प्रश्न की मुख्य माँग
- एकीकृत खरीद की भूमिका अपनाने की प्रक्रिया को गति देना
- सामूहिक खरीद में चुनौतियों को रेखांकित कीजिए।
- भारत के नेतृत्व को बनाए रखने के उपाय सुझाइए।
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उत्तर
इंडिया एनर्जी वीक के दौरान भारत ने ऊर्जा सुरक्षा से आगे बढ़कर ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक परिवर्तन का संकेत दिया। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत, भारतीय सौर ऊर्जा निगम (SECI) द्वारा आयोजित ग्रीन अमोनिया नीलामियाँ इस बात का उदाहरण प्रस्तुत करती हैं कि किस प्रकार सामूहिक खरीद बाजार जोखिमों को कम कर सकती है, लागत को घटा सकती है तथा वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा व्यापार में भारत को नियम-निर्माता के रूप में स्थापित कर सकती है।
एकीकृत खरीद की भूमिका अपनाने की प्रक्रिया को गति देना
- पैमाने के माध्यम से माँग की सुनिश्चितता: बड़ी समेकित माँग (13 उर्वरक संयंत्रों में प्रतिवर्ष 7,24,000 टन) बाजार के विखंडन को कम करती है और सुनिश्चित खरीद (Assured Offtake) का वातावरण तैयार करती है।
- उदाहरण: ग्रीन हाइड्रोजन रूपातंरण हेतु रणनीतिक युक्तियाँ (SIGHT) कार्यक्रम के अंतर्गत भारतीय सौर ऊर्जा निगम की निविदा में 10-वर्षीय निश्चित मूल्य समझौते की पेशकश की गई।
- मूल्य निर्धारण एवं लागत में कमी: प्रतिस्पर्द्धी बोली प्रक्रिया ने ग्रीन अमोनिया और ग्रे अमोनिया के बीच मूल्य अंतर को कम किया।
- उदाहरण: निर्धारित मूल्य ₹49.75–₹64.74 प्रति किलोग्राम (लगभग $572–744 प्रति टन) रहा, जो H2Global नीलामी मानकों की तुलना में लगभग 40–50% कम था।
- निवेश जोखिम में कमी: दीर्घकालिक अनुबंधों और उत्पादन-आधारित सब्सिडी से परियोजनाओं की ऋण प्राप्त करने की क्षमता (Bankability) में सुधार होता है।
- उदाहरण: प्रारंभिक तीन वर्षों के लिए ₹8.82, ₹7.06 और ₹5.3 प्रति किलोग्राम की सब्सिडी प्रदान की गई।
- ग्रीन हाइड्रोजन व्युत्पन्न उत्पादों के लिए बाजार सृजन: ग्रीन अमोनिया, हाइड्रोजन की माँग को प्रेरित करने वाला प्रमुख अनुप्रयोग बनकर उभर रहा है।
- उदाहरण: इसे उर्वरक क्षेत्र के आयात से जोड़ा गया है (जो कुल अमोनिया आयात का लगभग 30% है)।
- वैश्विक मानक निर्धारण: संरचित नीलामी प्रक्रिया स्वच्छ अमोनिया आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की विश्वसनीयता को सुदृढ़ करती है।
- उदाहरण: यूरोपीय संघ और दक्षिण कोरिया की खरीद रूपरेखाओं के साथ तुलनात्मक संदर्भ।
सामूहिक खरीद से जुड़ी चुनौतियाँ
- जोखिम आवंटन एवं भुगतान सुरक्षा: प्रारंभिक निविदा विस्तार अनुबंध की स्पष्टता को लेकर चिंताओं को दर्शाता है।
- लागत प्रतिस्पर्द्धात्मकता अंतर: कुछ संदर्भों में ग्रे अमोनिया (~$515/टन) अभी भी सस्ती है।
- बुनियादी ढाँचागत बाधाएँ: बंदरगाह लॉजिस्टिक्स, भंडारण और शिपिंग में विस्तार की आवश्यकता है।
- नियामक अनिश्चितता: ग्रिड पहुँच, बैंकिंग और प्रमाणन मानकों में सामंजस्य की आवश्यकता है।
- वित्तपोषण बाधाएँ: उच्च प्रारंभिक पूँजी लागत के कारण लंबी अवधि के मिश्रित वित्तपोषण की आवश्यकता है।
भारत के नेतृत्व को बनाए रखने के उपाय
- स्थिर नियामक ढाँचा: वैश्विक मानकों के अनुरूप ग्रिड, बैंकिंग और प्रमाणन मानदंडों का सामंजस्य।
- मिश्रित वित्त और जोखिम न्यूनीकरण: निजी पूँजी को आकर्षित करने के लिए सरकार समर्थित गारंटी के साथ दीर्घकालिक ऋण योजनाएँ।
- हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण: चौबीसों घंटे ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए सौर-पवन-भंडारण मॉडल।
- अवसंरचना और निर्यात रणनीति: यूरोपीय संघ और पूर्वी एशियाई बाजारों तक पहुँच बनाने के लिए तटीय केंद्रों और शिपिंग गलियारों का विकास।
- घरेलू माँग के आधारों को मजबूत करना: पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं के लिए उर्वरकों से आगे बढ़कर शिपिंग और बिजली क्षेत्रों में विस्तार।
निष्कर्ष
भारतीय सौर ऊर्जा निगम के अंतर्गत भारत का एकीकृत खरीद मॉडल दर्शाता है कि कैसे रणनीतिक सरकारी हस्तक्षेप प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बनाए रखते हुए बाजारों को गति प्रदान कर सकता है। व्यापक पैमाने, अनुबंध नवाचार और नियामक स्थिरता के संयोजन से भारत वैश्विक ग्रीन अमोनिया व्यापार में भागीदार से निर्माता बन सकता है, जिससे तकनीकी संप्रभुता और स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व को मजबूती मिलेगी।
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