • नौसैनिक प्रतिष्ठानों में विस्तार: यह विद्रोह शीघ्र ही विभिन्न बंदरगाहों और नौसैनिक ठिकानों तक फैल गया, जिसमें 78 जहाजों और 20 तटीय प्रतिष्ठानों की भागीदारी रही।
  • भौगोलिक विस्तार: यह उभार पश्चिमी तट से पूर्वी तट तक फैल गया, जिसमें कराची, मद्रास, कोचीन, विशाखापट्टनम, कोलकाता तथा अंडमान द्वीपसमूह शामिल थे।
  • व्यापक सहभागिता: लगभग 20,000 नौसैनिक इस आंदोलन में सम्मिलित हुए, जिन्होंने सामूहिक रूप से कार्य करने से इनकार किया तथा जहाजों पर नियंत्रण स्थापित किया।
  • नागरिक एकजुटता: मजदूरों, छात्रों और शहरी निम्नवर्ग ने नौसैनिकों का समर्थन किया।
    • उदाहरण: बंबई के मिल क्षेत्रों में हड़तालें तथा सड़कों पर अवरोध।
  • शहरी विद्रोह का रूपांतरण: भूख-हड़ताल शीघ्र ही सशस्त्र टकराव में परिवर्तित हो गई।
    • उदाहरण: कमाठीपुरा और मदनपुरा में झड़पें तथा ब्रिटिश सैन्य बलों की तैनाती।

भारत की उपनिवेशवाद-उन्मूलन प्रक्रिया में महत्त्व

  • सशस्त्र बलों में असंतोष का प्रदर्शन: इस विद्रोह ने सैन्य संस्थानों के भीतर ब्रिटिश नियंत्रण के क्षरण को उजागर किया।
    • उदाहरण: नौसैनिकों का ब्रिटिश सैनिकों के साथ प्रत्यक्ष सशस्त्र संघर्ष में शामिल होना।
  • हिंदू–मुस्लिम एकता का क्षण: गहन होते सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के बीच यह दुर्लभ एकजुटता का उदाहरण था।
    • उदाहरण: कांग्रेस, मुस्लिम लीग और कम्युनिस्ट ध्वजों के साथ संयुक्त जुलूस।
  • शहरी जन-सक्रियता: मजदूरों और छात्रों ने विद्रोह को व्यापक जन-आंदोलन का रूप दिया।
    • उदाहरण: कपड़ा मिलों, रेलवे कार्यशालाओं और महाविद्यालयों का बंद होना।
  • साम्राज्य के अंत में उत्प्रेरक भूमिका: इसने औपनिवेशिक शासन की व्यापक अस्थिरता को उजागर किया।
    • उदाहरण: व्यवस्था बहाल करने हेतु ब्रिटिशों द्वारा बख़्तरबंद टुकड़ियों की तैनाती।
  • वैकल्पिक राजनीतिक संभावना: इस घटना ने अभिजात्य-स्तरीय वार्ताओं से परे सांप्रदायिक सीमाओं को लाँघती जन-एकजुटता की संभावना को इंगित किया।

निष्कर्ष

यद्यपि वर्ष 1946 का नौसैनिक विद्रोह अल्पकालिक था, फिर भी उसने ब्रिटिश शासन की घटती वैधता को स्पष्ट रूप से उजागर किया तथा गहरे ध्रुवीकृत कालखंड में सांप्रदायिक सीमाओं से परे एकजुटता की संभावनाओं को प्रदर्शित किया। भारत की उपनिवेशवाद-उन्मूलन की कथा में यह घटना एक ओर विभाजन के दुष्परिणामों के प्रति चेतावनी के रूप में, तो दूसरी ओर स्वतंत्रता-संग्राम में सामूहिक प्रतिरोध की निर्णायक भूमिका के सशक्त स्मरण के रूप में स्थापित है।

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