प्रश्न की मुख्य माँग
- बताइए कि सशस्त्र संघर्षों का महिलाओं पर क्या प्रभाव पड़ा है।
- चर्चाा कीजिए कि शांति निर्माण और संघर्ष समाधान में महिलाओं की भागीदारी का क्या महत्त्व है।
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उत्तर
विश्व भर में सशस्त्र संघर्षों के कारण महिलाएँ और बालिकाएँ हिंसा, विस्थापन तथा सामाजिक-आर्थिक वंचना के बढ़ते जोखिमों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाती हैं। जैसे-जैसे संस्थाएँ कमजोर होती हैं और मानवीय संकट गहराते हैं, महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो जाती है। इसलिए स्थायी और समावेशी शांति सुनिश्चित करने के लिए शांति निर्माण तथा संघर्ष समाधान की प्रक्रियाओं में महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य है।
मुख्य भाग
सशस्त्र संघर्षों का महिलाओं पर प्रभाव
- लैंगिक आधारित हिंसा के प्रति बढ़ता जोखिम: संघर्ष की परिस्थितियों में कानून-व्यवस्था तंत्र के कमजोर होने से यौन हिंसा, मानव तस्करी और शोषण की घटनाएँ बढ़ जाती हैं।
- उदाहरण: एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्टों में संघर्ष के दौरान सशस्त्र बलों द्वारा महिलाओं के साथ दुष्कर्म, यौन दासता और यातना की घटनाएँ दर्ज की गईं।
- बड़े पैमाने पर विस्थापन और मानवीय असुरक्षा: महिलाओं और बालिकाओं को असुरक्षित आश्रयों तथा आवश्यक सेवाओं की कमी जैसे जोखिमों का सामना करना पड़ता है।
- उदाहरण: संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त के अनुसार, वर्ष 2022 के आक्रमण के बाद यूक्रेन से पलायन करने वाले शरणार्थियों में महिलाओं और बच्चों की संख्या सबसे अधिक थी।
- आर्थिक असुरक्षा और आजीविका की हानि: संघर्ष आजीविका के साधनों को बाधित कर देता है, जिससे महिलाएँ अनौपचारिक या अस्थिर कार्यों में जाने को विवश हो जाती हैं तथा बिना भुगतान वाले देखभाल कार्यों का बोझ भी बढ़ जाता है।
- उदाहरण: वर्ष 2021 में अफगानिस्तान में सत्ता परिवर्तन के बाद महिलाओं के रोजगार पर लगाए गए प्रतिबंध।
- संस्थागत संरक्षण तंत्र का कमजोर होना: युद्ध शासन तंत्र को कमजोर कर देता है, जो अधिकारों की सुरक्षा और न्याय प्रदान करने के लिए जिम्मेदार होते हैं।
- स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सेवाओं तक पहुँच में बाधाएँ: सशस्त्र संघर्ष आधारभूत संरचना को नष्ट कर देते हैं और महिलाओं के कल्याण के लिए आवश्यक बुनियादी सेवाओं तक पहुँच को सीमित कर देते हैं।
- उदाहरण: सीरिया के गृहयुद्ध के दौरान अस्पतालों और विद्यालयों का व्यापक विनाश।
शांति निर्माण और संघर्ष समाधान में महिलाओं की भागीदारी का महत्त्व
- शांति समझौतों की स्थायित्व क्षमता को बढ़ाना: महिलाओं की भागीदारी से ऐसे शांति समझौते बनने की संभावना बढ़ती है, जो सामाजिक और मानवीय मुद्दों को अधिक व्यापक रूप से संबोधित करते हैं।
- उदाहरण: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 1325 महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करता है और स्थायी शांति में उनकी भूमिका को मान्यता देता है।
- संघर्ष के लैंगिक प्रभावों को संबोधित करना: महिला वार्ताकार हिंसा से सुरक्षा, पुनर्वास और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने की अधिक संभावना रखती हैं।
- सामुदायिक स्तर पर शांति निर्माण को सुदृढ़ करना: महिलाएँ अक्सर समुदायों और जमीनी स्तर की संस्थाओं में मध्यस्थ के रूप में कार्य करती हैं, जिससे मेल-मिलाप और संवाद को बढ़ावा मिलता है।
- संघर्षोत्तर पुनर्निर्माण में सुधार: महिलाओं की भागीदारी से यह सुनिश्चित होता है कि नीतियाँ शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और आजीविका जैसे दीर्घकालिक विकास संबंधी मुद्दों को संबोधित करें।
- समावेशी और लोकतांत्रिक शासन को बढ़ावा देना: शांति प्रक्रियाओं में भागीदारी महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और निर्णय-निर्माण की भूमिका को मजबूत करती है।
- उदाहरण: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से संबंधित संयुक्त राष्ट्र के विषय “अधिकार, न्याय, कार्यवाही: सभी महिलाओं और बालिकाओं के लिए” संस्थागत समावेशन की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
निष्कर्ष
संघर्ष के लैंगिक प्रभावों का समाधान करने के लिए संरक्षण तंत्र को सुदृढ़ करना, मानवीय सहायता व्यवस्थाओं को मजबूत बनाना और संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। शांति वार्ताओं, शासन और पुनर्निर्माण प्रयासों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व का विस्तार करना तथा महिला, शांति और सुरक्षा जैसे वैश्विक एजेंडा के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना स्थायी एवं समावेशी शांति प्राप्त करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
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