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प्रश्न की मुख्य माँग
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द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) दो देशों के बीच संधियाँ हैं, जो टैरिफ और आयात कोटा जैसी बाधाओं को कम करके व्यापार और निवेश को सुविधाजनक बनाती हैं। वित्त वर्ष 24 में, भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड 118.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जिससे अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया। हाल की चर्चाएँ महत्त्वपूर्ण खनिजों, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और बाजार पहुँच पर केंद्रित हैं , जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध मजबूत हुए हैं।
प्रभाव क्षेत्र | सकारात्मक | चुनौतियाँ |
भारत की व्यापार नीति पर प्रभाव | निर्यात के बेहतर अवसर: भारतीय उद्योगों को अमेरिकी बाजार में तरजीही पहुँच प्राप्त होगी, जिससे फार्मास्यूटिकल्स, कपड़ा और IT सेवाओं को लाभ होगा। | विश्व व्यापार संगठन अनुपालन जोखिम: यदि BTA, MFN सिद्धांतों का उल्लंघन करता है, तो भारत को व्यापार विवादों और जवाबी उपायों का सामना करना पड़ सकता है। |
व्यापार विविधीकरण: चीन पर निर्भरता कम करता है, “चीन+1” व्यापार रणनीति का समर्थन करता है। | अमेरिकी प्रभाव में वृद्धि: भारत को अपनी नीतियों को अमेरिकी प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाने की आवश्यकता हो सकती है, जिससे स्वतंत्र वार्ता सीमित हो जाएगी।
उदाहरण के लिए: कृषि सब्सिडी कम करने के लिए अमेरिकी दबाव भारत के खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों को प्रभावित कर सकता है। |
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आर्थिक विकास पर प्रभाव | उच्चतर FDI प्रवाह: विनिर्माण, रक्षा और प्रौद्योगिकी में अमेरिकी निवेश को आकर्षित करता है।
उदाहरण के लिए: व्यापार समझौतों के बाद एप्पल ने iPhone का उत्पादन भारत में शुरू कर दिया। |
घरेलू उद्योगों पर दबाव: भारतीय किसानों और निर्माताओं को सस्ते अमेरिकी आयातों के खिलाफ संघर्ष करना पड़ सकता है।
उदाहरण के लिए: अमेरिकी डेयरी और पोल्ट्री निर्यात भारत के घरेलू डेयरी क्षेत्र के लिए चुनौती बन सकता है, जिससे ग्रामीण आजीविका प्रभावित हो सकती है। |
MSME को बढ़ावा: बेहतर बाजार पहुँच से छोटे व्यवसायों को विस्तार करने का अवसर मिलता है, जिससे रोजगार और सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि होती है।
उदाहरण के लिए: भारत के हस्तशिल्प और वस्त्र उद्योग अमेरिका को निर्यात बढ़ा सकते हैं, जिससे कारीगरों और छोटे निर्माताओं को लाभ होगा। |
संभावित व्यापार घाटे में वृद्धि : निर्यात वृद्धि के बिना अमेरिका से आयात में वृद्धि से भारत का व्यापार घाटा बढ़ सकता है।
उदाहरण के लिए: इलेक्ट्रॉनिक्स और चिकित्सा उपकरणों में भारत-अमेरिका व्यापार असंतुलन BTA के बाद और भी बदतर हो सकता है। |
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अमेरिका के साथ सामरिक संबंधों पर प्रभाव | भारत-अमेरिका सामरिक साझेदारी को मजबूत करना: रक्षा, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा में सहयोग को सुदृढ़ करना।
उदाहरण के लिए: QUAD में भारत की भागीदारी भारत-अमेरिका आर्थिक सहयोग के अनुरूप है। |
आर्थिक निर्भरता का जोखिम: अमेरिकी व्यापार और निवेश पर अत्यधिक निर्भरता भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को सीमित कर सकती है।
उदाहरण के लिए: रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के साथ तालमेल बिठाने के लिए अमेरिकी दबाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करता है। |
चीन के आर्थिक प्रभाव का मुकाबला करना: चीन-केंद्रित आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए एक विकल्प प्रदान करता है।
उदाहरण के लिए: सेमीकंडक्टर के लिए अमेरिका द्वारा चीन पर निर्भरता कम करने से भारत की चिप विनिर्माण महत्त्वाकांक्षा को लाभ होगा। |
संभावित राजनयिक टकराव: बौद्धिक संपदा अधिकार, श्रम कानून और डिजिटल व्यापार पर विवाद।
उदाहरण के लिए: बौद्धिक संपदा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए भारतीय जेनेरिक दवाओं पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण विश्व व्यापार संगठन में विवाद उत्पन्न हो गया है। |
संतुलित और न्यायसंगत BTA भारत के व्यापार विविधीकरण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और निवेश प्रवाह के लिए एक बड़ा परिवर्तनकारी कदम हो सकता है। लाभ को अधिकतम करने के लिए, भारत को WTO-अनुपालन सुरक्षा उपाय, क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता और विनियामक संरेखण सुनिश्चित करना चाहिए। मेक इन इंडिया, PLI योजनाओं और डिजिटल व्यापार ढाँचों को एकीकृत करने वाली एक दूरदर्शी रणनीति, अमेरिका के साथ रणनीतिक संबंधों को मजबूत करते हुए वैश्विक आर्थिक महाशक्ति के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करेगी।
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