Q. पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट ने आयातित कच्चे तेल पर भारत की भारी निर्भरता और होर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक महत्व के कारण ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं। इस क्षेत्र में व्यवधानों के संभावित आर्थिक प्रभावों का विश्लेषण कीजिए और भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए क्या उपाय अपना सकता है, इस पर चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

प्रश्न की मुख्य माँग

  • पश्चिम एशिया में व्यवधानों के संभावित आर्थिक प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
  •  भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के उपाय सुझाइए।

उत्तर

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंताएँ पैदा कर दी हैं। भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 90% आयात करता है, इसलिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्त्वपूर्ण आपूर्ति मार्गों में किसी भी प्रकार का व्यवधान भारत जैसी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था पर गंभीर आर्थिक प्रभाव डाल सकता है। 

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पश्चिम एशिया में व्यवधानों के संभावित आर्थिक प्रभाव

  • आयात बिल में वृद्धि: तेल आपूर्ति मार्गों में व्यवधान से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ जाती हैं, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ता है और राजकोषीय घाटा बढ़ने की संभावना होती है।
    • उदाहरण: भारत अपनी तेल आवश्यकताओं का लगभग 90% आयात करता है, जिससे वह आपूर्ति झटकों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाता है।
  • मुद्रास्फीति का दबाव: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से ईंधन और परिवहन लागत बढ़ती है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में लागत-प्रेरित मुद्रास्फीति उत्पन्न होती है।
  • चालू खाते के संतुलन पर दबाव: ऊर्जा आयात में वृद्धि से चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है और व्यापक आर्थिक स्थिरता कमजोर हो सकती है।
    • उदाहरण: हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से आपूर्ति में व्यवधान भारत के कच्चे तेल के बड़े हिस्से को प्रभावित कर सकता है।
  • घरेलू ऊर्जा आपूर्ति पर प्रभाव: आपूर्ति में कमी से एलपीजी और पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है, जिससे उद्योगों और घरों दोनों पर असर पड़ता है।
    • उदाहरण: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत एलपीजी की बढ़ती माँग ने संकट के समय आपूर्ति संबंधी कमजोरियों को उजागर किया है।
  • रणनीतिक और कूटनीतिक संवेदनशीलता: ऊर्जा आयात पर अधिक निर्भरता भारत की विदेश नीति की स्वायत्तता को सीमित कर सकती है और उसे भू-राजनीतिक दबावों के प्रति संवेदनशील बना सकती है।
    • उदाहरण: पहले भारत को संयुक्त राज्य अमेरिका के दबाव के कारण रूस, ईरान और वेनेजुएला से तेल आयात कम करना पड़ा था। 

भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के उपाय

  • तेल आयात स्रोतों का विविधीकरण: कई आपूर्तिकर्ता देशों के साथ ऊर्जा साझेदारी बढ़ाने से किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम होती है।
    • उदाहरण: हाल के संकट ने भारत की ऊर्जा स्थिरता के लिए रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति के महत्त्व को उजागर किया।
  • रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार: बड़े आपातकालीन भंडार बनाने से अल्पकालिक आपूर्ति व्यवधानों के समय अर्थव्यवस्था को सहारा मिल सकता है।
    • उदाहरण: भारत ने भारतीय रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार लिमिटेड के माध्यम से रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार स्थापित किए हैं।
  • जैव ईंधन और एथेनॉल मिश्रण: वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग धीरे-धीरे आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता को कम कर सकता है।
    • उदाहरण: राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के तहत सरकार एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दे रही है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा की ओर संक्रमण: सौर, पवन और हरित हाइड्रोजन जैसे स्रोतों का विस्तार दीर्घकाल में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करता है।
  • संकट संचार और ऊर्जा योजना: पारदर्शी सूचना और समन्वित नीतिगत प्रतिक्रिया से घबराहट को रोका जा सकता है और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता सुनिश्चित की जा सकती है। 

निष्कर्ष

जैसे-जैसे भारत की ऊर्जा माँग बढ़ रही है, मजबूत और विविधीकृत ऊर्जा प्रणालियों का निर्माण अत्यंत आवश्यक हो जाता है। घरेलू ऊर्जा विकल्पों को सुदृढ़ करना, नई प्रौद्योगिकियों को अपनाना और सुरक्षित आपूर्ति शृंखलाओं का विकास करना भारत की भू-राजनीतिक झटकों के प्रति संवेदनशीलता को कम कर सकता है। इससे निरंतर आर्थिक विकास के लिए स्थिर और विश्वसनीय ऊर्जा उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।

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